<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- generator="wordpress.com" -->
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>hasya-kavita-kavita &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://en.wordpress.com/tag/hasya-kavita-kavita/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "hasya-kavita-kavita"</description>
	<pubDate>Sat, 02 Jan 2010 14:55:48 +0000</pubDate>

	<generator>http://en.wordpress.com/tags/</generator>
	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[The back bencherz  ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/2008/12/30/the-back-bencherz/</link>
<pubDate>Tue, 30 Dec 2008 07:09:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/2008/12/30/the-back-bencherz/</guid>
<description><![CDATA[ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><p>ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  </p>
<p>देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के<br />
ज्यादा जल्दी कम pressure तो निपटेंगे फिर आके<br />
एक हाथ में कॉपी दुसरे में break-fast दबा के<br />
college गए जैसे-तैसे तो late थे घंटे आधे<br />
क्यूंकि<br />
we are the back bencherz<br />
we are the back bencherz<br />
हमको नहीं है फिकर<br />
we are the back bencherz  </p>
<p>college देर से जाना<br />
Teacher से नजर चुराना<br />
आगे सीटें कितनी खाली<br />
फिर भी सबसे पीछे जाना </p>
<p>भरी class में भी आराम से हैं सो जाते<br />
boring lecture में cell पे करते interesting बातें<br />
exams pass करने के method सबको हैं बतलाते<br />
बस एक रात में पढ़कर नंबर सबसे ज्यादा लाते  </p>
<p>क्यूंकि<br />
we are the back bencherz<br />
we are the back bencherz<br />
हमको नहीं है फिकर<br />
we are the back bencherz  </p>
<p>खिड़की से बहार झांक यार<br />
जरा उसको miss call मार यार<br />
लड़कियों को जम के ताड़ यार<br />
दिख जाये कोई मॉल यार </p>
<p>canteen के महफ़िल को हम ही रंगीन बनाते<br />
कमेन्ट मारने से हम यारों कभी नहीं कतराते<br />
girls, pair या faculty हो सबकी वाट लगाते<br />
तभी बात करने में हमसे बड़े-बड़े घबराते </p>
<p>क्यूंकि<br />
we are the back bencherz<br />
we are the back bencherz<br />
हमको नहीं है फिकर<br />
we are the back bencherz  </p>
<p>&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. Shubhashish</p>
</div>]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/2008/05/12/main-imran-hashmi-banna-chahta-hoon/</link>
<pubDate>Mon, 12 May 2008 06:25:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/2008/05/12/main-imran-hashmi-banna-chahta-hoon/</guid>
<description><![CDATA[(अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/image003.gif"><img class="alignleft size-medium wp-image-160" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/image003.gif?w=128" alt="" width="128" height="128" /></a> (अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मेरे दोस्त कुमार वरुण, जो की इस कविता के प्रेरणा भी थे (क्युकी वो कभी कभी बोलता की यार मैं इमरान हाश्मी बनना चाहता हूँ <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_razz.gif' alt=':P' class='wp-smiley' />  ) ने इसे हिंदी पैड पे लिख के jpeg फॉर्मेट में मेल में attach किया! आज मैं इसे unicode में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ )</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong> मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</strong> </p>
<p>पांचवी कक्षा की एक क्लास मे मास्टर ने बच्चों से पूछा<br />
बताओ क्या बनोगे, कैसे करोंगे अपने माँ-बाप का नाम ऊँचा<br />
किसी ने IAS. किसी ने PCS. किसी ने कहा अच्छा आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
तभी पीछे की सीट से उठकर एक बच्चे ने कहा<br />
Sir! मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</p>
