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Writing The Talk..II..

Howdy Readers,
I am back on the fourteenth day of continuous blogging. One more week left and after that, I will come occasionally.

Today I will be writing another discussion with my believer friend. 486 more words

Personal Thoughts

Peace be upon us all

I had the opportunity to have a thorough run through of the 10 commandments and how they relate to my life. I very much enjoy being able to explore my spiritual beliefs or lack there of. 1,238 more words

Till the Lesson be Learned

Cogitating once again on these wise words from Margaret Fuller:

“All around us lies what we neither understand nor use.  Our capacities, our instincts for this our present sphere are but half developed.  

76 more words
Chaplain

नास्तिक

अनुज स्कूल से लौटता है तो औरतें सर पूचकारती हैं, गाल सहलाती हैं.. घुमा फिरा कर एक ही बात कहती हैं.
‘ बेटा तू अब बड़ा हो गया है. तुझे ही ध्यान रखना पड़ेगा. सब समझा कर थक गये. मरने वाले के साथ कोई मरा है क्या?’
अनुज की मम्मी को मरे आज १५ दिन हो गये. महेंद्र ने जीना ही छोड़ दिया है. सारे दिन शून्य में देखता है या फिर टीवी ऑन करके आँख मूंद कर पड़ा रहता है.
अनुज १५ दिन में सचमुच बड़ा हो गया है. पापा का हाथ पकड़ कर उठा देता है.
‘ लो ब्रश करो पहले.’ शेविंग किट हाथ में थमा कर खड़ा रहता है जब तक महेंद्र उठ कर बाथ रूम नहीं जाता.
अनुज को ऐसा करते देख प्रिया का चेहरा सामने आ जाता है. आँखों में नमी सी उभरती है और कोरों में चली जाती है. महेंद्र जानता है उसे ऐसा नहीं करना चाहिए, पर बेबस है.
अनुज अचानक बड़ों सी बातें करने लगा है.
‘ पापा आज मम्मी होती तो आपको ऐसे देख कर कितना दुखी होती.’
‘ आपको याद नहीं मम्मी ने आपको और मुझे आई सी यू में बुलाकर क्या कहा था?’
कभी कभी पापा को ऐसे देख अनुज चिढ़ कर चिल्लाता है, ” मैं दस साल का बच्चा हूँ, पर मुझे भी पता है कि मम्मी अब लौट कर नहीं आएँगी.”
महेंद्र उसको गले से लगा कर आँखें ज़ोर से भींच लेता हैं. आँसू रोके रखता है, पर गले में धुआँ सा भर जाता है.
सब को पता है, महेंद्र नास्तिक है. जब प्रिया की बचने की कोई उम्मीद नहीं थी तब भी भगवान की शरण नहीं गया था.
चलो उसकी अपनी सोच है. पर ज़िंदगी तो सबको एक लाठी से हाँकती है . आगे तो चलो. वरना फिर उसके अपने तरीके हैं.
अनुज को एक रात तेज बुखार आ गया. बदन भट्टी सा तपने लगा.बहकी बहकी बातें करने लगा. बर्फ की पट्टियों से भी फ़र्क नहीं पड़ रहा था. प्रिया का चेहरा महेंद्र की आँखों में तैरने लगा.
वह रात को ही मंदिर की तरफ भागा. मूर्ति के सामने खड़े होकर चिल्लाने लगा, ” मैं तुझे नहीं मानता. मेरा दिमाग़ कहता है तू नहीं है. ले फिर भी मैं तुझे मानता हूँ. मैं मनुष्य हूँ. मेरा प्यार मेरे लिए सब सच्चाइयों से बड़ा है. मैंने अपनी प्रिया को खो दिया और अब… ले मैं वादा करता हूँ मैं अंतिम दिन तक तेरी पूजा करूँगा.. चाहे मैं तुझे मानूं या नहीं मानूं.
वह मंदिर की चौखट पर सर रख कर बिलख बिलख कर रोया.
घर आया तो अनुज का बुखार हल्का हो गया था.
दूसरे दिन से लोगों ने एक अलग ही महेंद्र देखा. हंसता, बोलता, रोज़ मंदिर जाता.
सब का कहना है- ‘उसकी लीला है यह. सबको मानना पड़ता है एक दिन.’

India

The Big Green Box

The Big Green Box (graphic)

I’m not sure, but this handy little graphic may assist conversations with Supernaturalists.    The Big Green Box is the Universe, Nature, Everything, the ALL. 99 more words

Chaplain

Lost Gourd

Spurgeon said, “Like Jonah, you may lose your gourd, but you cannot lose your God.” The atheist has lost his “gourd” but God still is.

– Pastor Ward Clinton