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इक बार ज़रा फिर कह दो - Ik Baar Jara Fir Kah Do

फिल्मः बिन बादल बरसात (1963)
गायक/गायिकाः हेमंत कुमार, लता मंगेशकर
संगीतकारः हेमंत कुमार
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः विश्वजीत, आशा पारेख

इक बार ज़रा फिर कह दो

Romantic Song

चन्दन का पलना रेशम की डोरी - Chandan Ka Palna Resham Ki Dori

फिल्मः शबाब (1954)
गायक/गायिकाः हेमंत कुमार, लता मंगेशकर
संगीतकारः नौशाद
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः भारत भूषण, नूतन

संगीत है शक्ति ईश्वर की हर सुर में बसे हैं राम
रागी को सुनाये राग मधुर, रोगी को मिले आराम

चन्दन का पलना रेशम की डोरी
झूला झुलाऊँ निंदिया को तोरी
चन्दन का पलना …

सो जा तू ऐसे मोरी सजनिया
सो जा तू ऐसे मोरी सजनिया
सजिया पे सोये जैसे दुल्हनिया
चन्दा का टीका माथे लगाऊँ
तारों की माला तुझको पहनाऊँ
तारों की माला तुझको पहनाऊँ
तोहे सुलाऊँ गा गा के लोरी
झूला झूलाऊँ निंदिया को तोरी
चन्दन का पलना …

ऊँचे गगन से कोई बुलाये
लायीं हैं परियां डोला सजाये
सजन से मिलने दूर चली जा
उड़के तू निंदिया फुरर् चली जा
उड़के तू निंदिया फुरर् चली जा
चन्दा पुकारे आजा चकोरी
झूला झूलाऊँ निंदिया को तोरी
चन्दन का पलना …

Duet/Group Song

पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे - Piya Aiso Jiya Men Samay Gayo Re

फिल्मः साहब, बीवी और गुलाम (1962)
गायक/गायिकाः गीता दत्त
संगीतकारः हेमंत कुमार
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः गुरु दत्त, वहीदा रहमान

(पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
कि मैं तन मन की सुध बुध गवाँ बैठी) – 2
हर आहट पे समझी वो आय गयो रे
झट घूँघट में मुखड़ा छुपा बैठी
पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे …

(मोरे अंगना में जब पुरवय्या चली
मोरे द्वारे की खुल गई किवाड़ियां) – 2
ओ दैया! द्वारे की खुल गई किवाड़ियां
मैने जाना कि आ गये सांवरिया मोरे – 2
झट फूलन की सेजिया पे जा बैठी
पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे …

(मैने सिंदूर से माँग अपनी भरी
रूप सैयाँ के कारण सजाया) – 2
ओ मैने सैयाँ के कारण सजाया
इस दर से किसी की नज़र न लगे – 2
झट नैनन में कजरा लगा बैठी
पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे …

Solo Song

न जाओ सैंया छुड़ा के बैंया - Na Jao Saiyan Chhuda Ke Baiyan

फिल्मः साहब, बीवी और गुलाम (1962)
गायक/गायिकाः गीता दत्त
संगीतकारः हेमंत कुमार
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः मीना कुमारी, रहमान

न जाओ सैंया छुड़ा के बैंया
क़सम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी, रो पड़ूँगी
मचल रहा है सुहाग मेरा
जो तुम न हो तो, मैं क्या करूँगी, क्या करूँगी

ये बिखरी ज़ुल्फ़ें ये घुलता कजरा
ये महकी चुनरी ये मन की मदिरा
ये सब तुम्हारे लिये है प्रीतम
मैं आज तुम को न जाने दूँगी, जाने न दूँगि

मैं तुम्हरी दासी जनम की प्यासी
तुम्ही हो मेरा सिंगार प्रीतम
तुम्हारी रस्ते की धूल ले कर
मैं माँग अपनी सदा भरूँगी, सदा भरूँगी

जो मुझ से अखियाँ चुरा रहे हो
तो मेरी इतनी अरज भी सुन लो
पिया ये मेरी अरज भी सुन लो
तुम्हारी क़दमों में आ गयी हूँ
यहीं जियूँगी यहीं मरूँगी, यहीं मरूँगी

Solo Song

जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए - Jab Jaag Uthe Armaan

फिल्मः बिन बादल बरसात (1963)
गायक/गायिकाः हेमंत कुमार
संगीतकारः हेमंत कुमार
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः विश्वजीत, आशा पारेख

जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए
हो घर में हसीं मेहमां तो कैसे नींद आए, नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

(ये रात ये दिल की धड़कन ये बढ़ती हुई बेताबी
इक जाम की खातिर जैसे बेचैन हो कोई शराबी) – 2
शोलों में गिरी हो जान तो कैसे नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

(नज़दीक बहुत है मंज़िल फिर भी है ग़ज़ब की दूरी
ऐ दिल ये तू ही बतला दे ये कौन सी है मजबूरी) – 2
जब सोच में हो इनसां तो कैसे नींद आए

हो घर में हसीं मेहमां तो कैसे नींद आये, नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

Solo Song

दिल लगाकर हम ये समझे, ज़िंदगी क्या चीज़ है - Dil Lagakar Hum Ye Samjhe

फिल्मः ज़िंदगी और मौत (1965)
गायक/गायिकाः महेंद्र कपूर
संगीतकारः सी. रामचंद्र
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः प्रदीप कुमार

दिल लगाकर हम ये समझे, ज़िंदगी क्या चीज़ है
इश्क़ कहतें हैं किसे और, आशिक़ी क्या चीज़ है

हाय ये रुख़सार के शोले, ये बाहें मर्मरी
आपसे मिलकर ये दो बातें, समझ में आ गईं
धूप किसका नाम है और चाँदनी क्या चीज़ है

आपकी शोख़ी ने क्या-क्या, रूप दिखलाए हमें
आपकी आँखों ने क्या-क्या, जाम पिलवाए हमें
होश खो बैठे तो जाना, बेख़ुदी क्या चीज़ है

आपकी राहों में जबसे हमने रखा है क़दम -2
हमको ये महसूस होता है कि हैं मंज़िल पे हम
कोई क्या जाने मोहब्बत की खुशी क्या चीज़ है

Solo Song

इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के - Insaf Ki dagar Pe

फिल्मः गंगा-जमुना (1961)
गायक/गायिकाः हेमंत कुमार
संगीतकारः नौशाद
गीतकारः शकील बदायूंनी
कलाकारः

इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के

दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहना
सच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के
इन्साफ़ की …

अपने हों या पराए सबके लिये हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा हरगिज़ न डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं चलना सम्भल-सम्भल के
इन्साफ़ की …

इन्सानियत के सर पर इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन भी भेंट देकर भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जल के,
इन्साफ़ की …

Solo Song