” मन की ओस की गर्म बुँदे “ ” मन की ओस की गर्म बुँदे ” एक लम्हा जुदा होने से पहले, उँगलियों के पोरों के आखिरी स्पर्श का वही पे थम जाता तेरा एहसास बन मुझ में समा जा… more →
"Na sur hai na taal hai bus bhav hain or junoon hai"limit wrote 8 months ago: चंचल मन के कोने मे मधुर एहसास ने ली जब अंगडाई, रेशमी जज्बात का आँचल पर फैलाये देखो फलक फलक… … more →
udaywords wrote 8 months ago: Subhash Ghai is a Bollywood director. He has only one flop but all the remaining films are very succ … more →
limit wrote 1 year ago: ‘तेरा आना और लौट जाना’ दो लफ्जों मे वो तेरा मुझे चाहना , गुजरते लम्हों मे मुझे ही दोहर … more →
limit wrote 1 year ago: “इरादा” यूँ खफा हो के, मुहं मोड़ के जीने से अच्छा है…, आ एक दुसरे को छोड़ के जाने क … more →
limit wrote 1 year ago: 10/22/2008 ख्वाब ख्वाब बिलख्ती आँखों मे बसे ख्वाब कुछ यूँ टिमटिमाते हैं, गोया कांच के टुकड़े हैं जो आ … more →
rishta wrote 1 year ago: Lamhein bitaye unke saath, Unko sambhala hum karenge! Har nishaani unki, Savaara hum karenge! Rishta … more →
limit wrote 1 year ago: अमानत अमानत अमानत मे अब और खयानत ना की जाए , आहें-शरर -फीशां आज उन्हें लौटाई जाए… हिज्र-ऐ-यार … more →
limit wrote 1 year ago: सजा “सजा” आज ख़ुद को एक बेरहम सजा दी मैंने , एक तस्वीर थी तेरी वो जला दी मैंने तेरे वो ख … more →
limit wrote 1 year ago: “फर्जे-इश्क “ बेजुबानी को मिले कुछ अल्फाज भी अगर होते पूछते कटती है क्यूँ आँखों ही आँखों … more →
limit wrote 1 year ago: “तलब” ख़ुद को आजमाने की एक ललक है , एक ग़ज़ल तुझ पे बनाने की तलब है… लफ्ज को फ़िर आ … more →
limit wrote 1 year ago: “तेरी चाहत” “तेरी चाहत” तेरी हर अदा पे मुझे बस प्यार आता है, जब मेरे साथ तू … more →
limit wrote 1 year ago: मेरे पास “मेरे पास” रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास, तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे … more →
limit wrote 1 year ago: “शबे-फुरकत” “शबे-फुरकत” ” शबे-फुरकत थी , “और” जख्म – … more →
limit wrote 1 year ago: “जूनून-ऐ-इश्क” “जूनून-ऐ-इश्क “ जूनून की बात निकली है तो मेरी बात भी सुन लो, … more →
limit wrote 1 year ago: “अपलक” “अपलक” बिना झपकाए मैं, अपलक देखूं, तुम को देखने की, अपनी ललक देखूं … more →
limit wrote 1 year ago: तुम्हारी याद है एक तरफ़ तुम हो तुम्हारी याद है, दूसरी जानिब ये दुनिया है कोई बरबाद है, तीसरी जानिब क … more →
limit wrote 1 year ago: Thursday, September 18, 2008 खुदगर्ज उसकी खैरियत की ख़बर हो जाती मुझको, एक बार अगर मेरे हालत का जय … more →
limit wrote 1 year ago: “रश्क “ तबीयत की बेदिली के अंदाज पे, अब रश्क क्या करें ??? छोटी सी बात पे तोड़ के उनसे … more →
limit wrote 1 year ago: “दावा बेगुनाही का” दीवाना-ऐ-बेबाक को, ख्याल कहाँ दिले-तबाही का कूचा-ऐ-यार में शिरकत, … more →