छिप छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है नयन सेज पर, सोया हुई आँख का पानी और टूटना है उसका ज्यों, जागे कच्ची नींद जवानी। गीली उमर… more →
hindi everythingalina_pro wrote 11 months ago: Cand n-ai- sa dai! Cand ai – sa oferi! Cand primesti- sa dai mai departe! Cand pierzi- inseamn … more →
ssjha wrote 3 years ago: छिप छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। स … more →
ssjha wrote 4 years ago: स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे … more →