कौशल किशोर (Follow @HolyGanga)

गंगा मुक्ति कार्यक्रम के प्रणेता बाबा नागनाथ के अंत की दास्तान अत्यंत दुखद है। वाराणसी में जनमे और पले-बढ़े नागनाथ तिवारी गंगापुत्र निगमानंद की परंपरा के सत्याग्रही संत थे। मणिकर्णिका घाट पर स्थित मठ में उन्होंने 19 जुलाई, 2008 को गंगा मुक्ति के लिए उपवास शुरू किया था। अंत में यह आमरण अनशन साबित हुआ। नागनाथ का संकल्प था, ‘जब तक गंगा बांधों और प्रदूषण के प्रकोप से मुक्त नहीं होगी, तब तक मैं अन्न नहीं ग्रहण करूंगा।’ इस अनशन के दौरान बार-बार उनकी हालत बिगड़ती रही। प्रशासन की मेहरबानी से वे अस्पताल और मठ के बीच झूलते रहे। आखिरकार इस हफ्ते उनकी तपस्या का अंत भी निगमानंद की तरह गहन चिकित्सा कक्ष में हुआ। पिछले तीन सालों में गंगा की अस्मिता के लिए यह दूसरा बलिदान है। 32 more words