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जब तक तुम्हें यह खत मिलेगा, मैं दूर मंजिल की ओर जा चुका होऊँगा

सांडर्स की हत्या के बाद भगत सिंह कलकत्ता चले गए। शहीद भगवतीचरण वोहरा की विधवा दुर्गा भाभी ने अपने छोटे बच्चे के साथ खतरे मोल लेकर भगत सिंह की कलकत्ता पहुँचने में मदद की।

Literature

Guest Post #2. She spoke, no more.  

Here is the second Guest Post on the blog by Mohammed Asif Khan. A poem on the silence of women and their struggle to speak; the struggle to express. 193 more words

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​Tears of Jehlum. 

#Blog #Bloggers #Indianpoetry #Poems_of_India#Kashmir #Kashmirvalley #Kashmirsiege #Jhelum #Poetry #Poems #Azadi
The hardened calloused hands, hammer

the windows shut.

The stalls are empty, stools overturned, broken cups… 196 more words

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शायद मेरी रचना प्रकृति ने घूमने के लिए की है, अकेले घूमने के लिए

घूमने-फिरने के बारे में कई सारे मिथक गढ़कर हमें डराया जाता है। रोकने के लिए समाज में बहुत सारी बाधाएँ खड़ी कर दी जाती हैं। अकेले घूमने वाली लड़कियों को एक अलग नज़र से देखते हैं लोग। अनुराधा बेनीवाल का बहुचर्चित यात्रा-वृतान्त ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ हमें बहुत तार्किक ढंग से बताता है कि जब हमारे अंदर आत्मविश्वास आ जाता है तो फिर इन बाधाओं से आसानी से पार पा लेते हैं। ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ से पढ़िए यह अंश- 31 more words

Literature

20 Kashmir separatists, 200 plush properties and a sham called 'Azadi'

20 separatists from Kashmir are under the radar of the National Investigation Agency. 200 plush properties on prime land in different parts of the country owned by them are also under the radar of the NIA. 15 more words

Vicky Nanjappa

10 Things India Still Needs AZADI from

We have recently stepped in the 71st Independence day of India, but still, there are a few things in our nation which demand our attention. No, I am not talking about fighting with other countries or dealing with problems like terrorism, but about those which we have been neglecting for a while. 838 more words

Kuch Baat hai ki, Hasti Mitati nahi hamari!!!

यूनान मिस्र रोम सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नामो निशा हमारा| कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी | सदियों रहा है, दुश्मन दौरे जहां हमारा || 

कुछ तो बात जरूर है की हम फर्श से हर्ष की तरफ लगातार बढ  रहे है | जब से मै याद कर सकता हूँ मुझे अपने इस देश पर गर्व से कम तो कुछ भी महसूस नहीं हुआ| हमे अभिमान होना चाहिए की की इस देश की मिट्टी से हम भी बने है | 
राज रजवाड़ो की जागीर से हम आज एक देश बन चुके है | पोलियो मुक्त एशिआ का बड़ा देश होने से लेके, दुनिया का सबसे पहला किफायती और सबल मंगलयान उड़ाने तक का गौरव हम पा चुके है | विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा हमारे देश में होता है,दुनिया का कोई ऐसा धर्म नहीं जिसे इस देश में सहेजा न गया हो | हम सोने की चिड़िया भले न रहे हो पर कोहिनूर आज भी हमारा है | हमे दुनिया में कही भी जाने क लिए भले ही वीसा की जरूरत हो, पर नेविगेशन का तरीका दुनिया को हमने दिया | दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति हम भले न बन पाये पर थोरियम का सबसे बड़ा भण्डार हमारे पास है जो विकसित से विकसित देश को कल हमारे तरफ झुकने क लिए विवश कर देगा | हम दुनिया की सबसे महंगी कार नहीं खरीदते पर उसकी दर्जन भर कारे शहर का कचरा उठाने वाले विभाग को दान कर देते है | इंसान के शरीर को चीर कर उसका इलाज करना हमने तब सिख लिया था,जब शायद दुनिया लोहे के हथियार बनाना  सिख रही थी | और ज्यादा आसान भाषा में कहे जो सबको समझ में आये तो इस दुनिया को ज़ीरो भी होने ही दिया | 

