Tags » Devotional Song

मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन - Mukhda Dekh Le Prani

फिल्मः दो बहन (1959)
गायक/गायिकाः प्रदीप
संगीतकारः वसंत देसाई
गीतकारः प्रदीप
कलाकारः राजेंद्र कुमार, श्यामा

मुखड़ा देख ले, देख ले
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में हो
देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में

कभी तो पल भर सोच ले प्राणी, क्या है तेरी करम कहानी -२
पता लगा ले
पता लगा ले पड़े हैं कितने दाग़ तेरे दामन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में

ख़ुद को धोखा दे मत बन्दे, अच्छे न होते कपट के धन्धे -२
सदा न चलता
सदा न चलता किसी का नाटक दुनिया के आँगन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में हो
देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी

Solo Song

पर्वरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा - Parvardigaar-e-Alam Tera Hi hai Sahara

फ़िल्म – हातिमताई (1957)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार – एस. एन. त्रिपाठी
गीतकार – अख्तर रोमानी
अदाकार – जयराज

पर्वरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा 8 more words

Solo Song

ज़रा सामने तो आओ छलिये - Jara Saamne To Aao Chhaliye

फ़िल्म – जनम-जनम के फेरे (सती अन्नपूर्णा) (1957)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार – एस. एन. त्रिपाठी
गीतकार – भरत व्यास
अदाकार – महिपाल, निरुपा रॉय

ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

हम तुम्हें चाहे तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी नहीं हो सकता
पिता अपने बालक से बिछुड़ से
सुख से कभी नहीं सो सकता
हमें डरने की जग में क्या बात है
जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधर लगे
प्यार का है ये क़रार जिया अब
इधर सजे और उधर सजे
तेरी प्रीत पे बड़ा हमें नाज़ है
मेरे सर का तू ही सरताज है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

Duet/Group Song

तू है या नहीं भगवान - Tu Hai Ya Nahin Bhagwan

फ़िल्म – जनम-जनम के फेरे (सती अन्नपूर्णा) (1957)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, लता मंगेशकर
संगीतकार – एस. एन. त्रिपाठी
गीतकार – भरत व्यास
अदाकार – महिपाल, निरूपा रॉय

कभी होता भरोसा कभी होता भरम
पड़ा उलझन में है इनसान
तू है या नहीं भगवान – 2

मत उलझन में पड़ इनसान – 2
तेरे सोचे बिना जब होता है सब तो समझ ले कहीं है भगवान

तू है या नहीं भगवान
वो है अगर तो क्यों ना दिखाई दे कैसी ये उल्टी रीत है
झूठा है वो उसके झूठे ही भय से झूठा जगत भयभीत है

घन-घन गरजती हुई ये घटाएँ किसका सुनाती गीत हैं
लहराते सागर की लहरों में गूँजे किसका अमर संगीत है
जो दाता है सबका महान
दिया जिसने जनम दिया जिसने ये तन क्यों न उसको सका तू पहचान
मत उलझन में पड़ …

क्यों बालक की ममता रोती है क्यों अनहोनी जग में होती है
मंदिर में दीप जलाते हैं जो उनके घर की बुझती ज्योति है क्यों
अनहोनी जग में होती है क्यों

जीवन-मरण हानि और फ़ायदा कर्मों का फल है उसका भी क़ायदा
इनसान की कुछ भी चलती नहीं करनी अपनी कभी टलती नहीं
भक्ति के भाव से उसको तू जान ले श्रद्धा की आँखों से उसको तू पहचान ले
होता नहीं क्या अच.म्भा बड़ा आकाश किसके सहारे खड़ा
फूलों में रंग झरनों में तरंग धरती में उमंग जो उठाता
वो कौन क्या तुम
बादल में बिजली पहाड़ों में फूल जो खिलाता
वो कौन क्या तुम
वो है सर्वशक्तिमान कण-कण में बसे पर न दिखाई दे
उसकी शक्ति को तू पहचान
मत उलझन में पड़ …

Duet/Group Song

बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया - Vrindavan Ka Kishan Kanhaiya

फ़िल्म – मिस मेरी (1957)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार – हेमंत कुमार
गीतकार – राजेंद्र कृष्ण
अदाकार – किशोर कुमार, जेमिनी गणेशन, मीना कुमारी

बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया
सब की आँखों का तारा
मन ही मन क्यों जले राधिका
मोहन तो है सब का प्यारा
बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया …

जमना तट पर नन्द का लाला
जब जब रास रचाये रे
तन मन डोले कान्हा ऐसी
बंसी मधुर बजाये रे
सुध-बुध भूली खड़ी गोपियाँ
जाने कैसा जादू डारा
बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया …

रंग सलोना ऐसा जैसे
छाई हो घट सावन की
ऐ री मैं तो हुई दीवानी
मनमोहन मन भावन की
तेरे कारण देख बाँवरे
छोड़ दिया मैं ने जग सारा
बृन्दावन का कृष्ण कन्हैया …

Duet/Group Song

आना है तो आ राह में, कुछ फेर नहीं है - Aana Hai To Aa Raah Men

फ़िल्म – नया दौर (1957)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार – ओ. पी. नय्यर
गीतकार – साहिर लुधियानवी
अदाकार – दिलीप कुमार, अजीत, वैजंतीमाला

आना है तो आ राह में, कुछ फेर नहीं है
भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं है
आना है तो …

जब तुझसे न सुलझें तेरी उलझे हुए धंधे
भगवान के इंसाफ पे सब छोड़ दे बंदे
खुद ही तेरी मुश्किलों को आसान करेगा
जो तू नहीं कर पाया तो भगवान करेगा
आना है तो …

कहने की ज़रूरत नहीं आना ही बहुत है
इस दर पे तेरा शीश झुकाना ही बहुत है
जो कुछ है तेरे दिल में वो सब उसको खबर है
बन्दे तेरे हर हाल पे मालिक को नज़र है
आना है तो …

बिन मांगे भी मिलती हैं यहां मन की मुरादें
दिल साफ हो जिनका वो यहां आ के सज़ा दें
मिलता है जहां न्याय वो दरबार यही है
संसार की सबसे बड़ी सरकार यही है
आना है तो …

Solo Song

भय-भंजना वन्दना सुन हमारी - Bhaye-Bhanjana Vandana Sun Hamari

फ़िल्म – बसंत बहार (1956)
गायक/गायिका – मन्ना डे
संगीतकार – शंकर-जयकिशन
गीतकार – शैलेंद्र
अदाकार – भारत भूषण

भय-भंजना वन्दना सुन हमारी -2
दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी
भय-भंजना

गीतों के फूलों की माला बना कर -2
लाया हूँ दिल आरती में सजा कर
ये साँसों की सरगम
करूँ तेरे अरपन
आ…

(तुझे और क्या दूँ
मैं ठहरा भिखारी) -2
दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी
भय-भंजना वन्दना सुन हमारी

Solo Song