“मंजिल” मंजिल मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए फिर साया मेरा देके दगा चल दिया किधर हम आईने को तकते रहे जाने किस लिए दिलदार ने भुला दिया पर हमने उसको यूँ… more →
"Na sur hai na taal hai bus bhav hain or junoon hai"krsnakhandelwal wrote 4 months ago: Wo pardaa hattatey hain, Par nakkab nahin hataatey, Sach boltey hain aisey ke, Jhooth ko tarzeeh mil … more →
limit wrote 1 year ago: “मंजिल” मंजिल मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए फिर स … more →
limit wrote 1 year ago: सजा “सजा” आज ख़ुद को एक बेरहम सजा दी मैंने , एक तस्वीर थी तेरी वो जला दी मैंने तेरे वो ख … more →
limit wrote 1 year ago: कैसे भूल जाए जिन्दगी की ढलती शाम के , किसी चोराहे पर, तुमसे मुलाकात हो भी जाए… “वो दर् … more →
limit wrote 1 year ago: “फर्जे-इश्क “ बेजुबानी को मिले कुछ अल्फाज भी अगर होते पूछते कटती है क्यूँ आँखों ही आँखों … more →
limit wrote 1 year ago: “तलब” ख़ुद को आजमाने की एक ललक है , एक ग़ज़ल तुझ पे बनाने की तलब है… लफ्ज को फ़िर आ … more →
limit wrote 1 year ago: मेरे पास “मेरे पास” रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास, तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे … more →
limit wrote 1 year ago: “शबे-फुरकत” “शबे-फुरकत” ” शबे-फुरकत थी , “और” जख्म – … more →
limit wrote 1 year ago: “जूनून-ऐ-इश्क” “जूनून-ऐ-इश्क “ जूनून की बात निकली है तो मेरी बात भी सुन लो, … more →
limit wrote 1 year ago: “निगाहे-नाज़” “निगाहे-नाज़” बेज़ारी जान की थी या, किसी गम की गीरफ्तारी थी, अं … more →
limit wrote 1 year ago: फिर वही आतिशफिशानी कर रही उसकी अदा फिर वही मदिरा पिला डाली है उसके जाम ने ………. जब … more →
limit wrote 1 year ago: मेरे एहसास में तू रहती है, मेरे जज्बात में तू रहती है आँखों मे सपना की जगह मेरे ख़यालात में तू रहत … more →
limit wrote 1 year ago: “इल्जाम ले लो” “इल्जाम ले लो” ज़ब्त से कुछ काम ले लो, ख़ुद पे यह इल्जाम ले ल … more →
limit wrote 1 year ago: दर्द का वादा” जिंदगी का ना जाने मुझसे और तकाजा क्या है , इसके दामन से मेरे दर्द का और वादा क्य … more →
limit wrote 1 year ago: मैं” कलमों के टूटे ढेर थे मैं छेड़ता रहा, लफ्जों के हेर फेर ने समझा नहीं मुझे…. कच्ची थी … more →
limit wrote 1 year ago: काफी है “ वफ़ा का मेरी अब और क्या हसीं इनाम मिले मुझको, जिन्दगी भर दगाबाजी का सिर पे एक इल्जा … more →
limit wrote 1 year ago: “दर्द की गहराई में” “दर्द की गहराई में” “तुम मेरे साथ चलो” दर्द … more →
limit wrote 1 year ago: टीस लम्हा लम्हा तेरे साये को सीने से लगाया मैंने, दिल मे उठी टीस को आज फिर समझाया मैंने. खाव्ब बन कर … more →