आज हम २०१७ में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई शक्ति है ,पर इसमें हमारा योगदान देखा जाए तो क्या है ? हमे तो ठीक से देश का राष्ट्रगान भी याद नहीं होगा,सिनेमा घरो में बज जाए तो भी हमे घुटन होती है, हमारी व्यक्तिगत सोच और आज़ादी पर हमला लगता है |हम अचानक से नेशनल हॉलीडेज पर देशभक्त हो जाते है ,”तेरी राहो पे जान तक लुटा जायेंगे”  ये गाने वाले ढंग से अपना टैक्स भी नहीं भरते | तीन रंग के गुब्बारे फुलाते है ,सफ़ेद, हरे और केसरिया रंग के ब्रांडेड कपडे पहनते है, अज़्ज़ादी डे मानते है,गाल पर तिरंगा लगाते है और दो चार फ़िल्मी गीत गाकर अपनी आज़ादी की किश्त पूरी कर देते है | 

१६ ऑगस्ट को हम फिर अपनी स्वार्थी जिंदगी को हर चीज़ का पैमाना बना लेते है,इन्सानित को सड़क पर मरता देखकर हम युहीं गुजर जाते है, ये भूलकर की कल १५ अगस्त तो इसका भी रहा होगा,जिस देश क लिए हम कल जान लुटा रहे थे ये भी उसी देश काबेटा है, अज़ाद तो वो बच्चा या बच्ची भी है जो आपके झूठे बर्तन साफ़ कर रहे है आपके घर में,पर बाल मजदूरी का मतलब मजबूर की मदत हो जाती है ,बिजली चोरी झंझट की बचत,रिश्वत देना समय की बचत,सड़क पर कचरा फेकना हमारा हक़,ट्रैफिक रूल्स तोडना हमारी मजबूरी,दहेज़ लेना हमारी परंपरा और हम अपनी साहूलियत के हिसाब से देश हित में कोई भी काम करने से कम से कम एक साल तक मुक्ति पा लेते है | चाहे सफाई हो, भ्रष्ट्राचार हो ,क़ानून हो या क़ानून का उलंघन हो , जब तक मुझे तकलीफ नहीं तब तक देश आज़ाद है पर मेरा नाखून भी टूटा तो अज़ादी अचानक खतरे में आ जाती है | 

जब तब देश के आखिरी इंसान तक शिक्षा का अवसर नहीं पहुँचता, आखिरी भूके तक तीन वक़्त की रोटी नहीं पहुँचती,बराबरी से आगे बढ़ने की सहूलियत नहीं मिलती, हम किस मुँह से कह सकते है की “सारे जहा से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा”|| और सबसे अच्छा हुआ तो भी किस काम का जब की अपने ही देश में कही कोई बिना खाये सो रहा हो,कोई मजबूर समाज के सबलो क नीचे अपनी आन बिछा रहा हो,२१वी  सदी के इस देश में जातिवाद,धर्मवाद और रईसी का बोलबाला हो | हमे आज़ादी सिर्फ गैर लोगो से ही नहीं मिली थी हमे आज़ादी मिली थी अपने अंदर ही बसी गलत नीतियों से,समाज में फैले अन्याय से,विचारो की गुलामी से,रूढ़िवादी प्रथा से|  

तिरंगा पहराइये शान से,इस देश की मिटटी को माथे लगयाइये,नाचिये, गाईये भले फ़िल्मी गांनो की धुन पर या देशभक्ति तरानो पर, पर इतना याद रखिये की ये आज़ादी हमे सिर्फ एक दिन क लिए नहीं मिली थी, इसका मजा तब ही है जब हम इसे हम अपने रोज में मनाये,मन से माने की ये देश हमारा है,इसके लिए हमारे जैसे कितने मिट गए जिनका नाम तक नहीं पता हमे,उनको याद करे,हम भगत सिंह नहीं हो सकते , गांधी नहीं हो सकते,विवेकानन्द की तरह  दुनिया में इस देश को मान नहीं दिला सकते पर अगर चाहे तो इस परंपरा को विश्व क आखरी कोने तक पंहुचा सकते है अपने कृत्यों द्वारा जो किये बिना बस अपने अधिकारों क लिए रोज लड़ते मरते रहते है हम|

आज़ादी मुबारक !!!