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Thursday's Child: Meet Raja

“Thursday’s Child has far to go”

Meet Raja:

I had a long conversation about Raja and her goals in life.   Raja is one of those 2,500 children looking for her forever home. 129 more words

Thursday's Child

Recursive Descent parser implementation in c language

If any one aware of how to start or implement this algorithm please share your design logic,
i am not getting any idea to do. 15 more words

Recent Questions - Stack Overflow

The Milk Mustache Of Raja Drawja

Getting to know the back story of Milk and watching Raja’s interpretation of Milk as well.

RuPaul's Drag Race

Daily Research 5 December 2014

Negative Market.

S2 S1 IDX R1 R2 5,118 5,149 5,177.1 5,205 5,219
  • Lack of fresh new leads would not revive the trading activities.
  • The IDX ended the trading relatively up after going near the psychological level of 5,200 yesterday.
  • 241 more words
Daily Research

Kiwoom Trader 5 December 2014

Dow Jones industrial average melemah 12.52 poin, atau 0.07%, pada 17,900.10. Nasdaq Composite turun tipis 5.04 poin, atau 0.11%, pada 4,769.44. Wall Street berada di kisaran negatif pada hari Kamis di tengah turunnya sektor energi dan rencana stimulus ECB yang masih akan melihat kondisi ekonomi pada awal tahun 2015. 85 more words

Daily Trading

Yoga of Sri Chinmoy

In the west yoga has become synonymous with the aspect of physical exercises known as Hatha Yoga. However Yoga is a wide ranging set of spiritual teachings which seek to bring an aspirant closer to the Universal Self. 858 more words

Yoga

सब योगो में राजा ज्ञानयोग

श्री योगवाशिष्ठ महारामायण में ‘अर्जुनोपदेश’ नामक सर्ग में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं- “हे भारत ! जैसे दूध में घृत और जल में रस स्थित होता है वैसे ही सब लोगों के हृदय में तत्त्व रूप से स्थित हूँ। जैसे दूध में घृत स्थित है वैसे ही सब पदार्थों के भीतर मैं आत्मा स्थित हूँ। जैसे रत्नों के भीतर-बाहर प्रकाश होता है वैसे ही मैं सब पदार्थों के भीतर-बाहर स्थित हूँ। जैसे अनेक घटों के भीतर-बाहर एक ही आकाश स्थित है वैसे ही मैं अनेक देहों में भीतर बाहर अव्यक्त रूप स्थित हूँ।” जैसे आकाश में सब व्याप्त है वैसे मैं चिदाकाश रूप में सर्वत्र व्याप्त हूँ। बन्धन और मुक्ति दोनों प्रकृति में होते हैं। पुरुष को न बन्धन है न मुक्ति है। जन्म-मृत्यु आदि जो होता है वह सब प्रकृति में खेल हो रहा है। पानी में कुछ नहीं, तरंगों में टकराव है। आकाश में कुछ नहीं, घड़ों में बनना बिगड़ना होता है। तुम चिदघन चैतन्य आत्मा हो। जैसे दूध में घी होता है, मिठाई में मिठाश होती है, तिलों में तेल होता है ऐसे ही चैतन्य सर्वत्र व्याप्त होता है, सबमें ओतप्रोत है। तिलों में से तेल निकाल दो तो तेल अलग और फोतरे अलग हो जाएँगे लेकिन चैतन्य में ऐसा नहीं है। जगत में से ब्रह्म अलग निकाल लो, ऐसा नहीं है। तिलों में से तो तेल निकल सकता है लेकिन जगत में से ब्रह्म नहीं निकल सकता। जैसे जगत में से आकाश नहीं निकल सकता ऐसे ही आकाश में से भी चिदाकाश नहीं निकल सकता। यह चिदाकाश ही परमात्म-तत्त्व है। वही हर जीव का अपना आपा है लेकिन जीव ‘मैं’ और ‘मेरा’ करके इन्द्रियों के राज्य में भटक गया है इसलिए जन्म-मरण हो रहा है। नहीं तो जर्रा-जर्रा खुदा है। खुदा की कसम, जर्रा-जर्रा खुदा है। कोई उससे जुदा नहीं है। सब घट मेरा साँईया खाली घट ना कोय। बलिहारी वा घट की जा घट परगट होय।। कबीरा कुँआ एक है पनिहारि अनेक। न्यारे न्यारे बर्तनों में पानी एक का एक।। ज्ञानयोग में निष्ठुर होकर ज्ञान का विचार करें। वहाँ लिहाज नहीं करना है। श्रद्धा करें, उपासना करें तो अन्धा होकर श्रद्धा करें। उपासना में अन्धश्रद्धा चाहिए, गहरी श्रद्धा चाहिए। श्रद्धा में विचार की जरूरत नहीं है, अन्यथा श्रद्धा तितर-बितर हो जायेगी। है तो पत्थर, है तो शालिग्राम लेकिन भगवान है। वहाँ विचार मत करो। है तो मिट्टी का पिंड, लेकिन दृढ़ भावना रखो कि शिवलिंग है, साक्षात भगवान शिव हैं। श्रद्धा में विचार को मत आने दो। हम लोग क्या करते हैं? श्रद्धा में विचार घुसेड़ देते हैं…. विचार में श्रद्धा घुसेड़ देते हैं। नहीं…। जब आत्मविचार करो तब निष्ठुर होकर करो। ‘जगत कैसे बना ? ब्रह्म क्या है ? आत्मा क्या है ? मैं आत्मा कैसे ?’ कुतर्क तो नहीं लेकिन तर्क अवश्य करो। ‘तर्क्यताम्… मा कुतर्क्यताम्।’ विचार करो तो निष्ठुर होकर करो और श्रद्धा करो तो बिल्कुल अन्धे होकर करो। अपने निश्चय में अडिग। चाहे कुछ भी हो, सारी दुनिया, सारी खुदाई एक तरफ हो लेकिन मेरा इष्ट, मेरा खुदा, मेरा भगवान अनन्य है, मेरे गुरु का वचन आखिरी है। ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम्। मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा।।
Satsang