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I am religious

I always wonder about the meaning of religion when somebody says, “I am not religious” Heard anybody saying this? Isn’t performing one’s duties, regularly- personal, social and professional- religion? 69 more words

गृहस्थाश्रम में रहकर प्रभुभक्ति कैसे की जा सकती है?"

गृहस्थाश्रम में रहकर प्रभुभक्ति कैसे की जा सकती है?”

“ज्ञानचंद नामक एक जिज्ञासु भक्त था। वह सदैव प्रभुभक्ति में लीन रहता था। रोज सुबह उठकर पूजा-पाठ, ध्यान-भजन करने का उसका नियम था। उसके बाद वह दुकान में काम करने जाता। दोपहर के भोजन के समय वह दुकान बंद कर देता और फिर दुकान नहीं खोलता था। बाकी के समय में वह साधु-संतों को भोजन करवाता, गरीबों की सेवा करता, साधु-संग एवं दान-पुण्य करता। व्यापार में जो भी मिलता उसी में संतोष रखकर प्रभुप्रीति के लिए जीवन बिताता था। उसके ऐसे व्यवहार से लोगों को आश्चर्य होता और लोग उसे पागल समझते। लोग कहतेः 7 more words

Hariom

Tin baate Sadhak ke liea

तीन बातें साधक के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ये तीन बातें तुमने कर लीं तो समझो सब कुछ कर लिया।
एक बात, अपने दोषों को दूर करने के लिए तत्पर रहो – ‘दोष शरीर में है, बुद्धी में है, मन में है, संस्कारों में है। इन संस्कारों का दोष निकल रहा है। मैं तो निर्दोष नारायण चैतन्य का, सदगुरू का संतान हूँ।’ ऐसा समझकर दोष निकालो और अपनेको गुरूतत्व में , आत्मतत्व में सिथत करो।
दूसरी बात, गुरू की सिथति को समझो – ‘ध्यानमूलं गुरोमूर्ति’, गुरूदेव के चित्र का ध्यान करते-करते, उनसे मांसिक सम्पर्क करते-करते, उनकी सिथति के, उनके निकट आ जाओ। गुरू की सिथति ज्यों समझेंगे, त्यों गुरू का उपदेश सफुरेगा। गुरू का उपदेश उनका अनुभव है, उनका हृदय है, गुरू का उपदेश उनकी सिथति है।

तीसरी बात, अविद्या मिटाने के लिए यतनशील रहो – अविद्यमान वस्तुओं को सत्य  समझने की जो बेवकूफी है उसको बोलते हैं अविद्या ।
       चरणदास गुरू किरपा कीनहीं ।
        उलट गयी मोरी नैन पुतरिया ।।
तात्पर्य संत चरणदासजी कहते हैं- गुरू ने कृपा कि तो मेरे देखने का नज़रिया बदल गया।
तन सुखाय पिंजर कियो, धरे रैन दिन ध्यान ।
तुलसी मिटे न वासना, बिना विचारे ज्ञान ।।
        ज्ञानी गुरू में सिथति किये बिना, तत्वगज्ञान का विचार किये बिना चाहे सौ साल की समाधि लगा दो लेकिन समाधि छूटी तो वही अविद्या और वही अज्ञान रहेगा ।
अतः अज्ञान को मिटाने के लिए यतनशील रहो।
      ये तीन सूत्रात्मक बातें हमारे जीवन में आ जायें तो बड़ा आराम हो जायेगा, इसी जन्म में अपना काम बन जायेगा, आत्मा में आराम हो जायेगा ।

हरि ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ….गुरूजी ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ….प्यारे जी ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ….. मेरे जी ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ …… ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ हा हा हा हा हा हा

यदि आप अपने कर्तव्य को पालते हो, यदि आप अपने धर्म का पालन करते हो; तो बाहरी सहायता और मदद की परवाह मत करो । वे अवश्य आपको मिलेंगी । लोगों को आपकी मदद करने के लिए विवश होना ही पड़ेगा ।

       

Ashram

सुख दुःख का सदुपयोग

मनुष्य जब दुःख का सदुपयोग करना सीख लेता है तो दुःख का कोई मूल्य नहीं रहता। जब सुख का सदुपयोग करने लगता है तब सुख का कोई मूल्य नहीं रहता। सदुपयोग करने से सुख-दुःख का प्रभाव क्षीण होने लगता है और सदुपयोग करने वाला उनसे बड़ा हो जाता है। उपयोग करने वाले का मूल्य बढ़ जाता है और उपयोग में आने वाली जड़ चीज का मूल्य कम हो जाता है। — पूज्य बापूजी

Hariom

Asharamji Ashram dwara hue Sewa karya

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू गुरुकुल, छिन्दवाडा के बच्चों ने गरीबो में गरम कपड़े, मिठाई, सत्साहित्य वितरन किया|

Asaramji

Sant Asharam Bapu ke satsang amrut

Chhayapurush ki sidhdi kar ke C. Sudarshan Maharaj himalay ke pahaado se anmol jadi butiyaa laakar jarurat mando ki sewa karanaa chahate the..unho ne om tat sat paramaatmane namah ye mantr jap chalu kiya…6 mahine me hone wali chhaya purush ki sidhdi un ki ..un ki tivr ekaagrataa ke karan kewal 15 din me ho gayi…lekin ye sidhdi un ko asali uddeshy jo aatmdev ka saakshatkar karane ka tha, us se door le janewali thi…to antaryami Isht-dev ne kaisi preranaa di ye apane anubhav kalyan mangazine me bataayaa tha… 119 more words

Asaramji