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PRESS NOTE 8th December '17 CIVIL SOCIETY GROUPS OBJECT TO NOC PROCESS FOR PANSHESHWAR DAM BY DISTRICT ADMINISTRATION

(Scroll below for Hindi)

 

 

HOW CAN AFFECTED GIVE NOC WHEN THEY ARE IN THE DARK ABOUT THE PROJECT DETAILS AND THEIR RIGHTS UNDER VARIOUS LAWS?

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Press Release

प्रेस विज्ञप्ति 28/11/2017 पर्यावरण आकलन समिति ने अगली बैठक तक टाली स्वीकृति रुपाली गाड बांध पर और अध्ययन होगा किन्तु जनसुनवाई व अन्य गंभीर मुद्दों पर मौन घाटी का किया दौरा: प्रभावितों से छुपाया दौरा

उत्तराखंड में महाकाली नदी पर 315 मीटर ऊंचा पंचेश्वर व 95 मीटर ऊंचा रुपाली का बांध प्रस्तावित है. इस पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना की जनसुनवाईयों के आधार पर “नदी घाटी एवं जल विद्युत परियोजनाओं” पर बनी पर्यावरण आकलन समिति { EAC } ने 24 अक्टूबर को मात्र 1 घंटे से भी कम समय में दोनो बांधों में डूब रही हजारों हेक्टेयर जमीन और 40 हजार से ज्यादा परिवारों के भाग्य का फैसला कर लिया. 21 more words

Press Release

धार्मिक विरासत: बैजनाथ धाम मंदिर समूह


“बैजनाथ”– कौसानी से 16 किलोमीटर और बागेश्वर से 22 किलोमीटर पर स्थित यह मंदिर गोमती के हरियाली तट पर कत्यूर घाटी की खूबसूरत वादियों में स्थित है।

बैजनाथ मंदिर — इसका निर्माण ९वीं से १०वीं सदी में कराया गया था।


शिव, पार्वती और उनके पुत्र गणेश की मूर्तियां इस मंदिर के प्रमुख आकर्षण हैं।

इस मंदिर में अष्टधातु से बनी हुई दुनिया की एकमात्र सबसे पुरानी अलबेली,अनोखी और बेशकीमती शिव-पार्वती की combined (एकसाथ) मूर्ति है। तस्करों ने इसे कईं बार चुराने की कोशिश भी की है.जिसमें वे नाकाम रहे …सुरक्षा की वजह से अब इस मूर्ति को आम लोगों की पहुच से दूर रखा गया है….!!

इनके अलावा यहां कई बेशकीमती मूर्तियां हैं जिन्हें पुरातत्व विभाग की निगरानी में बैजनाथ मंदिर में संरक्षित रखा गया है।

यहां से सिर्फ 3 किलोमीटर पर कोटे की माई का मंदिर है। खूबसूरत मूर्ति की इस पूरे क्षेत्र के लोग श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं।

बागेश्वर जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक स्थल है बैजनाथ धाम। यह मंदिर बागेश्वर जिले के गरुड़ तहसील के अंतर्गत आता है और यह मंदिर गरुड़ से 02 किलोमीटर की दूरी पर गोमती नदी के किनारे पर स्थित है। बैजनाथ धाम एक ऐसा शिव धाम है। जहां शिव और पार्वती एक साथ विराजमान हैं। कहा जाता है कि शिव और पार्वती का विवाह इसी क्षेत्र हुआ था। जो व्यक्ति सच्चे मन से यहां भगवान शिव और पार्वती के दर्शन करने आता है। उसकी मन्नत निश्चित तौर पर पूरी होती है।

बैजनाथ मंदिर समूह के पास मिले शिलालेखों से स्पष्ट होता है कि बैजनाथ का नाम कत्यूरी शासनकाल में कार्तिकेयपुर था। वर्ष 1901 तक बैजनाथ छोटा सा गांव था। 12वीं सदी के आसपास कार्तिकेयपुर का नाम बैजनाथ पड़ा। बैजनाथ मंदिर समूह समुद्र सतह से 1130 मीटर की ऊंचाई पर गोमती नदी के किनारे स्थित है।


नागर शैली निर्मित यह प्राचीन मंदिर बैजनाथ और बैद्यनाथ नाम से विख्यात है। जिसमें मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। अन्य 17 गौड़ मंदिरों में केदारेश्वर, लक्ष्मीनारायण, तथा ब्राहगणी देवी प्रमुख है। मुख्य मंदिर का तल विन्यास पंचस्थ है, जिसके अग्र भाग में मंडप निर्मित है। मंदिर का शिखर पूर्व में नष्ट हो गया है। मंदिर समूह का प्रमुख आक र्षण सिस्ट से निर्मित देवी पार्वती की प्रतिमा है। जो अन्य 26 लघु मूर्तियों से सुशोभित है। वास्तु शैली के आधार पर मंदिर समूह की संरचना संभवत: 9वीं से 12वीं सदी के मध्य प्राचीन कार्तिकेयपुरम के कत्यूरी शासकों द्वारा की गई है। मंदिर में दर्शन को हर साल सैकड़ों सैलानी आते हैं। मुख्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान पार्वती की आदम कद मूर्ति जब सुबह सफाई होती है। आदमी उसमें अपनी शक्ल दर्पण की तरह देख सकता है। दीगर है कि यहां शिव और पार्वती की पूजा एक साथ होती है।

वर्षभर यहाँ पर्यटकों का आवागमन रहता है। भारत का स्विट्जर्लैंड कहा जाने वाला कौसानी बैजनाथ धाम के समीप है। कौसानी आने वाले पर्यटक बैजनाथ धाम में दर्शन हेतु अवश्य आते हैं। बैजनाथ धाम एक घाटी में होते हुए भी यहाँ से हिमाच्छादित नागाधिराज के दर्शन किये जा सकते हैं।

Development NOT Dams: Pancheshwar affected people demand

(Feature Image: Pancheshwar Temple at the confluence of Saryu and Kali Rivers. Pics: Bhim )

The people to be affected by the proposed Pancheshwar Multipurpose dam project are saying we need development NOT dam in ecologically sensitive Himalayan region.   2,249 more words

Dams

Day's Best Articles: August 12th, 2017

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The Democrats’ foolish family feud

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When winning isn’t possible

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