Tags » Abhimanyu

Is this the right investment?

Once again, I came across this question from an investor, “I have invested in such and such avenue. Is it the right decision?132 more words

Amit

The proud Pishachas - an excerpt from my upcoming book -

an excerpt from my upcoming book Kurukshetra Yuddha part 2

गौरवान्वित निशाचर

रात्रि का अन्धकार बढ़ने लगा था। चहुँ ओर रणभूमि में फिर से निशाचर और हिंसक जीव जन्तु आ गए।

सियार, गिद्ध, कौव्वे, कुत्ते रणभूमि में फैलते चले गए। सभी पशु पहले मृत पड़े पशुओं पर टूट पड़े। जितने भी गजराजों, अश्वों के शव वहाँ पड़े थे वे सभी जन्तु उन शवों को घसीट घसीट कर खाने लगे। उन्होने उन शवों का रक्त और फिर वसा का भोग किया। फिर उन्होने मृत पशुओं की आँखें और फिर अन्तड़ियों को काटना आरम्भ किया। पशुओं का भक्षण करने वाले उन जानवरों ने अभी तक मृत पड़े योद्धाओं की ओर देखना आरम्भ नहीं किया उन्हे भय था कि अभी कोई योद्धा उठकर अपने शस्त्र उठा लेगा। उस रणभूमि में गिरा एक एक योद्धा महान्‌ था। वे उनके शवों की ओर आक्रमण करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। ये साहस तो कोई और ही जुटाएगा।

थोड़ी ही देर में निशाचर पिशाचों की टोली भी वहाँ आ गई। वे दिखने में बड़े भयानक थे। प्रतिदिन युद्ध समाप्त होने पर वे रणभूमि में आ जाते थे और मनुष्य के मांस का भक्षण करते थे। प्रातःकाल में सूर्योदय से पहले बहुत से ब्राह्मण ब्रह्मचारियों की टोलियां योद्धाओं के शव निकाल कर दूर ले जाया करती थी। इस कारण उनके पास समय केवल ब्रह्म मूहुर्त से पहले तक का ही होता था। प्रतिदिन इतने सारे योद्धा मारे जाते थे कि भोजन की कभी कमी ही नहीं हुई और ना ही समय की।

पिशाचों के आते ही वे हिंसक पशु घबराकर उनके लिए मार्ग बनाने लगे। एक बार वे पिशाच किसी योद्धा का मांस खाना आरम्भ करेंगे तो उन्हे यह विश्वास हो जाएगा कि वह योद्धा वास्तव में मारा गया है। उसके पश्चात्‌ ही वे वहाँ अपना मुँह मारेंगे।

किन्तु आज बात कुछ और थी। आज कोई भी पिशाच किसी भी मृत मनुष्य को पकड़कर नहीं खा रहा था। आज उन सभी पिशाचों में कोई और ही होड़ लगी हुई थी। सभी उन शवों के ढ़ेर में शवों को इधर उधर कर रहे थे मानो कुछ ढ़ूँढ़ रहें हों।

“मुझे मिल गयाऽऽऽ” अचानक एक पिशाच ने कहा और अन्य सभी पिशाच तुरन्त वहाँ पहुँच गए।

जब उस पिशाच ने शवों के ढ़ेर में से अभिमन्यु का शव खींच कर बाहर निकाला। उसके लम्बे बाल उसके मुख पर आ गए थे। उसका मुख अब मांस का एक लोथड़ा ही रह गया था। उसके हाथ पैर रक्त से भरे हुए थे। उसकी गदा उसके पास ही पड़ी थी। जो पिशाच उसका शव खींच कर बाहर निकाल रहा था उसके मुख पर एक अनोखा तेज सा आ गया मानो उसे कोई गड़ा धनकोष मिल गया हो।

“हे वीर अभिमन्यु“ उन निशाचरों ने एक साथ कहा “हमारा भी प्रणाम स्वीकार करो।“ कहते हुए सभी ने उसके शव के सामने हाथ जोड़ लिए।

Art

Abhimanyu

Abhimanyu was the son of Arjuna and his wife Subhadra. Subhadra is the sister of Krishna, the yogmaya potency of Lord Sri Krishna who appears alongwith his form of Sri Jagannath, the worshippable deity of Kaliyuga. 345 more words

Shubhpuja

Just like Abhimanyu (poem)

 just like abhimanyu

I – unborn baby,

listen to all worldly voices,

People were saying –

Save girl child, educate them..…

I don’t know wether I am a girl or boy. 56 more words

Lessons To Learn From Mahabharata Characters

Mahabharata is one of the greatest Hindu epics and there are numerous characters in it.

Every single character in the Mahabharata have a lesson for us. 1,076 more words

Krishna

Oh snap! Sanjay Gagnani's lost it!

Strange occurrences are happening with Sanjay Gagnani. The actor who was last seen in Dilli Wali Thakur Gurls as Abhimanyu Shekhawat, Has taken a complete 180 with his latest avatar. 120 more words

What's Happenin'

Abhimanyu

Twelve days of war had by then gone by
Thousands dead on the battlefield did lie
With Drona as the leader of the clan
The Kauravas hatched an evil plan… 905 more words

Poem