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GENUINE U.S. MARIJUANA PARTY T-SHIRTS From Cave City Kentucky!

GENUINE U.S. MARIJUANA PARTY T-SHIRTS !

On April 20th, 2018 I received the following email from “Stripe”.

“Thanks for using Stripe.While we hate to give you anything less than a great experience, it does seem that your business is in violation of the Stripe Services Agreement, section A.7.b (“Prohibited Businesses and Activities”).

351 more words
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GENUINE U.S. MARIJUANA PARTY T-SHIRTS From Cave City Kentucky!

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On April 20th, 2018 I received the following email from “Stripe”.

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Banks on 2-day nation-wide strike from today: Here's how it will affect you

Latest News

Employees and officers of various public sector banks across the country are on a two-day strike starting today to protest a nominal 2 per cent wage hike offered by the Indian Banks’ Association (IBA). 182 more words

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Banks on 2-day nation-wide strike from today: Here's how it will affect you

The two-day nationwide bank strike on May 30 and 31 will hit banking operations and might lead to cash-crunch across the country

 

Employees and officers of various public sector banks across the country are on a two-day strike starting today to protest a nominal 2 per cent wage hike offered by the Indian Banks’ Association (IBA). 182 more words

Current Affair

दो दिन नहीं होगा बैंक का काम, हड़ताल से हो सकती है एटीएम में कैश की किल्लत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपको बैंक का कोई भी जरूरी काम है तो आप उसे शुक्रवार तक टाल दें। बुधवार और गुरूवार को बैंक हड़ताल है। दो दिन यानी 30-31 मई को बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। ये हड़ताल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की वेतन वृद्धि को लेकर की जा रही है। नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक इम्पलाइज के सचिव राजेन्द्र अवस्थी ने बताया कि मुख्य श्रमायुक्त ने सम्मानजनक हल निकालने के लिए भरसक प्रयास किया, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। राजेन्द्र अवस्थी ने कहा कि केवल दो फीसदी वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव देकर आईबीए ने बैंकिंग सेक्टर के साथ मजाक किया है।

क्या होगा हड़ताल का असर?

हड़ताल की सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों पर भी बैंकों की इस हड़ताल का असर पड़ने जा रहा है। हड़ताल के दोनों ही दिन महीने के आखिरी दिन है और ऐसे में करोड़ों लोगों की सैलरी ट्रांसफर को लेकर समस्या आने वाली है। निजी और सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने की अंतिम तारीख में खाते में जमा किया जाता है। कुछेक कंपनियों को छोड़कर बाकी कंपनियां इस प्रकार से महीने की अंतिम तारीख में पड़ने वाली छुट्टियों और बैंक कर्मियों की हड़ताल को ध्यान में नहीं रख पाती हैं। इसका असर यह होता है कि करोड़ों नौकरीपेशा और उनके परिजनों को इस प्रकार की हड़ताल और छुट्टियों का असर झेलना होता है।

कई बैंकरों का कहना है कि अब सारी कंपनियां ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करती हैं। ऐसे में सभी के खातों में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं। अमूमन इस प्रक्रिया में बैंक की ज्यादा भूमिका नहीं होती है, लेकिन बैंक में भेजे गए धन को लोगों के सैलरी अकाउंट में ट्रांसफर करना बैंक की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बैंक का काम प्रभावित होना लाजमी है और ये भी तय हो जाता है कि लोगों की सैलरी उनके खातों में आने में समस्या होगी।

हो सकती है एटीएम में कैश की किल्लत 

इस प्रकार की हड़ताल का असर एटीएम सेवाओं पर भी पड़ता है। एटीएम में कैश की किल्लत हो सकती है। यह समस्या उन लोगों के लिए ज्यादा बड़ी है जो महीने के अंत में य पहली तारीख को कई लेन-देन निपटाते हैं। ऐसे में खाते में अगर पैसा नहीं आया तब भी समस्या है और अगर पैसे आ भी जाते हैं तब उन्हें निकालने में भी समस्या है।

बता दें कि बैंकों द्वारा एटीएम में भी कैश की व्यवस्था करने के नियम सख्त हैं और आरबीआई इस प्रकार की किसी परिस्थिति में पहले प्रबंध करने का निर्देश देता है, लेकिन बैंकों की प्रणाली में ये सुधार अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। जानकारी के लिए बता दें कि जिन लोगों के खाते निजी बैंकों में हैं उन्हें ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना होगा, लेकिन जिन नौकरी पेशा और बिजनेस मैन के खाते सरकारी बैंकों में हैं उन्हें इस हड़ताल के दौरान दिक्कतें झेलनी होंगी।

Source: Bhaskarhindi.com

News Paper Hindi

Access to banking services is spreading throughout the developing world

People are increasingly relying on mobile apps, rather than physical banks

IN 2017 the number of people without access to banking services fell to 1.7bn, down from 2.5bn in 2011, thanks largely to the rise of mobile-payment apps. 83 more words

The Economist