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Hanuman Jayanti - Glory of Hanuman

Full moon day of Chaitra Month (usually April), is the day when auspicious Hanuman Jayanti is celebrated.

The greatness of Lord Hanuman is no less than limit of Sky and his devotion to Lord Rama is even Boundless. 505 more words

Asharam

Dharmo Rakshati Rakshitah

धर्मो रक्षति रक्षित:  अर्थात् जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। इस वीडियो में ये बताया गया है कि कैसे श्री रामकृष्ण परमहंस जी की धर्म पत्नि माँ शारदाजी ने क्रूर डाकूओं से खुद की रक्षा की। केवल खुद की रक्षा ही नही की अपितु उन क्रूर लोगों का जीवन भी बदल दिया। ऐसे बड़े बड़े काम जो किसी बल से संभव नही होते वे भी धर्म के बल से संभव होते हैं। महाभारत युद्ध के आरंभ में जब भगवान अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दे चुके तब धर्मराज युधिष्ठिर रथ से उतरकर पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, कुलगुरु कृपाचार्य से आशीर्वाद लेने जाते हैं। उस समय उनको ‘ विजय भव:’  का आशीर्वाद भी देते है और पितामह भीष्म कहते हैं कि धर्मराज युधिष्ठिर तुमने अपने धर्म का पालन किया जिससे तुम्हारी विजय श्री निश्चित है। यदि तुम ये नही करते तो मैं तुम्हे शाप दे देता और तुम्हारी पराजय हो जाती। पाँडवो की विजय केवल शूरवीरता से नही हूुुई अन्यथा कौरव पक्ष में कोई कम शूरवीर नही थे। खुद भीष्मजी इच्छा मृत्यु वाले, द्रोणाचार्य अजेय, कृपाचार्य चिरंजीवी, अश्वत्थामा चिरंजीवी, कर्ण अभेद्य कवच कुंडल के रहते अजेय, दुर्योधन वज्रकाय और भी न जाने कितने शूरवीर थे। पाँडवो की विजय धर्म की विजय थी। जिसने अपने धर्म का पालन किया वे ही आखिरी विजेता हुए। भले दुर्योोधन की नांई थोड़े दिनो के लिए कोई सुख भोग ले लेकिन विजय तो धर्म का पालन करने वाले का ही होता है। अत: अपने धर्म पर अडिग रहें, अपने धर्म से विचलित न हो तो धर्म भी हमारी रक्षा करता है।

Asaramji

गरीबों के लिए पूज्य बापूजी की सहानुभूति !

 मुझे साम्राज्य की लालसा नहीं, मैं स्वर्ग भी नहीं चाहता ! मेरे जीवन की बस एक ही आकांक्षा है कि इस संसार के दुखी मनुष्यों के कष्टों का नाश कर दूँ !  32 more words

Asharam Bapu

Gyani Sada Anand me rahta hai - JI Maharaj

  1. Brahm gyani ki mahima
  2. Baalako ke saath baalak, raoiyon ke saath rasoiya, rajniyon ke asaath rajnitik,etc
  3. Par itna sab hone par bhi samajh te hain ki jagat kabhi hua nahi.
  4. 96 more words
Sant

उपदेशामृत पान करना है,तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए

एक बार एक स्वामी जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी, भीक्षा दे दे माते!!
घर से महिला बाहर आयी। उसनेउनकी झोली मे भिक्षा डाली और कहा, “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए!”
स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – भीक्षा दे दे माते!!
उस घर की स्त्री ने उस दिन खीर बनायीं थी, जिसमे बादाम- पिस्ते भी डाले थे, वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आयी। स्वामी जी ने अपना कमंडल आगे कर दिया।
वह स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ाहै।
उसके हाथ ठिठक गए। वह बोली, “महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है।”
स्वामीजी बोले, “हाँ, गन्दा तो है, किन्तु खीर इसमें डाल दो।”
स्त्री बोली, “नहीं महाराज,तब तो खीर ख़राब हो जायेगी । दीजिये यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ।”
स्वामीजी बोले, मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जायेगा, तभी खीर डालोगी न?” स्त्री ने कहा : “जी महाराज !”
स्वामीजी बोले, “मेरा भी यही उपदेश है। मन में जब तक चिन्ताओ का कूड़ा-कचरा और बुरे संस्करो का गोबर भरा है, तब तक उपदेशामृत का कोई लाभ न होगा।
यदि उपदेशामृत पान करना है,तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए, कुसंस्कारो का त्याग करना चाहिए, तभी सच्चे सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी।

Sanatan/Hindu Life

Growing Babies and Other Beautiful Creations

It’s been a fair few months since I crafted words on this wild & grace blogsite.

The October 2013 Pennie Brownlee workshops for parents and educarers saw the last of the wild & grace events for possibly or probably a year. 580 more words

Wellness & Happiness