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 Kabhi kuch to kabhi kuch aur....

Jindagi ko jitna koi samjhna chahe,
Woh usme hi uthna ulajhta jaye.

Jindagi ko jitna koi jaana chahe,
Woh usme hi uthna anjaan hota jaye. 101 more words

POEMS

Antarnaad...

Teri thaap pe jo main naachu toh
Teri chaap sa Jo main darsun toh
Teri khushi ka thaur thikaan nahi
Par jo main taal banau toh… 72 more words

Life

Pahchan-Hindi Philosophical Love Poem Shayari

पहचान

वक़्त ये धार बनके बह जायेगा,

राइट की तरह ये पल भी फिसल जायेगा,

जीटा रहा है खुद के लिये,

कब अपने आप को जान पायेगा, 124 more words

Hindi Poems

Aunty Aai

Dear Mummas!
Here is a small and simple poem for your little ones who hides somewhere when there are guests at home! Make them learn the poem and when the guests are home just remind them of the poem and a miracle might happen!! 12 more words

CIIE Ideapad

Aaj Dekha Unhe Phir...

Aaj dekha, unhe phir,

Balkani pe, baal sukhate hue.

Resham si lato se,

Pani ki boondein, barsate hue.

Bheeg liya, hamne bhi thoda,

Sapno k badal, banate hue. 218 more words

Hindi Poems

छलावा

दिल की गहराइयों में
आज भी कही
वो लौ रोशन है
बहुत पीछे छोड़ आये
जिन रास्तों को
कदमों के वहां
निशान अभी बाक़ी है
मुड़ मुड़ के देखते रहे
ढूँढते रहे
बसी हुई है अभी भी
आँखो में धुँधली सी तस्वीर
बिसरा न सके
दिल से मिटा न सके
सपनों को झुठला न सके
पल दिन साल
गुज़रते रहे
ज़हन मे दबते गये
प्यारे वो सपने
देखती थी जिन्हें आँखे
जज़्बात सवाल करते रहे
अजब सी बेचैनी
महसूस होती रही
हसरतों को सिर्फ़
हार ही मिली
मंज़िलों को हमारा
होना न था
फिर भी न जाने क्यों
मन बार-बार
उस ओर देखता रहा
गहराइयों में हर पल
वही सपने बुनता रहा
जो सिर्फ़ छलावा थे
हक़ीक़त से कहीं भी
जिनका कोई नाता न था।

Poetry / कविता

मेरे बेटे के जूते

तुम्हारे पैरों की चप्पल देख कर जी रही हूँ मैं,

मेरे घर का श्रृंगार है तुम्हारे जूते, चप्पल,

और तुम्हारी सभी छोटी-छोटी चीजें।

 

उन छोटी चीजों से ही सब कुछ बड़ा है।

Hindi Poems