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Siesta

 

An old man catches a nap next to a fire lit for making tea

At Jageshwar there are a cluster of temples mostly dedicated to Shiv. 139 more words

Kumaon Trip

11N 12D

Best Time To Visit: October to April

Day 1: Arrival at Lucknow. Overnight Train to Tanakpur.

Day 2: Lohaghat Arrival.

Day 3: Pithoragarh… 23 more words

Travel

Nainital – The Lake District

Naintal is around 311 Km from Delhi, located in Kumaon region of Uttrakhand state. It is been always a weekend destination for Delhiites as it is most visited lake in India. 397 more words

Travel

Centuries Old Friendship

A stream flows by the Jageshwar Temple as it has been for centuries maintaining company to the temple and quenching the thirst of countless pilgrims. 163 more words

Mukteshwar - a must visit place!

When we started from Kathgodam on the curves of the beautiful mountains, it was a breathtaking view. Looking down in the valley made some butterflies dance in my stomach! 1,453 more words

Travel

Kasaar: Peace, the Bob Dylan - Vivekananda way | The Window Seat

I remember sitting on roof of a local general store in front of Kempty Falls, Mussoorie. As I chilled my spines off my final beer for the night, my mind began exploring for a next stay in Uttrakhand. 483 more words

गर्मी की छुट्टियां...

मुझे तो बस वो बचपन याद है,
जब गर्मी की छुट्टियों का मतलब सिर्फ गाँव होता था।
सोमनाथ के मेले से एक दिन पहले,
दिल्ली से बस पकड़कर सारा परिवार पहाड़ होता था।
बस अड्डे पहुँचते ही मेरी वो ज़िद्द,
चाचा चौधरी की किताबों के लिए कितना मैं रोता था।
सीटों को घेरने का हुनर बाहर हीे,
हर परिवार में ऐसा कोई न कोई छुपा रुस्तम होता था।
बस चलने का वो बेसब्री से इंतज़ार,
ग़ाज़ियाबाद पार कर खुली हवा का एहसास होता था।
रास्ते में भूख लगती थी सबको जब,
आलू की सब्जी और रोटी में भी गजब स्वाद होता था।
रामनगर से पकड़ना मासी की बस,
भतरोजखान पहुँचने तक मेरा बहुत बुरा हाल होता था।
खड़ा भी बहुत मुश्किल से हो पाना,
लेकिन रायता पकोड़ी खाने को बिल्कुल तैयार होता था।
भिक्यासेन से रामगंगा का बहना साथ,
भुमिया मंदिर देख मासी पहुँचने का एहसास होता था।
वो पुराने लकड़ी के पुल को पार करना,
अब तक बस घर पहुचने को हर कोई बेकरार होता था।
कच्चे टेड़े-मेडे रास्तों की खड़ी चढाई,
गाँव में परिवार के लोगों को भी हमारा इंतज़ार होता था।
चूल्हे की रोटी खेतों में भागना नदी में नहाना,
इन छोटी-छोटी बातों में ही दिन बिताना मज़ेदार होता था।
नानी के घर कुछ दिनों के लिए जाना,
ख़ास मेहमानों की तरह जहां अलग ही सतकार होता था।
पूरे दो महीनों की छुट्टियां बिता देना यूँ ही,
फिर याद आना स्कूल का काम ऐसा हर साल होता था।
अब कहाँ वैसी छुट्टियां और वो बचपन,
फ़िर भी दिल हर छुट्टी में पहाड़ जाने को बेकरार होता है।

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