“वादों के पुष्प” बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो मै आँचल यकीन का बिछाये उन्हें समेटती रही…. अपने स्पर्श की नमी से वो उन पुष्पों को जिलाता रहा मै मासूम शिशु की तरह उन्हें सहेजती रही… more →
"Na sur hai na taal hai bus bhav hain or junoon hai"loveisineffable wrote 6 months ago: i asked my heart “if it was going to end and hurt this badly why did you even start to love? … more →
manyuabhi wrote 7 months ago: There is a quote I believe in “ If you love someone, set them free. If they comes back than it is … more →
limit wrote 8 months ago: “वादों के पुष्प” बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो मै आँचल यकीन का बिछाये उन्हें समेटती रह … more →
limit wrote 8 months ago: “तुम चाहो तो” एक अधूरे गीत का मुखडा मात्र हूँ, तुम चाहो तो छेड़ दो कोई तार सुर का एक म … more →
limit wrote 9 months ago: “झील को दर्पण बना “रात के स्वर्णिम पहर में झील को दर्पण बना चाँद जब बादलो से निकल श्रृं … more →
limit wrote 1 year ago: “बिलखता दर्दाना” हर स्वप्न एक बिलखता दर्दाना हुआ, वक्त के छलावे से अपना याराना हुआ.. रूह … more →
limit wrote 1 year ago: “दिले-नामा-ए-बय” इस दिल का दोगे साथ, कहाँ तक, ये तय करो ! फिर इसके बाद दर्ज, दिले-नामा … more →
limit wrote 1 year ago: “दर्द हूँ मैं “ अश्कों से नहाया, लहू से श्रृंगार हुआ, सांसों की देहलीज पर कदम रख, धडकन … more →
limit wrote 1 year ago: “खामोश सी रात” सांवली कुछ खामोश सी रात, सन्नाटे की चादर मे लिपटी, उनींदी आँखों मे कुछ सा … more →
limit wrote 1 year ago: “भ्रम” कल्पना की सतह पर आकर थमा, अनजान सा किसका चेहरा है….. शब्जाल से बुनकर बेजुबा … more →
limit wrote 1 year ago: “जिन्दगी” जीने का फकत एक बहाना तलाश करती ये जिन्दगी, अनचाही किसकी बातें बेशुमार करती ये … more →
limit wrote 1 year ago: “वीरानो मे” खामोश से वीरानो मे, साया पनाह ढूंढा करे, गुमसुम सी राह न जाने, किन कदमो का न … more →
limit wrote 1 year ago: “प्रेमी “ दिन को परेशान , रात को हैरान किया करते हैं, नियाजमन्द ख़ुद ही ख़ुद पे बेदाद … more →
limit wrote 1 year ago: “दिल” मुहब्बत से रहता है सरशार ये दिल, सुबह शाम करता है बस प्यार ये दिल. कहाँ खो गया ख़ु … more →
limit wrote 1 year ago: तेरा ख्याल तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर, आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी … more →
limit wrote 1 year ago: इन्तहा-ऐ-मोहब्बत इन्तहा-ऐ-मोहब्बत में , सहरा मे बसर हो जाएगा… ये असरा-ऐ-जूनून लेकर , की वो दरि … more →
limit wrote 1 year ago: “दम -ऐ -फिराक” दम -ऐ -फिराक मे निकली थी जान मेरी , फ़िर क्यूँ लिखी गईं सजाएं नाम पे तेर … more →
limit wrote 1 year ago: हवा ये हवा कुछ ख़ास है, जो तेरे आस पास है, मुझे छू, मेरा एहसास कराने चली आई ये हवा। सारी रात मेरे साथ … more →
limit wrote 1 year ago: ‘दो फूल’ मेरी कब्र पे दो फूल रोज आकर चढाते हैं वो, हाय , इस कदर क्यों मुझे तडपाते हैं … more →