मेरे हर लब्ज़ शब्दों में बया हो , ये जरुरी तो नही , दिल के हर जज्बात आँखों में समां हो , ये जरुरी तो नही , मुमंकिन है हर दर्द को दिल में छुपाना भी हर रिसते ‘अश्क’ से भीगे पलके , ये जरुरी तो नही , जिसक… more →
Hindi KaviDr.Abhay Kumar wrote 3 months ago: Dur desh ki ek Titli. . . . Haan dur des ki ek Titli. . . . Udna hai bas udna usko. . . Manzil tak h … more →
vkman wrote 3 months ago: बचपन में बताया था किसी ने कि तारे उतने पास नहीं होते जितने दिखते हैं। नहीं समझी थी मैं तब, अब समझती … more →
vkman wrote 3 months ago: सब आ जाते रास्ते पर मैं ही तो बेराह नहीं? सबके दिन फिरते रब तक जाती मेरी आह नहीं। छिन जाता है ये भी, … more →
vkman wrote 3 months ago: कौन सा है रास्ता जो यों मुझे बुला रहा? धुंधला ये स्वप्न मुझे कौन है दिखा रहा? बदली कई बार मग़र राह अ … more →
vkman wrote 3 months ago: नहीं, तुम दूर ही अच्छे । दूर जो हो तुम आँखों से तो मन के एक निष्कलुष संसार में तुम्हें बसा रखा है म … more →
vkman wrote 3 months ago: कुछ पीछे छोड़ तो आई हूँ । कुछ पिछड़े हुए क़ायदे थे, कुछ बेवकूफ़ी भरे वादे थे । उन्हें छोड़ा ठीक, पर एक … more →
vkman wrote 3 months ago: दुनिया को हमसे बेरुख़ी की शिक़ायत है । किस्से नहीं सुनाते हम, हाल-ए-दिल नहीं बताते हम, ज़ाहिर करते न … more →
vkman wrote 3 months ago: अब वो मेरा जहाँ नहीं, ज़मीं नहीं आसमाँ नहीं। कुछ बदला हो ना बदला हो मेरे लिए वो शमाँ नहीं। हाँ बीता स … more →
tikulicious wrote 5 months ago: वो सराब था के हकीकत मालूम नहीं मेरा जुनून था या के कोई ख्वाब मालूम नहीं सेहरा की तपती रेत पर थे उसके … more →
tikulicious wrote 5 months ago: आओ फिर कुछ प्यार की बात करें वो प्यार जो कभी मेरे और तुम्हारे बीच था उन् बारिश से भीगी हुई शामों का … more →
tikulicious wrote 6 months ago: भोर कुछ आधे अधूरे ख्वाब अपनी अलसाई आँखों मी समेटे सूरज की पहली किरणों की चादर ओढे हुए बिस्तर की सिलव … more →
praveenparashar wrote 6 months ago: मन के किसी कोने मैं ,पलकों पे रहती है , पर मुश्किल से होटों पे आती है .आकांक्षा कभी झूटी सी कभी अधूर … more →
rohankanungo wrote 6 months ago: कौन है जो आगे आये? कौन अपना सर कटाए? ऐसा कोई वीर है यहाँ कहाँ? वीर की वसुंधरा, तू क्यों खडा डरा-डरा? … more →
ashishbatra wrote 7 months ago: Lo aa gaye fir Chunaav Neta Laaye Vaade Hazar Jhoote vaade jhootha vyavhar Shuru ho gaya inka pracha … more →
vivekt wrote 7 months ago: बड़ी आधी अधूरी ख्वाहिशों में… बड़े बेचैन से इन रास्तों में… बहुत तनहा सफ़र की बोरियत में … more →
vivekt wrote 7 months ago: आज कुछ अजीब सा हूँ मैं…बोझिल सा थका हुआ शायद कुछ खो गया है मेरा… या शायद जिंदगी नाराज है … more →
Mayur wrote 9 months ago: A Hindi poem for you written by yours truly me. England, America, Japan ghum aao, India sa koi bejod … more →
Dr.Abhay Kumar wrote 9 months ago: सामने था एक दर्पण , था कभी इसपर सवरता , पाया फिर वो, एक मुखडा , वह उठा फिर तेज़ से, दो गुणी न , सौ ग … more →
Manish wrote 10 months ago: स्वप्न संसार को छुने की इक्श्हाये लेकर राहो में बिखरता रहा में, पंहुचा नही कही भी क्यूँ जबकि सारी उम … more →