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On My Side

What it means to forgive and forget

What it means to love and be loved

What it means to bless and be blessed

I’ve learnt from you again and again. 85 more words

Spirituality

Megacity chaos in London and how Tesco Supermarkets inspired a return to Barcelona

My Masters in Barcelona passed like every holiday should – sleep after sunrise, sand between immigration law textbooks, and lecture breaks drinking short cold beers with my tutor Ricardo. 662 more words

Blog

गुरूजी का 'वचन'

गुरूजी की कविता गुरूजी के ही चरणों में समर्पित

कौन कहता हैं की, यह गुब्बारा ‘खाली’, बस. ‘खाली’ होता हैं ?
यह खालीपन ही बच्चेके ‘पंख’, और ‘उडनेका अरमान’ बनता हैं ॥१॥

यह खालीपन ही तो हैं, जो ‘कुछ होने’ का अहसास दिलाता हैं |
जड़ नहीं, बल्कि ‘सब कुछ’ चेतन, होनेका ‘विश्वास’ दिलाता हैं ॥२॥

बस ‘जो’ विश्वास मुझे कबसे हैं, ‘वही’ तुम्हेभी दिलाना चाहता हूँ ।
तुम ‘वह’ हो यह याद दिलानेकी, निरन्तरसी ‘साधना’ करता हूँ ॥३॥

इस ‘बार’ भी न समझे और ‘वही’ कहते रहे, ‘जो’ अबतक कहते आये हो ।
अगली ‘बार’ भी समझाने, फिर आऊंगा ‘जो’ अबतक समझ न पाये हो ॥४॥

अनंत, अखंड,अजन्मे, हो तुम, यह निःसंशय ‘वचन’ तुमको देता हूँ ।
ग्रहण करने परम ज्ञान, आओगे फिर तुम, वचन यह तुमसे लेता हूँ ॥५॥

अनंतसे ‘उसे’ हैं ‘प्रतीक्षा’ तुम्हारी, जब ‘सागर’ ही तुम्हे बन जाना हैं ।
देरसे भलेही पर आओगे निश्चित, जब ‘वही’पर तुम्हारा तय आना हैं ॥६॥

तुम बिन जश्न होगा क्या जश्न? तो जल्दी कैसी, और देरी क्या हैं ?
द्वार पे खड़ा मैं तिष्ठित, प्रतीक्षित, जब साथ तुम्हारे’ही’ मुझे जाना हैं ॥७ ॥

-प्रज्ञानम् ब्रह्म

Art Of Living

Stop thinking too much, action first!

This is my new motto. Recently I’ve noticed that the last year has been a lot about the “Big Transition” of going home to the Netherlands and about “thinking” about my personal, professional options back home. 258 more words

Art Of Living

Agape and All That Jazz

“You are free. You are free before the noonday sun. You’re free before the moon and you’re free before the stars, and you are free where there is no moon or sun, where there isn’t a single star in the sky.

1,243 more words
Women

To Live Is To Think

An excellent posting at Brain Pickings this morning on the value of meditation.

Meditation is:

often mistakenly interpreted by non-practitioners as non-thinking, an emptying of one’s mind, a cultivation of cognitive passivity…

32 more words
Blogging

आत्मनिरीक्षण

आत्मनिरीक्षण

एक शिल्पी ने अत्यंत सुन्दर मूर्ति बनायी। काम पूरा होने पर उसने मूर्ति की ओर खूब सूक्ष्मता से निहारा और फिर रोने लगा। लोग इकट्ठे हो गये। शिल्पकला को जानने वाले लोगों ने पूछाः “इतनी बढ़िया मूर्ति बनायी है। उसे देखकर रोते क्यों हो?”

“मैंने मूर्ति बनायी। फिर ढूँढा कि इसमें क्या कमी रह गई है, लेकिन मुझे इसमें कोई कमी नहीं दिख रही है। मुझे मेरी कोई कमी नहीं दिखती तो क्या मेरा ज्ञान यहीं रुक जायेगा? मैं इतना क्षुद्र हूँ कि मुझे अपनी कमी दिखती?”

कलाकार की क्या सजगता है !

अपनी कमी न दिखना यह मूर्खता है और कमी दिखानेवाले की करुणा न दिखना यह महा मूर्खता है। आपको कोई दिखाये कि आपमें यह गलती है तो आप उसको धन्यवाद दीजिये, उसको प्रणाम कीजिये। वह आपके लिए सीखने-सुधरने का, विकास करने का द्वार खोल रहा है।

अपनी कमी स्वयं ढूँढ लो और स्वीकार कर लो तो आपको प्रणाम है। धन्यवाद के पात्र हैं आप। अपनी कमी नहीं दिखती है तो उसे ढूँढिये, ढूँढने पर भी नहीं मिलती तो रोइयेः ‘हमारी दृष्टि इतनी सीमित हो गई है कि अपनी कमी नहीं दिखती?’

जैसे दूसरों की कमी जल्दी दिखती है और अपना सदगुण जल्दी दिखता है ऐसे ही अपनी कमी दिखे और दूसरों के सदगुण दिखें। अपनी कमी के प्रति निराश होकर कमजोर न बनो। कमी निकालने के लिए प्रयत्नशील रहो तो उत्थान होगा।

कमी और विशेषता होती है शरीर में, मन में, अंतःकरण में। इनसे अगर सम्बन्ध-विच्छेद करने की कला आ गयी, सम्बन्ध मान लिया है वह सम्बन्ध न माने तो बेड़ा पार हो जाय। 

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