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Reading on Coincidence: Robert Walser

It’s one thing or the other. Robert Walser is either fashionable in Brazil right now or I am an intersection of coincidences. Two friends, who I’m almost certain don’t know each other, have been reading him recently. 748 more words

Books

The World of Literature: Part 1

Literature has the power to transport you to different times, places and worlds. But when was the last time you explored ‘the world of literature’, so to say? 1,653 more words

Books

Abandoning a Good (Great) Book?

I dislike novels of the Dickensian type that insist on neat resolutions, tucking away every story line. Endings are troublesome; they suggest the possibility of a conclusiveness that simply does not exist. 398 more words

Literary Criticism

The Judgement

Cliché is as ubiquitous as the weather in certain cities.  Through a process of continual self-portraiture by the curators of cliché (those lacking in particular faculties of imagination), a repetition amounting to the erosion of originality, they shape for us the inexorable stasis of the lauded, and lamented, locale.  981 more words

Inspiration in the Things We See Everyday

The university where I teach recently finished a new classroom building and I had the good fortune to have my J-term Wound Healing class (two week class that occurs just prior to the start of the semester) in the new building. 94 more words

काफ़्का की दो प्रारंभिक कहानियों के बारे में...

‘डिस्क्रिप्‍शन ऑफ़ अ स्‍ट्रगल’ और ‘वेडिंग प्रिपेयरेशन इन द कंट्री’। 1904 से 1909 के दौरान लिखी गई ये काफ़्का की दो प्रारंभिक कहानियां हैं। युवोचित उत्‍साह से भरी हुईं, हरे-भरे चरागाहों और घास के मैदानों की सजीली भाषा में पेत्रिन की पहाडि़यों का मोहक भूदृश्‍य रचतीं।

‘डिस्क्रिप्‍शन ऑफ़ अ स्‍ट्रगल’ में कथाकार अपने साथी मित्र के कंधों पर सवार होकर यात्रा पर निकल पड़ता है। प्रकृति उसके इशारों पर चलती है। एक जगह पर वो कहता है : ‘पहाड़ों पर सड़कें उठंगी होती हैं। इन पर मैं कैसे चढ़ता? इसलिए मैंने उन्‍हें अपने सामने पसर जाने दिया। घाटी में दूर नीचे तक धंस जाने दिया। चूंकि मुझे पाइन के दरख्‍़त पसंद हैं, इसलिए मेरे सामने पाइन के दरख्‍़तों का जंगल था और चूंकि मुझे तारों को देखना पसंद है, इसलिए आकाश में तारे छितरे हुए थे। लेकिन, धत्‍त तेरे की, मैं इन ख़ूबसूरत नज़ारों को निहारने में इतना खो गया कि आकाश में चांद को टांगना तो भूल ही गया। चांद अब भी पहाड़ी के पीछे छुपा हुआ है और निश्चित ही मेरी इस लेटलतीफ़ी की वजह से वह गुस्‍सा हो रहा होगा।’

नौजवान काफ़्का ने मॅक्‍स ब्रॉड से कहा था : “मुझे ये कहानियां बेहद पसंद हैं, क्‍योंकि इनमें घर से बाहर की दुनिया है।” काफ़्का उल्‍लास के साथ, लगभग ठहाके लगाते हुए, ब्रॉड को ये कहानियां सुनाया करता था। ब्रॉड ने कहानियां सुनने के बाद एक सदाशय रिव्‍यू में लिखा : जर्मन साहित्‍य को उसका नया जीनियस मिल गया है, गेटे और क्‍लीश्‍ट के बाद।

लेकिन ‘वेडिंग प्रिपेयरेशन इन द कंट्री’ के नायक एदुआर्द राबान को एक रोज़ जाने क्‍या ख्‍़याल आता है, उसे लगता है कि जैसे वह एक छोटा-सा भुनगा बन गया है। वह एक यात्रा पर निकला है, लेकिन सफ़र ख़त्‍म होने का नाम नहीं लेता। ‘द कम्‍प्‍लीट स्‍टोरीज़’ की भूमिका में इन कहानियों को महत्‍वहीन बताकर निरस्‍त कर चुके जॉन अपडाइक यह रेखांकित करना नहीं भूलते कि : “अपने गंतव्‍य पर कभी न पहुंच पाने वाली काफ़्काई यात्रा शुरू हो चुकी है। इन बालसुलभ कहानियों में भी उसके इशारे हैं। काफ़्का के दुर्दम्‍य दुर्गों और दंडद्वीपों तक पहुंचने का एक नक्‍़शा।”

विश्‍वास करना कठिन है कि इन कहानियों ने आगे चलकर ‘मेटामोफ़ोर्सीस’ के घोर आत्‍मदैन्‍य और ‘द ट्रायल’, ‘द कासल’ के भीषण आत्‍मद्रोह में परिणत हो जाना था।

[तस्‍वीर : प्राग के काफ़्का मेमोरियल में स्थित यारोस्‍लाव रोन्‍या की यह कलाकृति ‘डिस्क्रिप्‍शन ऑफ़ अ स्‍ट्रगल’ के उसी दृश्‍य से प्रेरित है, जिसमें कथाकार अपने साथी के कंधों पर सवार होकर सैर-सपाटे पर निकल पड़ता है]

Thoughts

Department of Nonsense

Somewhere, Kafka is shrugging indifferently.

Today, a letter arrived. Real O-fficial like. Bearing officious business of officiousness from the guv’ment. Someone officiating on behalf of the Motor Vehicle Division of my fair state. 601 more words

Miscellaneous