<p>ऐसे जवाब की ख्वाब मे भी नही की थी कभी कल्पना<br />
पर Teacher को लगा शायद हो ये लडके का बचपना<br />
समझाया की बेटा गलती की है तुने Career को चुनने मे<br />
ये तो बता क्या प्रॉब्लम है तुझे और कुछ बनने मे ???</p>
<p>लड़का बोला Sir! जॉब मे अभी कहाँ इतना पैसा है<br />
और Business करना मुझे लगता बेवकूफों जैसा है<br />
नेता फस जाते हैं Akshar स्टिंग ऑपरेशन के जंजाल मे<br />
खेल मे Zahar भर दिया मैच फिक्सिंग के बवाल ने<br />
पर फ़िल्म इंडस्ट्री मे प्रोफिट की लाइन हमेशा ऊपर चढ़ती है<br />
बढ़िया काम से Price-Value तो बुरे से Popularity बढ़ती है<br />
और इस बात को तो ख़ुद कई बड़े फ़िल्म समीक्षक माने है<br />
MMS Clips से भी ज्यादा बिकते इमरान के फिल्मो के गाने है</p>
<p>मै भी ऐसे गाने कर अपनी लाइफ बदलना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>हुंह!!!! आज कल के लडके जाने पढ़ते हैं किस किताब से<br />
Teacher का भी सर चक्र गया बच्चे के इस जवाब से<br />
Teacher ने फ़िर भी पूछा उसमे ऐसी क्या बात समाई है<br />
ये तो बता अभिषेक बच्चन बनने मे क्या बुराई है ???</p>
<p>सिर्फ़ दो फिल्मो से इतना नाम नही कमाया अभिषेक के बाप ने<br />
Murder किया लड़किया फ़िर भी कहती .Aashiq Banaya Aap Ne&#8230;<br />
मल्लिका,तनुश्री, उदिता निपटी पिछली फिल्मों की साइन मे<br />
सुनाने मे आया है की अब सेलिना हृषिता भी है लाइन मे</p>
<p>मै भी ऐसे टेस्टी CHOCOLATE का स्वाद चखाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>अब मास्टर का गुस्सा पहुच गया सातवे आसमान पे<br />
बोले.. सिवाय लड़किया घुमाने के क्या किया इमरान ने ??<br />
Sir! लड़कियों को पीछे घुमाना कोई आसान काम नही<br />
वरना बड़े Powerful लोगो का होता ये अंजाम नहीं</p>
<p>क्या नही जानते आप America के पूर्व राष्ट्रपति को ??<br />
कैसे प्राप्त हुए मोनिका के चक्कर मे .वीरगति को<br />
बदल गया कप्तान देश का सौरभ-नग्मा के टक्कर मे<br />
Cricket खेलना भूल गया वो .नए खेल के चक्कर मे<br />
मेरी इतनी बातों का मतलब बिलकुल सीधा-साफ है<br />
काबिलियेत मे भी इमरान हाशमी. बिल क्लिंटन का बाप है</p>
<p>मैं भी एक Demanded और काबिल आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; Shubhashish ( 2006)</p>
<p>In printable format<br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg?w=74&#038;h=96" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg?w=74&#038;h=96" alt="" width="74" height="96" /></a> </p>
</div>]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[फोर्थ इयर में आ के]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/2008/04/23/4th-yr-me-aake/</link>
<pubDate>Wed, 23 Apr 2008 06:26:39 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/2008/04/23/4th-yr-me-aake/</guid>
<description><![CDATA[फोर्थ इयर में आ के जिदगी हो गई जंजाल है, मेरे बिन गर्ल-फ्रेंड के यारों का, हो गया बुरा हाल है, आपने ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><p>फोर्थ इयर में आ के जिदगी हो गई जंजाल है,<br />
मेरे बिन गर्ल-फ्रेंड के यारों का, हो गया बुरा हाल है,<br />
आपने साथ वालियों को देख देख के ऐसे बोर हुए<br />
अब तो इनको हर faculty लगती केवल माल है.</p>
<p>कुछ की तो बिमारी अब हो गयी परमानेंट है,  <br />
शादी-शुदा से ही इनका जुड़ जाता सेंटीमेंट है,<br />
तुम्हे लड़कियां नहीं मिलती क्या ? पूछने पे जवाब देते हैं,   <br />
&#8220;क्या करें यार अपना टेस्ट ही डीफेरेंट है&#8221; &#124;<br />
 &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. Shubhashish(2006)</p>
<p>अगर मेरे किसी पुराने दोस्त को बुरा लगा हो की उसके sentiments का मैंने मजाक उडाया है तो वो अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए स्वतंत्र है <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
अपनी भड़ास निकलने के लिए कम से कम एक बार फोन तो करे <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' />   &#8230;&#8230;&#8230;</p>
