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रिश्ते

ये जो रिश्ते हैं ना

कुछ यूँ उलझ गए हैं जैसे अक्सर मुझसे स्वेटर बुनते हुए ऊन उलझ जाता है|

कई बार झुंझला कर तोड़ दिया,

In the hope of Third Level

Everyone travelling by Delhi Metro must have gone to Rajiv Chawk metro station at least once. There is a balcony to change platforms before check in, which is mostly used by security officials though it’s open for all. 656 more words

रंग

कुछ रिश्तों का कोई नाम नहीं होता
ये रिश्ते नाम के खाँचो में बिलकुल फिट नहीं होते
कभी दायें निकलते हैं
कभी बायें फैलते हैं
जो तुम इन्हें बाँधने की ज़िद पे आ जाओ
ये रिश्ते दायरों में अक्सर दम तोड़ देते हैं
ना हों जो ये रिश्ते तो ज़िन्दगी बेरंग होती है

समझना सच में चाहो गर इन्हें तो कुछ फ़र्ज़ यूँ कर लो,
की हर इक आदमी का अपना एक रंग होता है।
कोई गाढ़ा, कोई हल्का
मिज़ाजों के हिसाब से गर्म या ठंडा।

चुना है खुद के लिए मैंने झक्क सफ़ेद रंग
मैं हर रिश्ते में आसानी से ढल जो जाती हूँ

मिलेगा मुझको कोई लाल रंग का गर कभी
रिश्ते हमारे ख़ुद बा ख़ुद गुलाबी हो जायेंगे
जो दोस्त हों मेरे कुछ हलके हरे….पीले से
हमारी यारी फसलों के धानी रंग सी होगी
और
कोई जो मिल गया समझो काला रंग मन में लिए
स्लेटी तो कर ही सकती हूँ हमारी मुलाकातों को।

मुझे नामंज़ूर है अपना कोई भी रंग खोना

चलो ना
मान लें इसको, उसको, ये भी, वो भी
कभी मैं मान लूंगी बातें तुम्हारी सब,
कभी तुम भी समझना
सुनो ना,
इनको यूँ ही रहने दो ना!!

अपर्णा त्रिपाठी

8 Thottakkal - Movie review

Film opens with a murder, witnessed by Sathya a young orphan, working as a house hold. He is accused for the murder and sent to juvenile prison. 194 more words

Movie Review