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A Review - 'Rococo: Travel, Pleasure, Madness'

I can’t describe how enlightening and inspiring this three-part documentary was to me. Simply the way Waldemar Januszczak presents art, without affectation, patronisation or stiffness in attitude, is very appealing to all the viewers I suppose, not only me. 386 more words

Art

पद्म पुराण में मिलते हैं मानव के किसी अन्य ग्रह से आने के संकेत,...!!!

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धरती पर मानव जीवन क्या किसी अन्य ग्रह से आया। इसके कुछ

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क्या मांगें अगर कभी मिल जाए भगवान??? Please do answer in your own words!

ईश्वर से कुछ मांगना हो तो ईश्वर को ही मांग लेना, लेन-देन के इस युग में आध्यात्मिक जगत में भी यह सवाल उठता है कि परमात्मा यदि मिल जाए तो उससे क्या मांगा जाए? 10 more words

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डीएनए और सूक्ष्म शरीर की अवधारणा में समानताएं

वेदान्त का सूक्ष्म शरीर ही है डीएनए। यह सही बात है, डीएन का अध्ययन करने के लिए आपके पास विस्तार से जानकारियां हैं, मगर जब आप सूक्ष्म शरीर की बात करते हैं आप को बहुत ही मिलीजुली जानकारियां मिलती हैं। जैसे कुछ पुराणों में इसे अंगूठे के आकार का बताया गया है। हमें लगता है कि यह भ्रांति बाद में ही आई होगी, और इससे पैदा हुई होगी कि हमारे स्थूल शरीर के अंदर ही हमारे जैसा एक शरीर होता है। तब किसी लेखक ने इसकी सूक्ष्मता का आकलन अपने अंगूठे से किया हो। मगर वेदकालीन साहित्य में हमें परमाणु और अणु आकारों का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि जो कर्म हम करते हैं उन्हें हमारा सूक्ष्म शरीर साथ ढोता है और अगले जन्मों में अच्छे-बुरे कर्मों के नतीजे भोगता है। असल में यह बात भले ही थोड़ी बढ़ा-चढ़ाकर है मगर एक हद तक सही है। अब आप डीएनए को ही लीजिए। इनमें शुगर और फासफेट के बंध वाले प्रोटीन्स की एक लंबी शृंखला होती है, जिन्हें जीन कहा जाता है।

असल में इन्ही जीन्स में छुपी है पुनर्जन्म की अवधारणा। यही जीन हमारी अनुवांशिकी को ढोते हैं। इसे ही डार्विन ने अनुवांशिकता पर आधारित जीव विकास का सिद्धांत बनाया। हमारे पुराणों ने जिसे कथाशैली बनाकर पुनर्जन्म में निपटा दिया, ठीक उसीकी व्याख्या डार्विन ने जैव विकास के रूप में की। जीन सचमुच संस्कार ढोते हैं, इसमें कोई शक नहीं। साइंस साबित कर चुकी है। अब मनुष्य के डीएनए में ३३ हजार से ज्यादा जीन्स की शृंखला है। इनका क्रमिक विकास हुआ। आज साइंस डीएनए जांच से यह बताने में सक्षम है कि कौन किस कुनबे का है।

इसी तरह वेदांत का विवरण बताता है कि सूक्ष्म शरीर हमारे संस्कारों को ढोता है। हमारे कर्मों और जीन में सीधा संबंध है। विकासवाद को ही मानें तो भी। हमारी पूंछ इसीलिए गायब हुई, क्योंकि हमारे दैनिक कर्म में उसका सरोकार नहीं रहा था और वह बाधा बनी थी। इस तरह कई पीढि़यों तक यह संदेश जीन को मिलने के बाद ही पूंछ गायब हुई। इस तरह कहा जा सकता है कि डीएनए और सूक्ष्म शरीर की अवधारणा में काफी समानता है।

वेदान्त का सूक्ष्म शरीर ही है डीएनए…….

वेदान्त दर्शन के मुताबिक तीन तरह के शरीर होते हैं- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। यह माना जाता है कि मृत्यु के समय सूक्ष्म शरीर स्थूल शरीर से निकलकर परलोक में अपने पाप-पुण्य का फल भोगता है। यह भी माना जाता है कि आत्मा इसी शरीर से आवृत्त रहती है। स्थूल शरीर पाँच तत्वों से बना होता है जो कि दिखाई देता है और सूक्ष्म शरीर तीन तत्वों से बना होता है जो दिखाई नहीं देता है। जीवात्मा का सूक्ष्म शरीर तीन तत्वों (1).मन (2).बुद्धि (3).अंहकार से बना होता है।

साइंस बताती है कि डीएनए में ही जीव का सूक्ष्मकोड होता है, जो तय करता है कि एक जीव कैसा होगा। शरीर की हर कोशिका के यह केंद्र में रहता है। अतः कहा जा सकता है कि शरीर इसी से मिलकर बना है। इस सूक्ष्म शरीर (डीएनए) का आकार २.२ नैनो मीटर से २.६ नैनोमीटर तक होता है। नैनो मीटर असल में एक मीटर का अरब वां हिस्सा है। सेंस और एंटीसेंस इसके दो मुख्य गुण हैं, जो इसे जीवन का आधार बनाते हैं। ये आरएनए की कॉपी से उत्पन्न होते हैं। शायद इसीको बुद्धि और अहंकार कहा गया होगा। सेंस ही बुद्धि है और एंटीसेंस यानी प्रतिक्रिया को अहंकार कहा जा सकता है। इसमें जीव के मैं भाव का बोध होता है। डीएनए आसानी से नष्ट भी नहीं होता। शायद इसी लिए यह अवधारणा बनी होगी कि यह सूक्ष्म शरीर आगे स्थूल को धारण करता है। यह अवधारणा इससे भी सिद्ध होती है कि मनुष्यों के डीएनए के जेनेटिकक्रम में ९९.९ तक की समानता होती है। व्यक्ति के दाह संस्कार के बाद भी उसकी बचने वाली हड्डियों और राख जिसे फूल कहा जाता है में यह मौजूद रहता है। इसलिए उसे सम्मान देने के लिए ही फूल चुनने की रस्म की जाती है।

