माथे में सेंदूर पर छोटी दो बिंदी चमचम-सी, पपनी पर आँसू की बूँदें मोती-सी, शबनम-सी। लदी हुई कलियों में मादक टहनी एक नरम-सी, यौवन की विनती-सी भोली, गुमसुम खड़ी शरम-सी। पीला चीर, कोर में जिसकी चकमक गोटा-… more →
Hindi Kaviwrote 3 months ago: कृष्ण की चेतावनी (रश्मिरथी) - रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) वर्षों तक वन में घूम-घूम, ब … more →
wrote 3 months ago: - रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार … more →
wrote 4 months ago: रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव है । उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फि … more →
wrote 4 months ago: - रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो किसने कहा, युद्ध … more →
wrote 5 months ago: धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा … more →
wrote 5 months ago: जो अगणित लघु दीप हमारे तुफानों में एक किनारे जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल कलम, … more →
wrote 10 months ago: वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।सौभा … more →
wrote 1 year ago: धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा … more →
wrote 1 year ago: ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो किसने कहा, युद्ध की बेला गई, शान्ति से बोलो? किसने कहा, और मत … more →
wrote 1 year ago: सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ् … more →
wrote 1 year ago: सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत हूँ मैं … more →
wrote 1 year ago: Ramdhari Singh ‘Dinkar’ (September 23, 1908– April 24, 1974) was born in a poor Bhumihar … more →
wrote 2 years ago: … more →
wrote 2 years ago: रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है! उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, औ … more →
wrote 2 years ago: पुरुष वीर बलवान, देश की शान, हमारे नौजवान घायल होकर आये हैं। कहते हैं, ये पुष्प, दीप, अक्षत क्यों ला … more →
wrote 4 years ago: माथे में सेंदूर पर छोटी दो बिंदी चमचम-सी, पपनी पर आँसू की बूँदें मोती-सी, शबनम-सी। लदी हुई कलियों मे … more →
wrote 4 years ago: धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा, कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा। कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रह … more →
wrote 4 years ago: क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ कब हारा ? क्षमाशील … more →
wrote 4 years ago: वह संसार जहाँ तक पहुँची अब तक नहीं किरण है जहाँ क्षितिज है शून्य, अभी तक अंबर तिमिर वरण है देख जहाँ … more →