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What really is going on in your mind.....

We all do it, we all speak to ourselves, when you talk to yourself in your mind, which self do you address? Usually people do not talk to their divinity, but to the most superficial aspects of their everyday personality. 132 more words

Self Development

New! Giten Calendar 2015

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Giten Calendar 2015

Calendar 2015 (12 Months)

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Giten Calendar 2015 is a calendar of the life and work of spiritual teacher and author Swami Dhyan Giten. 34 more words

माँ की सीख

विश्व के सभी देशों से अधिक मानवीय संवेदना, परहित की भावना,  भगवत्श्रद्धा, दूसरों के दुःख में सहायरूप होने के संस्कार भारत में पाये जाते हैं। पाश्चात्य संस्कृति के लगातार आक्रमण के बावजूद भी सनातन संस्कृति के इन दिव्य संस्कारों का उच्छेदन नहीं हुआ, बल्कि भारतवासियों के हृदयों में, रगों में ये अभी भी समाये हुए हैं। हमारे देश में आज भी कई घरों में माताएँ प्रातःकाल बच्चों को सिखाती हैं : ‘बेटा!

उत्तम संतान

नारदजी के अहैतु की कृपा से भक्त प्रह्लाद का जन्म


श्री नारदजी ने अहैतु की कृपा से कयाधू को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की शिक्षा दी परंतु लक्ष्य रहता था गर्भस्थ बालक की ओर गर्भस्थ बालक भगवान का भक्त बने। कयाधू से भगवान के अनन्य भक्त शिरोमणि प्रह्लाद उत्पन्न हुए। प्रह्लाद ने गर्भ में सुने हुए नारदजी के उपदेश का प्रसंग अपनी पाठशाला के विद्यार्थियों को बहुत ही विशदरूप से सुनाया है, उसे ‘श्रीमद् भागवत’, सप्तम् स्कन्ध, अध्याय 6 में देख सकते हैं।

उत्तम संतान

संस्कारों का महत्त्व

संस्कारों का महत्त्व :-
संस्कार अर्थात् मनुष्य के मनोदैहिक तंत्र पर पड़ी उसके कर्मों की छाप। संस्कार अव्यक्तरूप से प्राणी में विद्यमान रहते हैं। इनकी शक्ति बड़ी प्रबल होती है। ये प्राणी के चेतन व अचेतन व्यवहार को अनजाने में ही प्रभावित करते रहते हैं। अनुकूल अवसर मिलते ही ये सूक्ष्म संस्कार पुनः स्थूल वृत्तियों का रूप धारण कर लेते हैं और मनुष्य के व्यवहार में व्यक्त होने लगते हैं। जैसे जिसके संस्कार, वैसा ही उसका आचरण होता है। अतः हिन्दू संस्कृति में संस्कारों की ओर अत्यधिक ध्यान दिया गया है।वेदों तथा शास्त्रों में सुखी, स्वस्थ व सुसंपन्न जीवन के लिए सोलह संस्कारों का वर्णन आता है। इनमें एक प्रमुख संस्कार है – जातकर्म संस्कार। बालक के जन्म के बाद उसे शरीर, मन व बुद्धि से स्वस्थ रखने के लिए जो भी आवश्यक कर्म किये जाते हैं उन्हें जातकर्म संस्कार कहते हैं।
उत्तम संतान

उत्तम संतानप्राप्ति के लिए ( ५ जनवरी २०१४ से १८ सितम्बर २०१४ (5-Jan-2014 to 18-Sep-2014) तक का समय गर्भधान के लिए अति उत्तम है)

ग्रह-नक्षत्रों का असर मुनष्यों-प्राणियों पर ज्यादा होता है | ब्रहस्पति, बुध, शुक्र, चन्द्र – ये शुभ ग्रह हैं | उनमे भी ब्रहस्पति अत्यंत शुभ ग्रह है | ब्रहस्पति जब बलवान होता है, तब पुण्यात्माएँ पृथ्वी पर अवतरित होती हैं | बलवान ब्रहस्पति जिसकी जन्मकुंडली में होता है, उसमें आध्यात्मिकता, ईमानदारी, सच्चारित्र्य, विद्या और उत्तम विशेषताएँ होती हैं | इसलिए गर्भाधान ऐसे समय में होना चाहिए, जिससे बच्चे का जन्म बलवान उत्तम ग्रहों की स्थिति में हो | 11 more words
उत्तम संतान

