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MTT 107

Like Abhimanyu, Julian Assange too seems to be in a Chakravyuha (Ecuadorian embassy) of Kurukshetra (United Kingdom) with no help coming.

Meaning of life in New era 

  1. It is annoying, working hard several hours a day even though you might not like it and having a little excuse in back of your mind to skip it to enjoy what you want to do.
  2. 173 more words

Namish Taneja's look in Swargini is revealed!

Namish Taneja, who was missing from Swaragini after the show took a leap of 6 months is back with a bang. The dashing actor will be seen in a new avatar and has already started shooting for his re-entry sequence. 91 more words

What's Happenin'

PADMAVYUHA

“Hoysaleshwara” is a temple built in 12th century by King Vishnuvardhana. This temple is dedicated to Hindu god Shiva. It was built in Halebidu (Karnataka state, India). 432 more words

Abhimanyu

क्या हम सब हैं अभिमन्यु हैं ? कीजिये गर्भस्थ शिशु से सम्वाद !

महाभारत के अभिमन्यु की कहानी हम सब बड़े अचरज से सुनते और सुनाते है |

इसमें अचरज क्या है ? यह कि उसने गर्भ में वह चक्रुव्यूह भेदना सीख लिया था  ?

Hindu

Is this the right investment?

Once again, I came across this question from an investor, “I have invested in such and such avenue. Is it the right decision?132 more words

Amit Trivedi

The proud Pishachas - an excerpt from my upcoming book -

an excerpt from my upcoming book Kurukshetra Yuddha part 2

गौरवान्वित निशाचर

रात्रि का अन्धकार बढ़ने लगा था। चहुँ ओर रणभूमि में फिर से निशाचर और हिंसक जीव जन्तु आ गए।

सियार, गिद्ध, कौव्वे, कुत्ते रणभूमि में फैलते चले गए। सभी पशु पहले मृत पड़े पशुओं पर टूट पड़े। जितने भी गजराजों, अश्वों के शव वहाँ पड़े थे वे सभी जन्तु उन शवों को घसीट घसीट कर खाने लगे। उन्होने उन शवों का रक्त और फिर वसा का भोग किया। फिर उन्होने मृत पशुओं की आँखें और फिर अन्तड़ियों को काटना आरम्भ किया। पशुओं का भक्षण करने वाले उन जानवरों ने अभी तक मृत पड़े योद्धाओं की ओर देखना आरम्भ नहीं किया उन्हे भय था कि अभी कोई योद्धा उठकर अपने शस्त्र उठा लेगा। उस रणभूमि में गिरा एक एक योद्धा महान्‌ था। वे उनके शवों की ओर आक्रमण करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। ये साहस तो कोई और ही जुटाएगा।

थोड़ी ही देर में निशाचर पिशाचों की टोली भी वहाँ आ गई। वे दिखने में बड़े भयानक थे। प्रतिदिन युद्ध समाप्त होने पर वे रणभूमि में आ जाते थे और मनुष्य के मांस का भक्षण करते थे। प्रातःकाल में सूर्योदय से पहले बहुत से ब्राह्मण ब्रह्मचारियों की टोलियां योद्धाओं के शव निकाल कर दूर ले जाया करती थी। इस कारण उनके पास समय केवल ब्रह्म मूहुर्त से पहले तक का ही होता था। प्रतिदिन इतने सारे योद्धा मारे जाते थे कि भोजन की कभी कमी ही नहीं हुई और ना ही समय की।

पिशाचों के आते ही वे हिंसक पशु घबराकर उनके लिए मार्ग बनाने लगे। एक बार वे पिशाच किसी योद्धा का मांस खाना आरम्भ करेंगे तो उन्हे यह विश्वास हो जाएगा कि वह योद्धा वास्तव में मारा गया है। उसके पश्चात्‌ ही वे वहाँ अपना मुँह मारेंगे।

किन्तु आज बात कुछ और थी। आज कोई भी पिशाच किसी भी मृत मनुष्य को पकड़कर नहीं खा रहा था। आज उन सभी पिशाचों में कोई और ही होड़ लगी हुई थी। सभी उन शवों के ढ़ेर में शवों को इधर उधर कर रहे थे मानो कुछ ढ़ूँढ़ रहें हों।

“मुझे मिल गयाऽऽऽ” अचानक एक पिशाच ने कहा और अन्य सभी पिशाच तुरन्त वहाँ पहुँच गए।

जब उस पिशाच ने शवों के ढ़ेर में से अभिमन्यु का शव खींच कर बाहर निकाला। उसके लम्बे बाल उसके मुख पर आ गए थे। उसका मुख अब मांस का एक लोथड़ा ही रह गया था। उसके हाथ पैर रक्त से भरे हुए थे। उसकी गदा उसके पास ही पड़ी थी। जो पिशाच उसका शव खींच कर बाहर निकाल रहा था उसके मुख पर एक अनोखा तेज सा आ गया मानो उसे कोई गड़ा धनकोष मिल गया हो।

“हे वीर अभिमन्यु“ उन निशाचरों ने एक साथ कहा “हमारा भी प्रणाम स्वीकार करो।“ कहते हुए सभी ने उसके शव के सामने हाथ जोड़ लिए।

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