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John 1:12-13

“Yet to all who did receive him, to those who believed in his name, he gave the right to become children of God— children born not of natural descent, nor of human decision or a husband’s will, but born of God.” 14 more words

Cal Staggers

Don Sturgill, Word of Wisdom

Listen as master storyteller and gifted writer, Don Sturgill, shares philosophies on life and his love of the pursuit of wisdom.

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Episodes

Hope on the Horizon - The Magic Foundation

Some days are normal.  Some days are normal.  I have found that most days are not.  In fact, I would go as far as that I don’t really remember what a normal day feels like.   1,182 more words

Matthew 5:14,16

““You are the light of the world. A town built on a hill cannot be hidden. In the same way, let your light shine before others, that they may see your good deeds and glorify your Father in heaven.” 14 more words

Cal Staggers

Unique Selling Proposition * Marketing Momentum w/Charles & Deborah

Have you defined your unique selling proposition? Have you defined your target audience? Is it a fit for what your audience is looking for in your product or service? 27 more words

Episodes

हिंदुत्व-से-समझौता-स्वीकार्य-नहीं

http://www.pressnote.in/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82_52223.html#.U9fHTmKSy2cअहमदाबाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने एक बार अपने हिंदुत्व के मुद्दे की जोरदार पैरवी की। उन्होंने स्पष्ट किया संघ हिंदुत्व रूपी सत्य के साथ डूबने को तैयार है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई समझौता

स्वीकार्य नहीं है। वह देश में आर्थिक तथा राजनीतिक एकाधिकारशाही पर भी जमकर बरसे। वह यहां भारतीय विचार मंच की ओर से वर्तमान परिपे्रक्ष्य में हिंदुत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। भागवत ने कहा कि संघ तथा विहिप हिंदुत्व को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि देश में हिंदुत्व को संकुचित सोच के साथ जोड़कर प्रचारित करने का प्रयास किया जा रहा है,जबकि मानवता का पोषक संघ सभी धर्म व पंथ के लोगों को गले लगाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि जातिभेद तथा कूरीतियों के कारण आज हिंदू समाज विविध भागों में बंटा है, लेकिन सबके बीच आज भी एक रक्त संबंध कायम हैं जिसके कारण विशाल देश एक सभ्यता और संस्कृति में बंधा है। भागवत ने कहा कि भारत से बाहर की दुनिया के लोग यहां के लोगों को हिंदू मानते हैं और यह पहचान हमारे नाम की तरह समाज के साथ चिपक गई है, लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो सुविधाएं छिनने की आशंका से अपने आपको हिंदू कहने से भी डर रहा है। उन्होंने कहा पैगंबर तथा ईसा मसीह की संदेश रूपी कविताओं में भी हिंदुत्व की व्याख्या के उदाहरण हैं लेकिन अपने ही देश में विवेकानंद, हेडगेवार, सावरकर, विहिप, संघ सबके अलग-अलग हिंदुत्व की व्याख्या कर समाज को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। हिंदुत्व पर किसी का एकाधिकार या ठेका नहीं है। हिंदुत्व की असली लड़ाई तो राजनीति के बाहर है। इस्लाम को स्वभाव से आक्रामक बताते हुए भागवत ने कहा कि हिंदू को अपने अस्तित्व के लिए संगठित एवं शक्तिशाली होना पड़ेगा। हिंदुत्व आज संकट में है तथा संघर्षशील है। दुनिया में अकेले भारत ऐसा देश है जिसकी पहचान को लेकर भी भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा हिंदू को मानवता के लिए संघर्ष करना होगा, उसे हारने अथवा रण छोड़कर जाने की इजाजत नहीं है। उन्हें अखंड, गुलाम अथवा आजाद भारत की घटनाओं पर न जाते हुए हिंदुत्व की प्रासंगिकता के तत्व को याद रखना होगा। भागवत ने साफ कहा कि संघ वोट पाने या सत्ता हासिल करने के लिए यह काम नहीं कर रहा है, हिंदुस्तान के विकास का जो बीड़ा उसने उठाया है वह उस पर आगे बढ़ेगा, फिर कोई साथ दे अथवा नहीं। उन्होंने हिंदुत्व के द्वंद्व में फंसे लोगों की तुलना हिंदी फिल्म के गीत .. आज सोमवार है। हां, बागों में बहार है। हां, तुमको मुझसे प्यार है। ना ना ना! से की और कहा कि भारत में ही कुछ लोग आज हिंदुत्व के मुद्दे पर इस तरह का रवैया अख्तियार किए हुए हैं।

Asaramji