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Who are you to judge?

I am a blogger who frequently scrolls through the Freshly Pressed section on my Reader (mostly in hopes I will be featured there one day). I always read the articles about writing and reading because that is what I do, it is who I am. 273 more words

Writing

Sunday Quotespiration...

I’ll share a quote to get your week started on the right note.

“Discouragement and failure are two of the surest stepping stones to success.” ~Dale Carnegie

Alisha Brown

Self Help

Can I Get A Witness?!

It’s ladies night! My girls and I are going out to hear some comedy. Let’s do this!

You’ve got mail…..
“You’re beautiful. I would love to take you out.” Signed, Melvin. 90 more words

Freshly Pressed

इर्द - गिर्द : हम दोनो और नई दुनिया!

“हम जहां मूत रहे है, यहां कभी पेड़ हुआ करते थे. अब यहां ये दीवार है. ये दीवार कितनी बड़ी है. इसके उस तरफ देख पाना कितना मुश्किल. ऐसा मानो आसमानो तक पहुची हुयी है ये.

कुछ लोग कहते है कि दीवार के उस पार एक दुनिया है जो बिल्कुल अलग सी है. खूब हरियाली है वहा. लोग भी खुश है बहुत. कहते है कि ज़रा सा भी दुख नही वहा. उस पार ना कोई बम फोड़ रहा है और ना ही पैसे को लेकर कोई फसाद है. ना रोटी के लिये लड़ाई है, ना ही किसी बिमारी की समस्या. कौन लोग रहते है वहा? पता नही.

मगर सच कहू तो बहुत मन है वहा जाने का. इस दुनिया को छोड़कर उस दुनिया. लेकिन मै? मै तो यहां मुत रहा हू. तुम्हारे साथ. या फिर ऐसा हो सकता है कि मै मुतना बन्द कर के एक पहल करु. एक पहल इस दीवार को तोड़ने की. क्या पता हम दोनो मिलकर इसे तोडे़ तो कोई रास्ता मिल जाये उस दुनिया मे जाने का. क्या कहते हो तुम?”

“यह बताओ कि तुम्हे कैसे पता की इस दीवार के पीछे एक नई दुनिया है? ये दीवार जिसकी तुम बात कर रहे हो एक सरकारी जेल की दीवार है. बरसो से बन्द पड़ी जेल. उस तरफ की दुनिया ना कभी अच्छी थी और ना ही कभी अच्छी होगी. बहुत गम है वहा. डर है वहा और बेबसी. पत्थरो मे निराशा भरी हुई है. अंधेरा है घना वहा और खिड़की नही. अब ज़रा सोच के देखो तुम! अब जाना चाहोगे वहा?”

“तुम लगता है अखबार नही पढ़ते. टी•वी• तो बिल्कुल नही देख रहे आजकल. हर शाम चीख-चीख कर प्रकाश और दीपक यही बताते है कि कोई दीवार है जिसके पीछे एक नई दुनिया है. वो क्या पागल है? दिमाग खराब हो गया है उनका? मुझे नही पता की ये दीवार वही है. मगर क्या पता हो भी तो! लोगो से सुना है तो बता रहा हू.”

“ज़रुरी तो नही की जो लोगो से सुना हो वो अंतीम सत्य हो? और क्या खराबी है इस दुनिया मे? सब कुछ तो है यहा. थोड़ी सास कम है, पानी भी. मगर है तो. कम-स-कम तुम मुत तो ले रहे हो यहा. वहा अगर कोई ऐसी जगह नही हुई तो?  फिर दीवार तोड़ कर इस तरफ आओगे?”

“अरे! इस तरफ क्यों आउंगा? वहा भी कोई न कोई जगह होगी ही मुतने के लिये.”

“हाँ होगी, मान लेते है. मगर तुमको यदी वहा भी मुतना ही है तो इतनी मेहनत क्यो दीवार तोड़ने की? मुत तो तुम यहा भी रहे हो.”

“भाई, बात सिर्फ मुतने की नही है. बात है खुल केे जीने कि. सांस लेने कि. यहां क्या बचा है, तम्ही बताओ? ना पीने को पानी है, ना खाने को भोजन.”