सगर्भावस्था के दौरान आचरण

सगर्भावस्था के दौरान आचरण:-
१. सगर्भावस्था में गर्भिणी अपानवायु, मल, मूत्र, डकार, छींक, प्यास, भूख, निद्रा,खांसी, थकान की श्वास, जम्हाई, अश्रु आदि आयुर्वेद में बताए गए १३   वेगों को न रोके |
२. सख्त व टेढ़े आसन पर बैठना, पैर फैलाकर और झुककर ज्यादा समय बैठना वर्जित है |
३. प्रथम तीन व अंतिम दो मास यात्रा न करे | अन्य महीनो में भी ऐसा यात्रा करे, जिसमे शरीर की हिलचाल ज्यादा न हो |
४. चुस्त व गहरे रंग के कपडे न पहने |
५. दिन में नींद व रात्रि को जागरण न करे | दोपहर को विश्रांति ले पर गहरी नींद वर्जित है
६. अप्रिय बात न सुने व वाद – विवाद में न पड़े | मन में उद्वेग उत्पन्न करनेवाले विभस्त दृश्य, टीवी सीरियल न देखे व ऐसे साहित्य पढ़े – सुने नहीं, रेडियो व तीव्र ध्वनि भी न सुने। सगर्भावस्था के दौरान समागम सर्वथा वर्जित है |
७. मैले, विकलांग या विकृत आकृति के व्यक्ति, रजस्वला स्त्री, रोगी एवं हीन शरीरवाले का स्पर्श न करे |
८. दुर्गंधयुक्त स्थान पर न रहे तथा इमली के वृक्ष के नजदीक न जाये|
९. जोर जोर से न बोले और गुस्सा न करे |
१०. सीधे न सोकर करवट बदल – बदलकर सोये | घुटने मोड़कर न सोये |
११. शरीर के सभी अंगो को सौम्य कसरत मिले, इस प्रकार घर के कामकाज करते रहना चाहिए |
१२. दर्द निवारक ( पेनकिलर ) व नींद की गोलियों का सेवन न करे |
१३. कुछ देर तक शुद्ध हवा में टहलना लाभदायक है |
१४. अधिक चाय-कॉफी पीनेवाली महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता कम होती है। गर्भवती स्त्री अधिक चाय पीती है तो नवजात शिशु को जन्म के बाद नींद नहीं आती।
१५. मांस का सेवन न करें:- व्यापारिक लाभ की दृष्टि से पशुओं का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें अनेक रासायनिक मिश्रण खिलाये जाते हैं। इन्ही मिश्रणों में से एक का नाम है डेस(डायथिस्टिल-बेस्ट्राल)। इस मिश्रण को खाने वाले पशु के मांस के सेवन से गर्भवती महिला के आनेवाली संतान को कैन्सर हो सकता है।
१६. सगर्भावस्था में प्राणवायु की आवश्यकता अधिक होती है, इसलिए दीर्घ श्वसन व हल्के प्राणायाम का अभ्यास करे। पवित्र, कल्याणकारी, आरोग्यदायक भगवन्नाम ‘ॐ’ कार का गुंजन करे।
१७. मन को शांत व शरीर को तनावरहित रखने के लिए प्रतिदिन शवासन का अभ्यास अवश्य करे।
१८. शांति होम एवं मंगल कर्म करे। देवता, ब्राह्मण तथा गुरुजनों की पूजा करे।
१९. भय, शोक, चिंता व क्रोध को त्यागकर नित्य आनंद में रहे।गर्भिणी पलाश के एक ताजे कोमल पत्ते को पीसकर
२०. गाय के दूध के साथ रोज ले। इससे बालक शक्तिशाली और गोरा उत्पन्न होता है। माता-पिता भले काले वर्ण के हों लेकिन बालक गोरा होता है।
उत्तम संतान