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Reason behind Shri Anoop Singh Joining Politics:

Being a Sportsman very early days he opened first Gym about 20 years back.
In those days when students, friends and their families need help for different kinds of the works in different departments many times they ask me for help. 186 more words

‘Raheja Aranya’ - The Green City Plots at Sohna

Land is real estate’s most valuable resource because the planet provides a fixed supply. You can’t move it and you can’t make more of it. It is a unique and precious asset.  456 more words

Raheja Developers

Writing seminar at Salwan Public School, Gurgaon

Had a wonderful Friday last week. I was fortunate to be invited to the prestigious Salwan Public School in Gurgaon for a writing seminar. The idea was to instil the importance of reading and writing among the students. 120 more words

SodaBottleOpenerWala, Cyber Hub, Gurgaon

If you guys know about Cyber Hub, you will be happy (or jealous :P ) to know that I work right next to Cyber Hub (like millions of other people, so don’t be jealous :) ). 672 more words

Food

Olive Bistro – Cyber Hub, DLF Cyber City, Gurgaon

For those of you who don’t know, Cyber Hub is yesterday’s big thing in Gurgaon for foodies of all types and ages. There are pubs, cafes, bistros, speciality restaurants plus heaps of outdoor space for kids to run amok. 502 more words

Food

खतरे की घंटी: दिन प्रतिदिन घटते पानी का स्तर

हरियाणा में एक-एक कर जिस तरह समस्याओं के पहाड़ खड़े होते जा रहे हैं यह चिंता का विषय है।  इन सब के बीच जो हमारे लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है वो है हरियाणा में लगातार घटते पानी का स्तर। अगर बात करें कुछ एक शहरों की जहाँ अभी से यह समस्या लोगो को परेशान कर रही है तो गुडगाँव का नाम सबसे पहले आता है। इस क्षेत्र की लगातार बढ़ रही आबादी और विदेशी कंपनियों का जमावड़ा शायद इस प्रान्त के सीने पर घाव करते जा रहे हैं। बावजूद इन गंभीर परिस्थियों के, नगर निगम और सरकारी विभागों के कानो में इस खतरे की गूंज अभी असर करती नहीं दिख रही है। गुडगाँव के अलावा मानेसर, धारूहेड़ा, रोहतक और अन्य कई क्षेत्रों में लोग इस मुस्किल के साथ जी रहे हैं।

हाल में ही टाइम्स ऑफ़ इण्डिया अख़बार में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। रिपोर्ट के अनुसार जिस रफ़्तार से गुडगाँव और उस से जुडो इलाको में पानी का स्तर घट रहा है यह साफ़ संकेत है इन शहरों पर आ रही मुसीबत की आंधी का। जानकारों की माने तो इन शहरों के पास अब सिर्फ पांच साल का वक़्त है, उसके बाद ग्राउंड वाटर ना के बराबर होगा। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कुछ ऐसी तस्वीर नज़र आती है- राज्य के लग भग सभी ज़िलों में औसत सात से आठ फ़ीट की गिरावट आई है वही कुछ इलाको में चौकाने वाली स्थिति नज़र आने लगी हैं। महेंद्रगढ़ में ग्राउंड वाटर लेवल तक़रीबन 19 फ़ीट गिरा है। सोचने वाली बात है कि जब राज्य में इस तरह की समस्या गहरा रही थी तब सरकार के कान खड़े क्यों नहीं हुए?

वक़्त रहते अगर इससे निपटने के तरीके नहीं निकाले गए तो सोचिए कैसी तस्वीर होगी राज्य की। इन सब की सीधी मार झेलनी होगी किसानो को, और अगर हरियाणा जैसे हरित प्रदेश में किसानो को दुविधा से नहीं निकला गया तो राज्य की आर्थिक हालत चरमरा जाएगी। कृषि क्षेत्र के अलावा आम जन जीवन भी अस्त- व्यस्त होती दिखेगी अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए। समस्याएं गिनना बहुत आसान काम है पर जब बात उससे निजात दिलाने की हो तो सब पीछे हट जाते हैं और हमारी मौजूदा सरकार ने भी यही किया, पर अब यह उम्मीद लगाई जा सकती है कि आने वाले वक़्त में कुछ बहुत बड़े बदलाव की ओर यह राज्य अग्रसर होगी।