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"माता सीता" के त्याग पर समस्त भारत को स्वाभिमान है

१माता सीता पतिव्रता नारी का प्रतीक हैं। वो क्ष्री राम के इलावा किसी को सपने में भी नहीं देखना चाहती थीं। रावण के ज़बरदसती समीप आने पर तिनके की ओट का सहारा लेतीं हैं।
२ संस्कारी माता के रूप में लव-कुश को संस्कारी पुत्रों के रुप में संसार के सामने रखा। पिता क्ष्री राम जी के बारे में पता लग जाने पर उनहोंने माता द्वारा आदेश-भद हो कर पिता की हर आज्ञा का पालन किया।
३ त्याग की परिमुर्ति की आज्ञा मान कर अग्नि में प्रवेश किया और अपनी सुचिता का प्रमान दिया।
४ बनवास को बेजने वाली माता कैक्यी के प्रति भी किसी प्रकार का वैमन्सय न रख के आदर्शता का परिचय दिया है।
इसलिये जब कभी भारतीय नारी के आदर्श चरित्र की बात हुई है, तब सीता माता का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है।…

हमारे धार्मिक गर्न्थ अर्थात हमारा अध्यातमक इतिहास इस बात की साक्षी है कि जब जब इस समाज का कल्यान करने के लिये भग्वान अवतरित हुऐ है तब तब उन का साथ देने के लिये उनकी पार्षद, उनकी शक्ति भी अवतरित हुई है। जहाँ भग्वान अपना प्रयोजन सिध करने के लिये लीलायें करते है, वहीं उनकी शक्ति उनकी लीला में उन की सहायक बन के एक आदर्श स्थापित करतीं हैं। माँ सीता का अवतारण भी इस प्रथ्वि पर पापी रावण का अतं का कारण बनीं। लेकिन इस लीला में माँ सीता को किन किन भौतिक कठिनाइयों का सामना करना पडा ये सर्वविदित है।

Asaram Bapu

Media's Diwali

On this Diwali, with the gleaming diyas, we want every darkness to go away from our life, including the darkness of paid media spreading in society. 196 more words

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Sell, sell, sell - just do it in the social space

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