</div>]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जूली - A real story ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/2008/04/12/juli-the-real-story/</link>
<pubDate>Sat, 12 Apr 2008 13:37:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/2008/04/12/juli-the-real-story/</guid>
<description><![CDATA[जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है, इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है, यूँ तो क्ला]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><p>जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है,<br />
इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है,</p>
<p>यूँ तो क्लास में टीचर एंट्री देते नहीं इसे,<br />
पर २-३ क्लास करके जूली ने मचाया काफी बवाल है,</p>
<p>कहाँ साल भर प्रिप्रेशन करने के बाद लड़के एडमिशन लेने आते हैं,<br />
और फिर रहने के लिए हॉस्टल का एक ट्रीपल सीटर रूम पाते हैं,</p>
<p>पर जूली तो बचपन से ही हॉस्टल में अपनी मनमानी चलायी है,<br />
किसी ट्रिपल सीटर में दिन तो सिंगल सीटर में रातें बिताई है,</p>
<p>वार्डेन महीनों में कभी चेक करे ये बड़ी बात हैं,<br />
पर जूली कमरों में झांकती हर रात हैं,</p>
<p>दरवाजा बंद है तो अगले पे जाती है,<br />
गर खुला मिल जाये तो बिस्तर पे आराम फरमाती है,</p>
<p>इतना ही नहीं जूली ने और भी कई गुल खिलाये हैं,<br />
चंगु-मंगू नाम के दो बच्चे अपने गुलशन में उगाये हैं,</p>
<p>पर आजकल जूली घूमती तन्हा अकेली है,<br />
उसके बच्चो का पिता कौन है ये अबुझ पहेली है,</p>
<p>हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी नशे में मस्त रहते हैं,<br />
इनकी बक-बक से पूरे हॉस्टलवासी त्रस्त रहते हैं,</p>
<p>उस रात जूली उनके कमरे में सोई थी,<br />
अपने टाइगर के खयालो में जाने कहाँ खोई थी,</p>
<p>इतने में गुप्ता जी नशे में अन्दर आये,<br />
और जूली की बाहों में बिस्तर पर रात बिताये,</p>
<p>सुबह जब आँखे खुली तो गलती का एहसास था,<br />
तन्हाई के सिवा अब कुछ नहीं जूली के पास था,</p>
<p>तब से वो पतला कुत्ता टाइगर भी साथ नहीं रहता है,<br />
वो भी ज़माने की तरह जूली को बेवफा कहता है,</p>
<p>&#8220;अरे माफ़ कीजीयेगा&#8230;. जूली का परिचय देना तो भूल गया&#8221;</p>
<p> यूँ तो AKGEC के ब्वायेस हॉस्टल में इसे किसी परिचय की जरुरत नहीं,<br />
पर जूली नाम की ये आवारा कुतिया जरा भी खूबसूरत नहीं ,</p>
<p>पर जूली का हॉस्टल से प्यार देखते हे बनता है,<br />
साल में कई मौको पे इसका का बैर्थ-डे मानता है,</p>
<p>दर-असल जब भी जूली किसी का बर्थ-डे के खा जाती है ,<br />
तो बर्थडे बॉय की बर्थडे बमप्स में लातें भी पाती है,</p>
<p>अरे एक बार तो मेरे आँखों के सामने हे पूरा हंगामा खडा था,<br />
गलती से जूली छत पे बंद क्या हुई सारा होस्टल ताले पे जुटा पड़ा था,</p>
<p>थोडी देर में ताला टुटा तो लोगो की जान में जान आई ,<br />
ये बात और है की थोडी हे देर में जूली फिर कई लातें खाई ,</p>
<p>जूली नाक में दम कर देती है अच्छे-अच्छो की,<br />
कहानी पे यकीं कर लो कसम तुम्हे जुली के बच्चो की ,</p>
<p>(प्रस्तुत कविता सत्य घटनाओ पे आधारित है, पाठकों से विनम्र निवेदन है की वो इससे खिलाफ कोई भी शिकायत एनीमल राईट मूवमेंट वालों से ना करें <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_razz.gif' alt=':P' class='wp-smiley' />  )<br />
  &#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. Shubhashish (2004-05)</p>
<p>In printable format</p>
<p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/juli1.jpg"><img src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/juli1.jpg?w=73" alt="" width="73" height="96" class="alignleft size-thumbnail wp-image-177" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/juli2.jpg"><img src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/juli2.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" class="alignleft size-thumbnail wp-image-178" /></a></p>
</div>]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