“या फिर यूं कहे कि यहा तुमने छोड़ा क्या है! कुछ छोड़ा होता तो कुछ बचता. और इतना पानी तो है ही कि तुम पी कर मुत ले रहे हो. ये दीवार भी है यहां जो तुम्हारे अन्दर उम्मीदो की ज्वाला भड़काये हुये है कि एक नई, बेहतर दुनिया है उस पार. क्या पता वो नई दुनिया कैसी हो? अगर बुरी निकली तो क्या वहा ऐसी दीवार होगी जो कोई तीसरी नई दुनिया के दरवाजे खोले.”

“मुझे पता है कि तुम्हे ये बाते फैन्टसी से भरी लग रही है और कुछ नही. लेकिन मै तुम्हे यह बात मानने को बिल्कुल नही कह रहा. बस यह कह रहा हू कि सोचो अगर ये नई दुनिया वाली बात सही हुई तो?”

“जो चीज़ सम्भव ही नही उसे सोचकर फायदा क्या?”

“मेरे बाबा कभी गांव से बाहर नही निकले इसलिये उन्हे पता ही नही की दिल्ली जैसा शहर भी है. अगर वह मान ले की दिल्ली है ही नही तो क्या दिल्ली सच मे नही होगी?”

“तुम बहस को गलत दिशा दे रहे हो. ये बात बिल्कुल ही अलग है. बाबा गांव से निकलते तो दिल्ली पहुच जाते. यहां तुम मुझे एक जेल को नई दुनिया मनवाना चाहते हो. यह कहा से सम्भव है.”

“भाई, चलो मानता हू कि उस तरफ जेल ही है. मगर इतने वर्ष हो गये इसे बन्द हुये तो सरकार ने इसका कुछ किया क्यो नही? तुमने कभी टी•वी• पर सुना इस जेल के बारे मे या फिर कहीं पढ़ा हो? ये तो बस चंद लोग है जो बोल रहे है कि यह एक जेल थी़”

“ठीक उसी तरह तुम्हे भी कीन्ही लोगो ने बता दिया की ये एक नई दुनिया है. मै टी•वी• ज्यादा नही देखता. जितना पढ़ा हू उसी के आधार पर ये बोल रहा हू कि ये जेल की दीवार है. ये मान भी ले कि ये जेल नही कोई नदी है तो भी क्या! है तो इस दुनिया की ही नदी. मुझे लगता है कि सबके अपने-अपने सच है. कुछ झुट, सच है. कुछ सच, झुट. ये सच ज़रुरी है जि़न्दा रहने के लिये.”

“समझ नही आता की क्या ज्यादा मुश्किल है? उस नई दुनिया मे जाना या तुम्हारी बातो को समझना!”

“सरल चीज़ो को समझ पाना ही मुश्किल हो गया है. बस बात इतनी सी है. और हा, तुम्हारा और मेरा विचार का अलग होना ज़रुरी भी है. हम दोनो एक दुसरे से सहमत नही मगर एक दुसरे को सुन तो रहे ही है.”

“हटाओ भाई! सिगरट पीने दो.”

“ये समझना तो कत्तई मुश्किल नही की ये सिगरट तुम्हारी जान ले सकती है.”

“मरना तो एक दिन है ही. तुम भी मरोगे. शायद मुझसे एक-दो साल ज्यादा. इसी दुनिया मे रह गये तो उतना भी नही़. हाहाहाहाहाहा!”

“एक काम करो, तुम जाकर वो दीवार ही तोड़ो. इस धुंये को निगलने से तो अच्छा है की हम उस झुट को निगल जाए. चलो उठो! दीवार तोड़ते है.”

January's Journey- Daily Affirmation

Start your weekend off right with an affirmation. Affirmations work best when repeated throughout the day. Speak success over your life and watch it unfold!

Self Help

The Struggle

I think most of us females can relate to this. Going out with the girls,
you will always find that one guy who will follow you all night and pull this line when you are trying to leave. 37 more words