आम तौर पर यह अवधारणा है कि दौड़ते वक्त मुह बंद रहना चाहिए। यह एकदम गलत अवधारणा है। दौड़ते वक्त फेफड़ों को सामान्य से बहुत अधिक आॅक्सिजन की जरूरत होती है इसलिए नाक से सांस लेना पर्याप्त नहीं होता। दौड़ते वक्त हमेशा मुंह और नाक दोनों से सांस लेना चाहिए।

मुझे शुरू में इस बात की जानकारी नहीं थी और मैं भी आम लोगों की तरह ही नाक से सांस लेता था। मैने महसूस किया कि मैं बहुत जल्दी थक जाता था। फिर मैने पेशेवर धावकों की शैली पर गौर किया। मैने देखा कि ये लोग मुंह और नाक से सांस लेते हैं। राजेश और रविकांत जो पेशेवर धावक हैं और नोएडा के रनर्सस 365 कल्ब के जुड़े हैं नेे मुझे बताया कि दौड़ते वक्त सिर्फ से सांस लेना न सिर्फ गलत है बल्कि यह स्वास्थ के लिए भी हानीकारक है। लम्बे समय तक ऐसा करने से फेफड़े कमजोर हो सकते हैं और श्वास का रोग हो सकता है। उन्होने बताया कि दौड़ की प्रमुखता वाले प्रत्येक खेल में सांस लेने का यह नियम लागू होता है। आप यदि फुटबाॅल के खिलाडि़यों को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि वे सभी अतिरिक्त श्वास के लिए मुंह खोल कर खेलते है।

आरंभ में ऐसा करने पर गला सूखता है लेकिन क्रमशः इसकी आदत हो जाती है। मुंह खोल कर दौड़ने से जल्दी थकान नहीं होती और लम्बे समय तक दौड़ जारी रखी जा सकती है।

इसके साथ सांस लेने और छोड़ने की भी तकनीक होती है। दौड़ते वक्त मुंह को अंग्रेजी के ‘ओ’ के आकार का बनाए रखें। सांस को जल्दी जल्दी दो भाग में ले और ऐसे ही छोड़ें भी। दौड़ते वक्त आपके मुंह से फू-फू-फू-फू की ध्वनी निकलनी चाहिए।

अगली कड़ी में दौड़ने के लिए कैसे जूतें और टी-शर्ट पहने इस पर चर्चा करेगें। तब तक मुझे दीजिए इजाज़त और आप भागते रहिए क्योंकि दौड़ना सच में बहुत जरूरी है।

वि.श.