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Satsang Circle with Gatlianne

Saturday Morning Satsang Circle with M. Gatlianne

8:00 – 8:45 am

Free Community Event:

(Love Offerings/Donations Accepted – but not required)

May Satsang Dates:

May 03… 167 more words

Spiritual Healing

Entropy levels at Art of Living Ashram

A Friend of mine forwarded this about the entropy levels at the Art of Living ashram or any spiritual place in general. I have heard of entropy only in thermodynamics. 522 more words

Sri Sri

Hanuman Jayanti - Glory of Hanuman

Full moon day of Chaitra Month (usually April), is the day when auspicious Hanuman Jayanti is celebrated.

The greatness of Lord Hanuman is no less than limit of Sky and his devotion to Lord Rama is even Boundless. 505 more words

Asharam

Dharmo Rakshati Rakshitah

धर्मो रक्षति रक्षित:  अर्थात् जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। इस वीडियो में ये बताया गया है कि कैसे श्री रामकृष्ण परमहंस जी की धर्म पत्नि माँ शारदाजी ने क्रूर डाकूओं से खुद की रक्षा की। केवल खुद की रक्षा ही नही की अपितु उन क्रूर लोगों का जीवन भी बदल दिया। ऐसे बड़े बड़े काम जो किसी बल से संभव नही होते वे भी धर्म के बल से संभव होते हैं। महाभारत युद्ध के आरंभ में जब भगवान अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दे चुके तब धर्मराज युधिष्ठिर रथ से उतरकर पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, कुलगुरु कृपाचार्य से आशीर्वाद लेने जाते हैं। उस समय उनको ‘ विजय भव:’  का आशीर्वाद भी देते है और पितामह भीष्म कहते हैं कि धर्मराज युधिष्ठिर तुमने अपने धर्म का पालन किया जिससे तुम्हारी विजय श्री निश्चित है। यदि तुम ये नही करते तो मैं तुम्हे शाप दे देता और तुम्हारी पराजय हो जाती। पाँडवो की विजय केवल शूरवीरता से नही हूुुई अन्यथा कौरव पक्ष में कोई कम शूरवीर नही थे। खुद भीष्मजी इच्छा मृत्यु वाले, द्रोणाचार्य अजेय, कृपाचार्य चिरंजीवी, अश्वत्थामा चिरंजीवी, कर्ण अभेद्य कवच कुंडल के रहते अजेय, दुर्योधन वज्रकाय और भी न जाने कितने शूरवीर थे। पाँडवो की विजय धर्म की विजय थी। जिसने अपने धर्म का पालन किया वे ही आखिरी विजेता हुए। भले दुर्योोधन की नांई थोड़े दिनो के लिए कोई सुख भोग ले लेकिन विजय तो धर्म का पालन करने वाले का ही होता है। अत: अपने धर्म पर अडिग रहें, अपने धर्म से विचलित न हो तो धर्म भी हमारी रक्षा करता है।

Asaramji

गरीबों के लिए पूज्य बापूजी की सहानुभूति !

 मुझे साम्राज्य की लालसा नहीं, मैं स्वर्ग भी नहीं चाहता ! मेरे जीवन की बस एक ही आकांक्षा है कि इस संसार के दुखी मनुष्यों के कष्टों का नाश कर दूँ !  32 more words

Asharam Bapu

Gyani Sada Anand me rahta hai - JI Maharaj

  1. Brahm gyani ki mahima
  2. Baalako ke saath baalak, raoiyon ke saath rasoiya, rajniyon ke asaath rajnitik,etc
  3. Par itna sab hone par bhi samajh te hain ki jagat kabhi hua nahi.
  4. 96 more words
Sant