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तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं - Tumhare Hain Tumse Daya (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़, रतन कुमार

तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं
तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं
तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं
तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं

यतीमों की दुनिया में हरदम अंधेरा
यतीमों की दुनिया में हरदम अंधेरा
इधार भूल कर भी न आया सवेरा
इधार भूल कर भी न आया सवेरा
इसी शाम को एक पल भर जले जो
इसी शाम को एक पल भर जले जो
हम आशा का ऐसा दिया माँगते हैं …

थे हम जिनकी आँखों के चंचल सितारें
थे हम जिनकी आँखों के चंचल सितारें
हमें छोड़ वो इस जहाँ से सिधारे
हमें छोड़ वो इस जहाँ से सिधारे
किसीकी न हो जैसी क़िसमत है अपनी
किसीकी न हो जैसी क़िसमत है अपनी
दुखी दिल सभी का भला माँगते हैं …

बचा हो जो रोती क टुकड़ा दिला दो
बचा हो जो रोती क टुकड़ा दिला दो
(जो उतरा हो तन से वो कपड़ा दिलादो) – 2

1950s

ठहर ज़रा ओ जानेवाले - Thahar Jara O Janewale (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, मन्ना डे, मधुबाला झवेरी
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़, रतन कुमार

(ठहर ज़रा ओ जानेवाले) – 2
बबु मिस्टर गोरे काले
कब से बैठे आस लगाए
हम मतवाले पालिशवाले
ठहर ज़रा ओ जानेवाले
बबु मिस्टर गोरे काले
कब से बैठे आस लगाए
हम मतवाले पालिशवाले …

ये काली पालिश एक आना
ये ब्राऊन पालिश एक आना
जूते का मालिश एक आना
हर माल मिलेगा एक आना
न ब्लैस्म न पाखौड़ी है
न पगड़ी है न चोरी
छोटी सी दुकान लगाए
हम मतवाले पालिशवाले …

मेहनत का फल मिठा मिठा
हाँ भै हाँ रे
भाग किसीका रूठा झूठा
ना भै ना रे
मेहनत की एक रूखी रोटी
हाँ भै हाँ रे
और मुफ़त की दुध मलाई
ना भै ना रे
लालच जो फोकट की खाए
लालच जो हराम की खाए
हम मतवाले पालिशवाले …

पंडित जी मंतर पड़ते हैं
वो गंगा जी नहलाते हैं
हम पेट का मंतर पड़ते है
जूते का मुह चमकाते है
पंडित को पाँच चवन्नी है
हम को तो एक इकन्नी है
फिर भेद भाव ये कैसा है
जब सब का प्यारा पैसा है
ऊँच नीच कुछ समझ न पाए
हम मतवाले पालिशवाले …

1950s

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है - Nanhe Munne Bachche (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़, रतन कुमार

(नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है) – 2
मुट्ठी में है तक़दीर हमारी
मुट्ठी में है तक़दीर हमारी
हम ने क़िस्मत को बस में किया है
हम ने क़िस्मत को बस में किया है
(भोली भली मतवाली आँखों में क्या है) – 2
आँखो में झूमे उम्मीदों की दिवाली
आँखो में झूमें उम्मीदों की दिवाली
आनेवाली दुनिया का सपना सजा है
आनेवाली दुनिया का सपना सजा है …

(भीख में जो मोती मिले लोगे या न लोगे
ज़िंदगी के आँसूओं का बोलो क्या करोगे) – 2
भीख में जो मोती मिले तो भी हम ना लेंगे
भीख में जो मोती मिले तो भी हम ना लेंगे
ज़िंदगी के आँसूओं की माला पहनेंगे
ज़िंदगी के आँसूओं की माला पहनेंगे
मुश्किलों से लड़ते भिड़ते जीने में मज़ा है
मुश्किलों से लड़ते भिड़ते जीने में मज़ा है

(हम से न छुपाओ बच्चो हमें भी बताओ
आनेवाले दुनिया कैसी होगी समझाओ) – 2
आनेवाले दुनिया में सब के सर पे ताज होगा
आनेवाले दुनिया में सब के सर पे ताज होगा
न भूखों की भीड़ होगी न दुखों का राज होगा
न भूखों की भीड़ होगी न दुक्कों का राज होगा
बदलेगा ज़मना ये सितारों पे लिखा है
बदलेगा ज़मना ये सितारों पे लिखा है …

1950s

लपक जपक तू आ रे बदरवा - Lapak Jhapak Tu Aa Re (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: मन्ना डे
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़

लपक जपक तू आ रे बदरवा
सर की खेती सूख रही है
बरस बरस तू आ रे बदरवा

झगड़ झगड़ कर पानी ला तू
अकड़ अकड़ बिजली चमका तू
तेरे घड़े में पानी नहीं तो
पनघट से भर ला
रे बदरवा …

बन में कोयल कूक उठी है
सब के मन में हूक उठी है
भूदल से तू बाल उगा दे
झट पट तू बरसा
रे बदरवा …

1950s

चली कौन से देश गुजरिया - Chali Kaun Se Des Gujariya (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, तलत महमूद
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़, रतन कुमार

चली कौनसे देश गुजरिया तू सज-धज के – 2… 11 more words

1950s

रात गई फिर दिन आता है - Raat gayi Phir Din Aata Hai (Boot Polish)

फ़िल्म: बूट पॉलिश / Boot Polish (1954)
गायक/गायिका: मन्ना डे
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: डेविड, बेबी नाज़

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते-जाते ही,
ये सारा जीवन जाता है…

कितना बड़ा सफ़र दुनिया का,
एक रोता, एक मुस्काता है,
कदम-कदम रखता ही राही
कितनी दूर चला जाता है
एक-एक तिनके-तिनके से
पंछी का घर बन जाता है
रात गई…

कभी अँधेरा, कभी उजाला
फूल खिला, फिर मुरझाता है
खेला बचपन, हँसी जवानी
मगर बुढ़ापा तड़पाता  है
सुख-दुःख का पहिया चलता है,
वही नसीबा कहलाता है

बच्चे:
जॉन चाचा, तुम कितने अच्छे
तुम्हें प्यार करते सब बच्चे,
हमें बता दो ऐसा काम,
कोई नहीं करे बदनाम!
चाचा, क्या होती तक़दीर?
क्यों है एक भिखारी चाचा?
क्यों है एक अमीर?
चाचा, हमको क्यों काम नहीं?
भीख माँग कर जीने में कुछ नाम नहीं!

बढ़ता चल, बढ़ता चल, बढ़ता चल,
तू एक है प्यारे लाखों में,
तू बढ़ता चल, बढ़ता चल, बढ़ता चल,
तू एक है प्यारे लाखों में,
तू बढ़ता चल,  बढ़ता चल, तू बढ़ता चल,
तुझे रुकना नहीं, तुझे झुकना नहीं
घबराना नहीं, तेरी है ज़मीं, तू बढ़ता चल
तारों के हाथ पकड़ता चल, फूलों के हाथ पकड़ता चल
तू एक है प्यारे लाखों में, तू बढ़ता चल
ये रात गई, वो सुबह नयी

1950s