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Power of Dreams

How can one say,

dreams don’t have wings

if they start flying

the sky will fall short

My Poetry

"Pitaji"

“Pitaji”
A small poem describing the beautiful feelings children have for their father.
By – Kamla Bhasin

“पिताजी”
बच्चों की अपने पापा के प्रति सुन्दर भावनाएं बताती एक प्यारी सी कविता ।
– लेखिका: कमला भसीन

CIIE Ideapad

Khushi aur phir be khush

Khush Rahne Ka Matlab Yah Nahi Ki
Sab Kuch Thik Hai, Iska Matlab Yah Hai
Ki Aapne Apne Dukho Se Upar Uth Kar
Jeena Sikh Liya Hai..

Quotes

Father felling for family

…………. पिता की भावनायें………………….

माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ,
ज़ाहिर नही किया, न सोचो पापा के दिल मेँ प्यार न हो!

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो,
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे,
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से न नीर बहे!
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे!

भूली नही मुझे हैँ अब तक, तुतलाती मीठी बोली,
पल-पल बढते हर पल मे, जो यादोँ की मिश्री घोली,
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली!

माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना,
और जो डाँटू ज़रा कभी, तो भाव नयन मे थम जाना,
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना!

कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल न हो पाना,
ट्रेन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना,
दूर गये तुम अब, तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस, कब होगा अब घर आना!

अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा,
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ, तुमको ये बतलाऊंगा,
आकर फिर तुम चले गये, बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा!

Quotes

ना जाने

 

सांस लेते हुए भी अब घबराते है हम,
ना जाने कौन सी हवा तुम्हारी खुशबु ले आये…

सुनते थे बेसुध होकर जो तराने, अब सुनते हुए डरते है हम,
ना जाने कौन सी धुन तुम्हारे पायलों की छनक ले आये…

जिन किताबो को गले से लगाये रखते थे कभी, उन्हें छुपा दिया है कहीं,
ना जाने कौन सा पन्ना तुम्हारी कहानी ले आये…

लिखा करते थे बेपरवाह हो कर जिन डायरियों में ज़िन्दगी का हिसाब,
कलम लगा कर अलमारी में दबा दिया है कहीं,
ना जाने कौन सी तारीख पर तुम्हारा दिया हुआ सुखा फूल मिल जाए…

रातों को छत पर जाकर आसमान देखते डरते है हम,
ना जाने किस तारे में तुम्हारे आँखों की चमक दिख जाये…

सब कर के देख लिया, हर मुमकिन कोशिश कर ली,
पर जब भी आँखे बंद करते है हम,
ना जाने कैसे तुम्हारी यादों का पिटारा खुल जाता है…

और फिर बस यही लगता है की कभी ना खुले ये आँखे,
हम जीते रहे यूँ ही तुम्हारी यादों के साथ…

जीने मरने का फर्क अब समझ नहीं आता,
आँखे खोल दिन भर मरते है हम,
और रात भर उन्हें बंद कर ज़िन्दगी जीते है हम…

फिर भी यही सोच कर साँसे रोक नहीं पाते,
ना जाने कौन सा लम्हा तुम्हे वापस मेरे आगोश में ले आये.

Hindi Poems

Shayari

प्यार

” लगता था तुझे पाने के लिए
दुनिया से लड़ सकते हैं
ह्में क्या पता था
इक दिन तू ही हमारी दुनिया बन जाएगा “

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सपना
” उस आग मैं जलते हैं रोज़
जिसे किसी दिन लोह बना
मंन मैं जलाया था “

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मुस्कान
” तुझसे बात कर
कभी मस्कया करते थे
ह्में क्या पता था
वही मुस्कान कभी दर्द देगी “

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ਚੰਨ
” ਸਾਡਾ ਚੰਨ ਸਾਡੇ ਨਾਲ ਅਖ ਮਚੋਲਿ ਖੇਡਦਾ
ਕਦੇ ਇਸ ਕਦੇ ਉਸ ਬੱਦਲ ਪਿਛੇ ਛੁਪ
ਸਾਡੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਨੂ ਟਟੋਲਦਾ “

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चुप
” इस क़दर आज चुप हैं
कि सन्नाटा भी शोर सा
कानों मैं गूँजता है “

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ਪਾਣੀ
” ਪਾਣੀ ਦਾ ਕਿ ਕਿਹਨਾ
ਰੁਕਦਾ ਨਹੀ ਏ ਕਿਸੀ ਲਈ
ਪਰ ਰੱਲ ਜਾਏ ਜੇ ਹਵਾ ਨਾਲ
ਦਿਲ ਦੀ ਰੀਝ ਪੂਰੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ
ਦੋਨਾ ਨੂ ਇਕ ਵੇਖ
ਰੂਹ ਖਿਲ ਜਾਂਦੀ “

 

Love

मकसद

ये पल
ये अहसास
बहते से जा रहे हैं
मन के भीतर
प्यारा सा मकसद
झलक रहा है
दिल की गहराइयों में
आगे बड़ो
बस बढ़ते जाओ
यही कह रहा है
रंग बिरंगे से दृशय
बंद पलकों के दरवाज़े पे
सजे हुए है
चलने को बेताब हैं
इन प्यारी सी राहों पे
उड़ने को हैं तैयार
पंख फैलाये
खुले आसमां में
चंचल हवाओं के संग
अपनी हसरतों को
हकीकत में बदलने
हो गयी है शुरआत
बरसों से संजोय हुए
सपनों की
अब सच्चाई से
मिलने की
भ्रम था
जो अभी तक
वो टूटेगा
क्योँकि यथार्थ से
अब संगम होगा।

Poetry / कविता