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Mount Everest - An Open Graveyard (रेनबो वैली - माउंट एवेरेस्ट - एक खुला क़ब्रिस्तान)

💥कल्पना कीजिये कि आप माउंट एवेरेस्ट को फतेह करने जा रहे है।

💥आप अपनी चढ़ाई के आखिर दौर में है, शिखर को चूमने के लिए आप बेताब है तभी आप एक ऐसी जगह पहुचतें है जहा का द्रश्य देख कर आप कि रूह काप जाती है जहा आपको कई क्लाइंबर्स के शव फ्रोज़न अवस्था में दिखाई देते है,

💥 तो समझ लीजिये कि आप रेनबो वैली पहुँच गए है।

💥माउंट एवेरेस्ट को फतेह करना हर क्लाइंबर्स का सपना होता है।

💥लेकिन इसको फतेह कारण इतना आसान नहीं है।

💥 पहले जब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी तब हर चार में से एक क्लाइंबर्स  कि मौत इस प्रयास में होती थी और आज जबकि तकनीक काफी विकसित हो गयी फिर भी हर हज़ार में से बीस क्लाइंबर्स कि मौत इस प्रयास में होती है।

💥 इनमे से अधिकतर कि मौत ऐसी जगह होती है जहा से इनके शवों को निचे लाना लगभग असम्भव होता है।

 यह जगह कहलाती है रेनबो वैली।

🌿रेनबो वैली, माउंट एवेरेस्ट पर उसके शिखर से कुछ निचे स्थित  है।

💥  यह नाम सुनने में जितना अच्छा लगता है, यह जगह उतनी ही भयावह  है।

💥माउंट एवेरेस्ट का यह हिस्सा क्लाइंबर्स के लिए मौत कि घाटी है।

💥यह पर अब तक सैकड़ों क्लाइंबर्स कि मौत हो चुकी है।  उनमे से अधिकतर के शव भी अभी तक वही पड़े है।

💥क्योंकि यहाँ से शवो को निचे उतारना लगभग नामुमकिन है।

💥हेलिकॉप्टर्स इसकी आधी ऊँचाई तक ही पहुच पाते है।

💥अत्यधिक ठंड  व बर्फ के कारण यहाँ पड़े हुए शव काफी हद तक सुरक्षित बने हुए है।

💥 इसलिए इस जगह को खुला कब्रिस्तान कहा जाता है।

💥यहाँ पर क्लाइंबर्स का सामान भी इधर – उधर बिखरा पड़ा है जिसमे टेंट, जेकेट, ओक्सिजन सिलेंडर  आदि है।

अभी तक पहचाना गया सबसे पुराना शव George Mallory का है जो कि 1924 में तूफ़ान में फँसकर मारे गए थे।

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यह कहानी है "टूथ पेस्ट" की

😀जब कोई  वस्तु आसानी से उपलब्ध हो तो उस पर या उसकी उत्पत्ति पर ध्यान नहीं जाता। पर किन हालात में उसका आविष्कार कैसे, क्यों और कब हुआ, यदि यह सोचा जाए तो काफी कुछ नयी जानकारी मिल जाती है। 😀आज सुबह मुंह में झाड़ू लगाते समय ऐसे ही ख्याल आया कि “टुथ पेस्ट” का जन्म क्यों, कैसे और कब हुआ होगा ? पेस्ट के पहले मुंह साफ करने के लिए सूखे चूर्ण का उपयोग शुरू हुआ था। जिसमें अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तत्व काम में लाए जाते रहे थे। अपने देश की बात करें तो यहां सदियों से सुबह सबसे पहले मुख साफ करने की प्रथा का विवरण मिलता है। 😀चाहे वह विभिन्न वृक्षों की पतली टहनियों से बनाई गई दातौन हो या फिर नमक, फिटकरी, मिट्टी या कोयले की राख के  मंजन हों। 😀विदेशों में हड्डी के चूरे के उपयोग का भी विवरण मिलता है. पर ये सब सूखे चूर्ण के रूप में ही काम में लाए जाते थे। 😬फिर सहूलियत को देखते हुए पेस्ट की ईजाद हुई होगी। हो सकता है पहला “पेस्ट” जो दांतों और मसूढ़ों को निरोग रखने के लिए प्रयोग में लाया गया हो वह अपने अौषधीय गुणों के कारण शहद हो, जिसने सूखे चूर्ण की जगह ली हो। 😀वैसे हजारों साल पहले चीन, भारत और मिस्र में “टूथ पेस्ट” के चलन का विवरण मिलता है। चीन में नरम कोपलों, नमक, हड्डी के चूर्ण और सुगंधित फूलों की पंखुड़ियों को पीस कर  पानी में मिला गाढ़ा पेस्ट बना दाँतो को साफ करने का चलन था।  😀तरह-तरह के प्रयोग करते हुए उन्होंने इसमें जिनसेंग, जड़ी-बूटियों तथा नमक इत्यादि का भी खूब उपयोग किया।

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तेजाब – तेजाब खट्टे स्वाद वाली क्षयकारी वस्तु है। किसी भी तेजाब का घोल लिटमस पेपर को लाल कर देता है।

Acid – Acid is a sour tasting, corrosive substance. 429 more words

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