दैनिक भास्कर के एडिटोरियल में चेतन भगत का एक लेख पढ़ा शीर्षक था ” रोमन हिंदी के बारे में क्या ख्याल है” । इस लेख में चेतन ने अपनी संभ्रात सोच को थोपने की कोशिश की है । एक मित्र मे Goodreads में ये कहकर कमेंंट किया कि चेतन भगत की वजह से उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया का एडिटोरियल पढ़ना छोड़ दिया । अब भास्कर की बारी है ? 13 more words