Tags » Ghazal

अनवर मिर्ज़ापुरी | Anwar Mirzapuri

मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए

मेरे अश्क़ भी हैं इसमें ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूने वाले तेरा हाथ जल न जाए

अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी
तेरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए

मेरी ज़िन्दगी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की ख़ुशी में मेरा दम निकल न जाए

मुझे फूँकने से पहले मेरा दिल निकाल लेना
ये किसी की है अमानत कहीं साथ जल न जाए

Ghazal

शाद अज़ीमाबादी | Shad Azeemabadi

तमन्नाओं में उलझाया गया हूँ
खिलौने दे के बहलाया गया हूँ

हूँ इस कूचे में हर ज़र्रे से आगाह
इधर से मुद्दतों आया गया हूँ

दिल ऐ मुज़्तर से पूछ ऐ रौनक़ ऐ बज़्म
मैं खुद आया नहीं लाया गया हूँ

सवेरा है बहुत ऐ शोर ऐ महशर
अभी बेकार उठवाया गया हूँ

लहद में क्यूँ न जाऊँ मुँह छुपाये
भरी महफ़िल से उठवाया गया हूँ

कुजा मैं और कुजा ऐ ‘शाद’ दुनिया
कहाँ से किस जगह लाया गया हूँ

*कुजा – कहाँ

Ashaar

Ghazal: TheFall

We open our arms and welcome the dark that drowns our cries as we fall.

Throw back our heads and submit our souls: watch when the light dies, as we fall. 209 more words

Poem

I WAS IN LOVE

With and because of you i was in love
Untold moments but true i was in love
My Love Gone without My Propose
But i understood “I DO” i was in love… 53 more words

Love

Kitni raahat hai dil toot jaane ke baad

This article is written by nahm, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. 784 more words

Rafi Songs

Kyon Nahi Karte

कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,

तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?

वही होंठों पर तो आएगी, जो रहती है तेरे दिल में,

ग़ज़ल वो तन्हा रातों में, सुनाया क्यों नहीं करते ?

कभी नाशाद रहते हो और, कभी नाराज़ रहते हो,

चेहरे की लिखावट को, नुमाया क्यों नहीं करते ?

दिल के दरवाजों को मैंने, अब खुला ही रक्खा है,

तुम यह घर बसाने का, इरादा क्यों नहीं करते ?

जो लिखा था तेरे मन में, वही पढ़ कर सुनाया है,

दिल का मौसम और, सुहाना क्यों नहीं करते ?

कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,

तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?

Poetry

Cigarettes and Soothsayers. A Ghazal Poem.

What truths, for me, have you, that not the wind moans
its pleasure – rapt in your defiant deafness?

“Dear love, what shit has God ever given us… 81 more words

Sahm King