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मकसद

ये पल
ये अहसास
बहते से जा रहे हैं
मन के भीतर
प्यारा सा मकसद
झलक रहा है
दिल की गहराइयों में
आगे बड़ो
बस बढ़ते जाओ
यही कह रहा है
रंग बिरंगे से दृशय
बंद पलकों के दरवाज़े पे
सजे हुए है
चलने को बेताब हैं
इन प्यारी सी राहों पे
उड़ने को हैं तैयार
पंख फैलाये
खुले आसमां में
चंचल हवाओं के संग
अपनी हसरतों को
हकीकत में बदलने
हो गयी है शुरआत
बरसों से संजोय हुए
सपनों की
अब सच्चाई से
मिलने की
भ्रम था
जो अभी तक
वो टूटेगा
क्योँकि यथार्थ से
अब संगम होगा।

Poetry / कविता

Ishq

Is kadar ap saason mein bas jaoge,

Rooh ban humare rag rag mein utar jaoge,

Khushiyon ka anchal humein uda jaoge,

hum the bekhabar ki humare hi dil ko is kadar chura jaoge. 68 more words

Hindi Poetry

Jazbaat

Yun to rukhsati ki humne ijazat maang li,

Diwangi ki intihaan ki hadd baandh di,

Muskurate labon ki salwaton ko jaane kaise,

Unhone badalte mausam ki ghata jaan li. 62 more words

Hindi Poetry

दुल्हन

सेज पर बैठी एक दुल्हन,
पिया का इंतज़ार कर रही थी,
अब आयेगा पिया यह सोचकर,
मन ही मन मुस्कुरा रही थी,
आँखें झुकी मन में प्यार,
पलके झुकाए कर रही थी पिया का इंतज़ार.
इंतज़ार की घडी ख़तम हुयी,
उमंग के दरवाज़े खुले,
काश यह लम्हा यूँ ही थम जाता,
और सिर्फ तुम होते, और हम होते…..

Hindi Poetry

सब याद आता है

वो मुड़कर हमें देखना,
वो हंसी का एक झोंका,
वो हमें छेड़ देना,
फिर प्यार से मना लेना,
सब याद आता है,
होठों पे मुस्कान दे जाता है.

वो तुम्हारी शैतानियां,
वो प्यारी सी ठिठोलियाँ,
वो हमें गले लगाना,
फिर हंसकर भाग जाना,
सब याद आता है,
होठों पे मुस्कान दे जाता है.

वो हाथ पकड़ना,
मोहब्बत आँखों में भरना,
वो आंसूं छलक जाना,
सब याद आता है,
होठों पे मुस्कान दे जाता है.

वो यादों का पालना,
वो खवाबों का घरोंदा,
वो बिस्तेर की सलवट,
वो नैनों का झरोका,
सब याद आता है,
होठों पे मुस्कान दे जाता है.

Hindi Poetry

Soch Ke Kuch Lavz

Hey, I am here again to scribble something in my blogging world……..so here’s my new post with some of my quotes (sher)…….  

कहते हैं उन्हें हमसे गिला नहीं,

कहते है वो बेवफा नहीं,

वफ़ा गिला क्या चीज़ है हमें क्या पता,

हम तो बस आंसूं पीतें हैं पर ये उन्हें पता नहीं.

 

ख़ामोशी की ये आवाज़ सुनकर तो देखिये,

अन्खाहे लव्जों को बोलकर तो देखिये,

ये प्यार की आवाज़ है,

दस्तक देकर तो देखिये.

आखें जो खुली तो तुम्हें ढूढती हैं,

बंद आँखें भी तुम्हे महसूस करती हैं,

वो पल भी एक अजीब सुरूर दे जाता है,

जब तुम्हारा  प्यार भी आंसूं बनकर चालक जाता है.

 नाराज़गी का वो भी अजीब मंज़र था,

आँखों में तब भी प्यार का समुन्दर था,

पर सूर्य की दो किरण सम्नुदर को सुखा देंगी,

इसका अंदाज़ा हमें कभी भी न था.

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Naari

आज फिर लिखती हूँ,
आज फिर कलम को अपनी दास्ताँ सुनती हूँ,
दुनिया कहती है मैं किसी काम की नहीं,
मैं  तो उनके इशारों की पुतली हूँ वही,
फिर भी इस दुनिया को जन्म देने वाली जननी हूँ मैं,
अपना अंश देकर इस दुनिया में लाने वाली नारी हूँ मैं।

आईने को यह बुत अंजना लगता है,
अपना होकर भी बेगाना दीखता है,
असमंजस में डालने वाले तुम ही तो हो,
मुझे इस मोड पे लाने वाले तुम ही तो हो।

तुम्हे पहचान देने वाली मैं ही तो थी,
तुम्हे चलना सीखने वाली मैं ही तो थी,
आज मेरे कदम जो लडखडाये,
तो उसकी वजह भी तुम ही तो हो,
आज मुझे गिरना सीखने वाले भी तुम ही तो हो,
पर मैं माँ हूँ, तुम्हे सदा अपनाऊंगी,
तेरी हर गलती को, सर माथे लगाउंगी।।

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