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O chandrma tu bada man ka kathor hai

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Yearwise Breakup Of Songs

● जमनी ● 

हिमाचल की पहाड़ियों के मघ्य पुरातत्व महत्व की खोजबीन और खुदाई चल रही थी | राकेश नागर उस सर्वेक्षण का प्रभारी अधिकारी था |

यह कार्य राकेश ने सिफारिश लगवा कर लिया था क्योंकि इसके बिलकुल पास ही उसका गांव था निम्बर , जहां उसका बचपन और लड़कपन बीता था | बीते तीस साल में वो वहां पर एक बार भी नहीं गया था | और जाता भी क्यों उसका वहां अब था ही कोई नहीं ..बस बीते वक्त को फिर से जीने की चाह में चला आया था | आज पूरा गांव घूम कर आया था ..वैसा ही था अब भी , कोई शहर की हवा नहीं लग पाई थी ..उसका मकान खण्डहर हुआ पड़ा था और मोहन का मकान तो टीले सा नज़र आ रहा था | मोहन के मकान के टीले पर वो चढ़ कर कितनी ही देर बैठा रहा | मोहन की माँ ने जब उसे और मोहन को पकड़ कर बेंत से पिटाई की थी तो उसके मन में बहुत गुस्सा आया था , पीटना ही था तो अपने बेटे को ही पीटती ..भला पड़ौस के बच्चों की पिटाई की जाती है इस तरह ..तब उसकी सोच में मोहन की माँ जमनी बहुत गन्दी औरत थी | समय के साथ साथ सोच बदलती गई ..वो उसे प्यार भी तो उतना ही करती थी जितना मोहन को | एक बार सेबों के बगीचे वाली फुल्लो ताई ने उन्हें जब शरारत करते पकड़ लिया था और अपने बेटे घीसू की पिटाई की लेकिन उसे हाथ भी नहीं लगाया और दुत्कार कर भगा दिया तब जमनी काकी का अपनत्व समझ आया था | उसकी खुद की माँ तो कभी की गुजर गई थी , उसे शक्ल भी याद नहीं थी, लेकिन उसके हृदय में माँ वाला खाँचा कभी खाली नहीं रहा था क्योंकि वहाँ जमनी काकी रहने लगी थी , उसकी नज़र में अत्यंत सुंदर ..नाक चपटी सी पर… सुंदर , रूखे बाल पर ..सुंदर , चेहरे पर भद्दा सा मस्सा पर..

Story

● वो मर गया ●

बापू के एक गरुड़ पुराण अच्छा वाला आया

बड़ी स्कूल में दाखिला करवा दिया

पर उस ने जब टिफिन खोला तो

अचार रोटी को देख

Story

● आंसू ●

वो दीवाली का दिन था |

पिछले दो दिन और एक रात मेहनत करके उसने वो लकड़ी का दरवाजा बनाया था | सामान्यतया वो भी अमावस्या की छुट्टी ही रखता था लेकिन एक तो सेठ श्रीनाथ जी की पुत्र वधु ने कहा था कि ऊपर से बिल्ली आ जाती है इस लिए सीढ़ियों का यह दरवाजा दीवाली तक हर हाल में बन जाना चाहिए और दूसरा उसे दीवाली को रुपयों की सख्त जरूरत थी |

कहानी

​● उपहार ●

तुम्हारे बदन का इत्र
जो कभी महकता था

वो तुम्हारे पिता के

पसीने की सुगंध थी

तुम्हारी अय्याशियां

मौज मस्तियाँ

तुम्हारे बच्चों की

दुश्वारियों की दुर्गन्ध थी

वो भी एक उपहार था

यह भी एक उपहार था

Vyas

​● अर्धांगिनी ●

“अब क्या कहें ..हें हें हें .. कहाँ त्रिवेदी साहब आप और कहां हमारी बहन..यह तो आपके पिताजी का बड़प्पन था कि उन्होंने यह रिश्ता स्वीकार कर लिया वर्ना आपकी पढ़ाई लिखाई और रुतबे के सामने हमारी गुड्डू तो निपट गंवार है जी बिलकुल फूहड़ ..”
“माफ़ कीजिएगा भाईसाहब .. इस तरह की बात मैं भविष्य में नहीं सुनूँगा ..कल तक वो सिर्फ आपके घर की बेटी थी.. आप कुछ भी कह सकते थे ..अब वो जैसी भी है, मेरी पत्नी है मिसेज आभा ऋषिराज त्रिवेदी ..जरा इज्जत दे कर बात कीजिएगा ..”

Story

●कूलर काण्ड●

यह 2010 की गर्मियों का एक आम सा दिन था |
सेठिया जी मेरे निवास पर जन्मपत्री दिखाने आए हुए थे | मैं मनन कर रहा था ..

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