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A typical shayari...

Recently, I watched a bollywood movie, the name I totally forgot. There was a scene where a boy conveys a girl in poetic mood.

Boy: 123 more words

Ashish Kumar

कुछ करते हैं ...

कुछ करते हैं |
ख्वाबों को हटा के |
ग़मों को भुला के |
नयी राह बना के |
ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
दुःख के पलों को चोर के |
अनचाही यादों को जला के |
किस्मत के मार को हरा के |
नयी रौशनी तलाशते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
दिल की आवाज़ सुन के |
दूसरों के दुखों को मिटा के |
अपने आप से बात कर के |
ज़िन्दगी का मज़ा लेते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
बिगड़ी किस्मत को बदल के |
ऐसी राह पकड़ते हैं |
तूफ़ान भी घबरा जाये |
ऐसा कुछ सोचते हैं |
मौसम के हर मिजाज को |
मुश्किलों को हरा के |
खुद पे भरोसा रख के |
विश्वास का दामन थाम के |
ज़िन्दगी से लरते हैं |
चलो कुछ करते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

– Ashish Kumar

Ashish Kumar

Unique Blogger Award...

Recently, one of my blogger friend POOJAG nominated me for the Unique Blogger Award. She is a versatile writer and writes in various genre like poems, quotations etc. 247 more words

Ashish Kumar

अच्छा लगता है.

वो तुम्हारा अचानक से चले जाना.
जाके फिर वापस आना.
नुका छुपी खेल के मुझे सतना.
मुझसे नाराज़ हो कर मुझे रुलाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

वो तुम्हारा गुस्से से मुस्कुराना.
दिल मे मेरे हमेशा के लिए बस जाना.
सुबह शाम होने का एहसास दिलाना.
हमेशा के लिए मेरा हो जाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

तुम्हारी धड़कानों मे मेरा होना.
होठों का अचानक से सिसकना.
दिल की बात दिल मे रखना.
ज़ुबान से कुछ ओर ही कहना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

छोर दिया है मैने सब कुछ.
तुम ही हो मेरा अब सब कुछ.
साथ ना छोड़ूँगा तुम्हारा.
बस मेरी हो के रहना.
वो तुम्हारा आँखों से इशारा करना.
कभी घूर के मुझे देखना.
तुमसे बात करना, तुम्हे सतना.
तुम्हारी यादों मे खोए रहना.
अच्छा लगता है.
अच्छा लगता है.

– Ashish Kumar

Ashish Kumar

Blog Anniversary - 6Years

Today is the 6th anniversary of my blog. I would like to thank everyone from bottom of my heart for supporting me in this journey. I will write and write till my last breath. 28 more words

Ashish Kumar

सच्चे दिल से |

कल तुम्हे देखा था मैने |
कुछ इस नज़र से |
जैसे चाहने लगा हूँ तुम्हे |
सच्चे दिल से |
तुम्हारे चेहरे से झलकती मासूमियत |
मुझे खींचती है तुम्हारी ओर |
तुम्हारे होठों का सिसकना |
मुझे ले जाता है तुम्हारी ओर |
भूल जाता हूँ मैं सारे ग़म |
मैं और तुम अब बन जाए “हम” |

चेहरे पे असमंजस है ,
पर दिल मे कुछ और है |
ज़बान कुछ कहती है ,
पर आँखों मे कुछ और ही है |
साफ झलकता है प्यार ,
तुम्हारी आँखों से |
होठों की कश्मकश वो बताती है,
जो महसूस करती हो तुम…
अपने दिल की धड़कनो मे |

जब तुम पास रहती हो,
अछा लगता है |
दूर जाने की बात करके तुम,
मुझे क्यूँ सताती हो |
रूको कहो अपने दिल की |
सुन लो कुछ…
मेरे भी दिल की |
तुम्हारी नज़र कहती है,
मैं तुम्हारा हूँ |
मैं कहता हूँ की…
तुम मेरी हो |
तुम चाहती हो इस कदर से |
पर रोकती हो दिल को अपनी ज़ुबान से |
अब खेलना बंद करो |
कहना है जो सो कह दो |
रोको न खुद को मुझसे |
क्यूंकी…
चाहता हूँ मैं तुम्हे |
सच्चे दिल से…
सच्चे दिल से…

– Ashish Kumar

Ashish Kumar