” मन की ओस की गर्म बुँदे “ ” मन की ओस की गर्म बुँदे ” एक लम्हा जुदा होने से पहले, उँगलियों के पोरों के आखिरी स्पर्श का वही पे थम जाता तेरा एहसास बन मुझ में समा जा… more →
"Na sur hai na taal hai bus bhav hain or junoon hai"limit wrote 8 months ago: चंचल मन के कोने मे मधुर एहसास ने ली जब अंगडाई, रेशमी जज्बात का आँचल पर फैलाये देखो फलक फलक… … more →
limit wrote 8 months ago: “वादों के पुष्प” बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो मै आँचल यकीन का बिछाये उन्हें समेटती रह … more →
limit wrote 9 months ago: “झील को दर्पण बना “रात के स्वर्णिम पहर में झील को दर्पण बना चाँद जब बादलो से निकल श्रृं … more →
limit wrote 1 year ago: “बिलखता दर्दाना” हर स्वप्न एक बिलखता दर्दाना हुआ, वक्त के छलावे से अपना याराना हुआ.. रूह … more →
limit wrote 1 year ago: “दिले-नामा-ए-बय” इस दिल का दोगे साथ, कहाँ तक, ये तय करो ! फिर इसके बाद दर्ज, दिले-नामा … more →
limit wrote 1 year ago: “दर्द हूँ मैं “ अश्कों से नहाया, लहू से श्रृंगार हुआ, सांसों की देहलीज पर कदम रख, धडकन … more →
limit wrote 1 year ago: “खामोश सी रात” सांवली कुछ खामोश सी रात, सन्नाटे की चादर मे लिपटी, उनींदी आँखों मे कुछ सा … more →
limit wrote 1 year ago: “भ्रम” कल्पना की सतह पर आकर थमा, अनजान सा किसका चेहरा है….. शब्जाल से बुनकर बेजुबा … more →
limit wrote 1 year ago: “जिन्दगी” जीने का फकत एक बहाना तलाश करती ये जिन्दगी, अनचाही किसकी बातें बेशुमार करती ये … more →
limit wrote 1 year ago: “वीरानो मे” खामोश से वीरानो मे, साया पनाह ढूंढा करे, गुमसुम सी राह न जाने, किन कदमो का न … more →
limit wrote 1 year ago: “प्रेमी “ दिन को परेशान , रात को हैरान किया करते हैं, नियाजमन्द ख़ुद ही ख़ुद पे बेदाद … more →
limit wrote 1 year ago: “दिल” मुहब्बत से रहता है सरशार ये दिल, सुबह शाम करता है बस प्यार ये दिल. कहाँ खो गया ख़ु … more →
limit wrote 1 year ago: तेरा ख्याल तेरा ख्याल था जेहन मे या नाम लबों पर, आँखों की नमी को तब्दील मुस्कान कर गयी … more →
limit wrote 1 year ago: इन्तहा-ऐ-मोहब्बत इन्तहा-ऐ-मोहब्बत में , सहरा मे बसर हो जाएगा… ये असरा-ऐ-जूनून लेकर , की वो दरि … more →
limit wrote 1 year ago: “दम -ऐ -फिराक” दम -ऐ -फिराक मे निकली थी जान मेरी , फ़िर क्यूँ लिखी गईं सजाएं नाम पे तेर … more →
limit wrote 1 year ago: हवा ये हवा कुछ ख़ास है, जो तेरे आस पास है, मुझे छू, मेरा एहसास कराने चली आई ये हवा। सारी रात मेरे साथ … more →
limit wrote 1 year ago: ‘दो फूल’ मेरी कब्र पे दो फूल रोज आकर चढाते हैं वो, हाय , इस कदर क्यों मुझे तडपाते हैं … more →
limit wrote 1 year ago: “सवाल” जवाब न बना , रहा एक उलझा सा सवाल बनके , बहता रहा मुझमे वो हर लम्हा दर्द-ऐ-ख्याल … more →
limit wrote 1 year ago: “ज़ख्म -ऐ -दिल” ज़ख्म-ऐ-दिल दिखा नही सकते, तेरा खंजर चुभा हुआ होगा.. आज की रात जागते गुज … more →