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Swami Nityananda - "Sant Asharam Bapu Is Innocent".

संत श्री आशाराम बापू के समर्थन में खुलकर आये स्वामी नित्यानंद संत श्री आशारामजी बापू के केस का पूरी तरह से अध्ययन किया है और सारी जानकारी ली है। मैंने कुछ डॉक्टरों से भी परामर्श लिया जो इस तरह की मेडिकल रिपोर्ट बनाते हैं। मैंने उनसे इस रिपोर्ट के आधार पर कानूनी अभिप्राय माँगा तो उन्होंने कहा : ”स्वामीजी ! 13 more words

Asaram Bapu

वर्षा ऋतु विशेष

वर्षा ऋतु में वायु का विशेष प्रकोप तथा पित्त का संचय होता है। वर्षा ऋतु में वातावरण के प्रभाव के कारण स्वाभाविक ही जठराग्नि मंद रहती है, जिसके कारण पाचनशक्ति कम हो जाने से अजीर्ण, बुखार, वायुदोष का प्रकोप, सर्दी, खाँसी, पेट के रोग, कब्जियत, अतिसार, प्रवाहिका, आमवात, संधिवात आदि रोग होने की संभावना रहती है। इन रोगों से बचने के लिए तथा पेट की पाचक अग्नि को सँभालने के लिए आयुर्वेद के अनुसार उपवास तथा लघु भोजन हितकर है। इसलिए हमारे आर्षदृष्टा ऋषि-मुनियों ने इस ऋतु में अधिक-से-अधिक उपवास का संकेत कर धर्म के द्वारा शरीर के स्वास्थ्य का ध्यान रखा है। इस ऋतु में जल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। जल द्वारा उत्पन्न होने वाले उदर-विकार, अतिसार, प्रवाहिका एवं हैजा जैसी बीमारियों से बचने के लिए पानी को उबालें, आधा जल जाने पर उतार कर ठंडा होने दें, तत्पश्चात् हिलाये बिना ही ऊपर का पानी दूसरे बर्तन में भर दें एवं उसी पानी का सेवन करें। जल को उबालकर ठंडा करके पीना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। आजकल पानी को शुद्ध करने हेतु विविध फिल्टर भी प्रयुक्त किये जाते हैं। उनका भी उपयोग कर सकते हैं। पीने के लिए और स्नान के लिए गंदे पानी का प्रयोग बिल्कुल न करें क्योंकि गंदे पानी के सेवन से उदर व त्वचा सम्बन्धी व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं। 500 ग्राम हरड़ और 50 ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेना चाहिए। करने योग्य १) पेट साफ़ रहे इसके लिए अच्युताय हरड-रसायन २ -२ गोली खाना | हरड रसायन ,रसायन से बना हुआ टोनिक है । दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा | २) शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना | ३) मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देनेवाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए | ४) वर्षाऋतु में पानी गरम करके पीयें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखे | ५) वायुप्रकोप से जोडों मे दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है | भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है | ६) चर्मरोग, रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है | नींबू,अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्‍यप्रद रहेगा | ७) सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्‍य के लिए हितकारक है | ८) अश्विनी मुद्रा- श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बि‍मारि‍यों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है | न करने योग्य

  • १) गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थ के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है । फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए |
  • २) देर रात बारिश के सीज़न में न जागें |
  • ३) अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें |
  • ४) खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है ।
  • ५) ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें | सिर गिला हो तो तुरंत पौंछ लें।
  • ६) भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें | मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पौंछ लें |

पथ्य आहारः इस ऋतु में वात की वृद्धि होने के कारण उसे शांत करने के लिए मधुर, अम्ल व लवण रसयुक्त, हलके व शीघ्र पचने वाले तथा वात का शमन करने वाले पदार्थों एवं व्यंजनों से युक्त आहार लेना चाहिए। सब्जियों में मेथी, सहिजन, परवल, लौकी, सरगवा, बथुआ, पालक एवं सूरन हितकर हैं। सेवफल, मूँग, गरम दूध, लहसुन, अदरक, सोंठ, अजवायन, साठी के चावल, पुराना अनाज, गेहूँ, चावल, जौ, खट्टे एवं खारे पदार्थ, दलिया, शहद, प्याज, गाय का घी, तिल एवं सरसों का तेल, महुए का अरिष्ट, अनार, द्राक्ष का सेवन लाभदायी है। पूरी, पकोड़े तथा अन्य तले हुए एवं गरम तासीरवाले खाद्य पदार्थों का सेवन अत्यंत कम कर दें। अपथ्य आहारः गरिष्ठ भोजन, उड़द, अरहर, चौला आदि दालें, नदी, तालाब एवं कुएँ का बिना उबाला हुआ पानी, मैदे की चीजें, ठंडे पेय, आइसक्रीम, मिठाई, केला, मट्ठा, अंकुरित अनाज, पत्तियों वाली सब्जियाँ नहीं खाना चाहिए तथादेवशयनी एकादशी के बाद आम नहीं खाना चाहिए। पथ्य विहारः अंगमर्दन, उबटन, स्वच्छ हलके वस्त्र पहनना योग्य है। अपथ्य विहारः अति व्यायाम, स्त्रीसंग, दिन में सोना, रात्रि जागरण, बारिश में भीगना, नदी में तैरना, धूप में बैठना, खुले बदन घूमना त्याज्य है। इस ऋतु में वातावरण में नमी रहने के कारण शरीर की त्वचा ठीक से नहीं सूखती। अतः त्वचा स्वच्छ, सूखी व स्निग्ध बनी रहे। इसका उपाय करें ताकि त्वचा के रोग पैदा न हों। इस ऋतु में घरों के आस-पास गंदा पानी इकट्ठा न होने दें, जिससे मच्छरों से बचाव हो सके। इस ऋतु में त्वचा के रोग, मलेरिया, टायफायड व पेट के रोग अधिक होते हैं। अतः खाने पीने की सभी वस्तुओं को मक्खियों एवं कीटाणुओं से बचायें व उन्हें साफ करके ही प्रयोग में लें। बाजारू दही व लस्सी का सेवन न करें।    

Asharam Bapu

Pharmacopée maure avec Son Excellence le Noble et Grand Bishara-Hafiz:El-Bey

Deux jeunes nobles assistant à la fabrication de remèdes phytothérapiques dans les laboratoires pharmaceutiques de l’Empire Maure Amexem. Son Excellence le Noble et Grand Bishara-Hafiz:El-Bey… 102 more words

To Hell Do They Go

-Param Pujya Sri Lilashahji Maharaj

Be humane. Learn to cultivate humanistic qualities. One who is humane listens to the good of all and does good to all.  235 more words

Asharam Bapu