Tags » IIT Kanpur

ANTARAGNI- IIT KANPUR

As, its name suggests “the fire within”, IIT Kanpur’s four day annual fest Antaragni had almost all the zest and sizzles to not only lighten up but to blaze the little party going, fun loving corner of every other bluestocking student. 311 more words

Music

जीवन का उद्देश्य

सूरज की पहली किरण, खुली खिड़की से भीतर तक आ जाती है. इससे पहले ही चिड़ियों का उत्सव शुरू हो जाता है और उस कलरव से नींद खुल जाती है. हाँलाकि वह समय सिर्फ हमारे जागने का समय नहीं होता बल्कि खिड़की के उस पार लगे गुड़हल के पेड़ पर कई फूलों के खिलने का समय होता है. उसकी एक पंखुड़ी सूरज के उपर चढ़ते ही खिलनी शुरू हो जाती है, उनमें एक जीवन दिखायी देता है. नाश्ता करके लौटने के पश्चात वहाँ एक फूल मुस्कुरा रहा होता है. फूलों से भरा पेड़, सचमुच बहुत अच्छा लगता है.

कुछ वर्षों पहले पूजा के लिये इन्हें तोड़ने की ड्यूटी निभानी पड़ी थी. लेकिन आज लगता है इन्हें नहीं तोड़ना चाहिये. कुल मिलाकर एक पूरा दिन ही इनका जीवन होता है, इन्हें वहीं लगे रहने देना चाहिये और तोड़ लेने के पश्चात तो इनका जीवन समाप्त हो जाता है. न जाने कितने फूल तोड़कर चढ़ाये जा चुके हैं क्या ईश्वर कभी प्रसन्न हुए हैं!! जो प्रसन्न नहीं होता उसे प्रसन्न करने की जहमत क्यों उठायी जाये इससे अच्छा है कि किसी डाली पर खिले सुर्ख लाल फूलों को देखकर स्वयं ही प्रसन्न हो लिया जाये.

अभी कुछ देर पहले उनके करीब सीढ़ियों पर बैठा आराम कर रहा था और उन्हें देखकर उनके दैनिक जीवन पर कुछ विचार कर रहा था और साथ ही बीते दिनों की याद में गोते लगा रहा था कि किस तरह हर रोज सवेरे उठकर गुड़हल के फूल खोजने चला जाता था और बहुत मुश्किल से एक दो फूल मिलते क्योंकि अन्य लोग भी इस फूल की खोज में ब्रह्ममुहूर्त से ही लगे हुए होते, खासकर नवरात्र के दिनों में.. और आज हमारे सामने इतने सारे फूल खिले हैं लेकिन इन्हें तोड़ने की कोई आवश्यकता ही नहीं. इसी दौरान एक फूल पर नज़रें टिक गयी और हमारी भावनाओं में बदलाव आ गया मानों किसी ने यादों को प्रेम और तार्किकता में मिला दिया हो.

वह फूल यदि एक मनुष्य होता और हमसे पूछता कि हमें क्यों तोड़ते हो तो हमारा ज़वाब होता – ईश्वर के प्रति आस्था कायम रखने के लिये और उनके चरणों में चढ़ाने के लिये… परन्तु यदि वह यह पूछ लेता कि तुम्हारे ईश्वर के चरण कहाँ हैं तो हम क्या ज़वाब देते? यह कि जो तस्वीर हमने अपनी सुविधा के अनुसार लगा रखी है वहाँ या फिर किसी बड़े से आलीशान महल जैसे किसी मन्दिर में पड़ी एक चट्टान जिसे तराश कर एक आकृति दे दी गयी है वहाँ. यदि हमारा ज़वाब यह हो और यह पूछ ले कि तुम्हारे ग्रन्थ और पूर्वज तो कहते आ रहे हैं कि ईश्वर हर जगह होता है, क्या तुम्हें कभी दिखायी दिया है? तो हम क्या ज़वाब देते..!! इसी बीच एक तितली उस फूल पर आकर बैठ जाती है. फूल पहले की तरह ही अपना लाल रंग बिखेर रहा था लेकिन हमारे भीतर बहुत कुछ बदल गया और उस फूल के एक दिवसीय जीवन का उद्देश्य भी समझ आ गया.

अपनी खूबसूरती के साथ साथ वह नन्हें जीवों के जीवन के लिये जीवन रस भी लिये होता है. मन में एक प्रेम की लहर सी उठी और हम अपने जीवन के उद्देश्य को समझने की असफल कोशिश करने लगे. पेड़ पर लगे फूल सचमुच खूबसूरत लगते हैं.

प्रकृति