‘तेरा आना और लौट जाना’ दो लफ्जों मे वो तेरा मुझे चाहना , गुजरते लम्हों मे मुझे ही दोहराना… आँखों के कोरों मे दबा छुपा के जो रखे, उन अश्कों मे अपनी पलकों को भिगो जाना… रूह का … more →
"Na sur hai na taal hai bus bhav hain or junoon hai"limit wrote 1 year ago: ‘तेरा आना और लौट जाना’ दो लफ्जों मे वो तेरा मुझे चाहना , गुजरते लम्हों मे मुझे ही दोहर … more →
limit wrote 1 year ago: “मंजिल” मंजिल मंजिल नहीं थी कोई मगर गामज़न हुए ख़ुद राह चुन के तेरी तमन्ना लिए हुए फिर स … more →
limit wrote 1 year ago: सजा “सजा” आज ख़ुद को एक बेरहम सजा दी मैंने , एक तस्वीर थी तेरी वो जला दी मैंने तेरे वो ख … more →
limit wrote 1 year ago: कैसे भूल जाए जिन्दगी की ढलती शाम के , किसी चोराहे पर, तुमसे मुलाकात हो भी जाए… “वो दर् … more →
limit wrote 1 year ago: “फर्जे-इश्क “ बेजुबानी को मिले कुछ अल्फाज भी अगर होते पूछते कटती है क्यूँ आँखों ही आँखों … more →
limit wrote 1 year ago: 9/22/2008 “तस्सली” “तस्सली” रात भर जागी आँखों को, ऐ काश वो तस्सली देता, … more →
limit wrote 1 year ago: “निगाहे-नाज़” “निगाहे-नाज़” बेज़ारी जान की थी या, किसी गम की गीरफ्तारी थी, अं … more →
limit wrote 1 year ago: फिर वही आतिशफिशानी कर रही उसकी अदा फिर वही मदिरा पिला डाली है उसके जाम ने ………. जब … more →
limit wrote 1 year ago: मेरे एहसास में तू रहती है, मेरे जज्बात में तू रहती है आँखों मे सपना की जगह मेरे ख़यालात में तू रहत … more →
limit wrote 1 year ago: “क्या हुआ जो ये रात, “कुछ” शिकवो शिकायतों के साथ गुजरी , क्या हुआ जो अगर ये रात, … more →
limit wrote 1 year ago: आप की यादों का काफिला, कुछ इस तरह से, मेरे साथ चलता है, ” की” आप से हर रोज मुलाकात हो … more →
limit wrote 1 year ago: “इल्जाम ले लो” “इल्जाम ले लो” ज़ब्त से कुछ काम ले लो, ख़ुद पे यह इल्जाम ले ल … more →
limit wrote 1 year ago: दर्द का वादा” जिंदगी का ना जाने मुझसे और तकाजा क्या है , इसके दामन से मेरे दर्द का और वादा क्य … more →
limit wrote 1 year ago: “कैसे करूं” “कैसे करूं” शब्दों मे बयान कैसे करूं , दर्दे दिल … more →
limit wrote 1 year ago: मैं” कलमों के टूटे ढेर थे मैं छेड़ता रहा, लफ्जों के हेर फेर ने समझा नहीं मुझे…. कच्ची थी … more →
limit wrote 1 year ago: काफी है “ वफ़ा का मेरी अब और क्या हसीं इनाम मिले मुझको, जिन्दगी भर दगाबाजी का सिर पे एक इल्जा … more →
limit wrote 1 year ago: “दर्द की गहराई में” “दर्द की गहराई में” “तुम मेरे साथ चलो” दर्द … more →
limit wrote 1 year ago: टीस लम्हा लम्हा तेरे साये को सीने से लगाया मैंने, दिल मे उठी टीस को आज फिर समझाया मैंने. खाव्ब बन कर … more →