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सिर्फ़ 7 रातों तक सोते वक़्त अजवायन को चबाकर ऊपर से गरम पानी पीने के फ़ायदे जान हैरान रह जाओगे, ज़रूर पढ़े और शेयर करे

  • अजवाइन के गुणों की प्रशंसा में आयुर्वेद में कहा गया है “एका यमानी शतमन्न पाचिका” अर्थात इसमें सौ प्रकार के अन्न पचाने की ताकत होती है। अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि इनका नाश करने वाली होती है। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण होता है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते है इस लिए यह गुणों का भंङार है यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वैध्य भी कहा गया है अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है। अजवाइन गर्म व शुष्क प्रकृति की होती है। अजवाइन एक प्रकार का बीज है जो अजमोद के समान होता है।
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रात को सोते वक्त भुनी हुई 2 लौंग खाने से जो होगा, आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा

वर्तमान समय में प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। हम प्रत्येक सांस के साथ अपने शरीर के अंदर कई प्रकार के कीटाणुओं का सेवन करते हैं व अधिक भागदौड़ के कारण हम अपने शरीर पर वैसे भी कम ही ध्यान दे पाते हैं, जिससे हमारा स्वास्थ्य काफी कमजोर रहता है या हमें कई प्रकार की बीमारियां होती रहती हैं, जिसके लिए हम कई प्रकार की दवाओं का सेवन भी करते हैं, जिससे हमें आर्थिक नुकसान काफी होता है। लौंग तो आप सभी ने देखी होगी वह आप इसका सेवन भी करते होंगे। ज्यादातर इसका सेवन आप सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं या फिर छोटी-मोटी बीमारियों में भी इसका सेवन होता है। दोस्तों आज जो हम आपको उपाय बताने जा रहे हैं और अगर आप वह उपाय करते हैं, तो आपको काफी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। अगर आप रात को सोते वक्त दो या तीन लौंग अंगारों पर सेक कर अर्थात भून कर खाए, तो इससे आपको काफी फायदा होगा, ध्यान रहे ज्यादा देर अंगारे पर रखने से यह जल जाएगी व इसके औषधीय गुण खत्म हो जाएंगे। 59 more words

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भस्त्रिका प्राणायाम से थायराइड व टान्सिल, कब्ज, मोटापा, मधुमेह, एलर्जी, सांस के रोग, दमा, पुराना नजला, साइनस आदि 100 रोग जड़ से खत्म होते है, जानिए कैसे

भस्त्रिका प्राणायाम में सांस लेने व छोड़ने की गति अधिक तेजी से करनी होती है। संस्कृत में भस्त्रिक का अर्थ धमनी होता है। योग में इसका नाम भस्त्रिका इसलिए रखा गया है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की सांस लेने व छोड़ने की गति लौहार की धमनी की तरह होती है। जिस प्रकार एक लोहार धौकनी की सहायता से तेज हवा छोडकर उष्णता निर्माण कर लोहे को गर्म कर उस मे की अशुद्धता को दूर करता है, उसी प्रकार भस्त्रिका प्राणायाम में हमारे शरीर और मन की अशुद्धता को दूर करने के लिए धौकनी की तरह वेग पूर्वक अशुद्ध वायु को बाहर निकाला जाता है और शुद्ध प्राणवायु को अंदर लिया जाता हैं। इसीलिए इसे अंग्रेजी में ‘Bellow’s Breath’ भी कहा जाता हैं।  इस प्राणायाम से प्राण व मन स्थिर होता है और कुण्डलिनी जागरण में सहायक होता है। 64 more words

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सिर्फ 6 दिन सोते वक़्त 1 इलाइची खाने से ऐसे परिणाम मिलेंगे कि आप हैरान रह जाएंगे

    • इलायची स्वादिष्ट होती है। आमतौर पर इसका उपयोग खाने के पदार्थों में किया जाता है। इलायची छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है। छोटी इलायची कड़वी, शीतल, तीखी, लघु, सुगन्धित, पित्तकर, और रूक्ष होती है तथा वायु (गैस), कफ (बलगम), अर्श (बवासीर), क्षय (टी.बी.), विषदोष, बस्तिरोग (नाभि के नीचे का हिस्सा), कंठ (गले) की बीमारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन होना), अश्मरी (पथरी) और जख्म का नाश करती है। बड़ी इलायची तीखी, रूक्ष, रुचिकारी, सुगन्धित, पाचक, शीतल और पाचनशक्तिवर्द्धक होती है। यह कफ, पित्त, रक्त रोग, हृदय रोग, विष दोष, उल्टी, जलन और मुंहदर्द तथा सिर के दर्द को दूर करता है। जिस तरह से तुलसी को जडी बूटियों और औषधियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है, उसी तरह इलायची को मसालों में सर्वोपरि माना जाता है।
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सुबह खाली पेट इसके सिर्फ 4 दाने खाने से शारीरिक कमजोरी, कमरदर्द, जोड़ो का दर्द, खून की कमी और वजन बढ़ाने का अचूक उपाय है

  • सुबह खाली पेट नीचे बताये गए मिश्रण में से चार दाने किशमिश खाना स्वास्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि किशमिश में बहुत ऐसे तत्व होते है जो हमारे शरीर के लिए बहुत गुणकारी होते हैं शायद आप जानते होंगे की किशमिश के सेवन से रक्त, कमज़ोरी आदि तथा ओज की मात्रा बढ़ती है जो कि आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है।

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चुटकी भर गुग्गुल पानी मे मिलाकर पीने से गठिया, जोड़ो का दर्द, सायटिका, कमर दर्द, मोटापा, लकवा, ट्यूमर और शारीरिक कमजोरी आदि 35 रोगों में रामबाण

  • गुग्गुल एक प्रकार की ऐसी औषधि है जो राजस्थान में अधिक मात्रा में पाई जाती है यह पूरे भारत में पाई जाती है। वैसे आबू पर्वत पर पैदा होने वाला गुग्गुल अच्छा सबसे अच्छा माना जाता है। इसको हिन्दी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ में गुग्गुल, तेलगू में महिषाक्षी और अंग्रेजी में इण्डियन बेदेलियम आदि नामो से जाना जाता है। गुग्गुल काले और लाल रंग का होता है। इसका स्वाद कड़ुवा होता है। गुग्गुल का पेड़ रेतीली और पर्वतीय भूमि में पाया जाता है। इसके पत्ते छोटे-छोटे नीम के पत्तों के समान तथा फूल बिल्कुल छोटे-छोटे पांच पंखुड़ी वाले होते हैं। इसके फल छोटे-छोटे बेर के समान तीन धार वाला होता है जिसे गुलिया कहा जाता है। इसके फल पेट दर्द को दूर करने में लाभकारी है। गुग्गुल की प्रकृति गर्म होती है। यदि आपको इसके सभी गुणों का फायदा लेना है तो सुबह-सुबह एक गिलास पानी मे चुटकी भर गुग्गुल डालकर सेवन करना चाहिए।
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इसको निम्बू के रस में लगाने से गंजो के बाल उग जाते है तो नारियल तेल में लगाने से चर्म रोग मिट जाता है, ऐसे ही 13 फ़ायदे जाने

जमालगोटा (Purgative Croton) : 

  • जमालगोटा को कुम्भिबीज, जयपाल, चक्रदत्त बीज, संस्कृत में जयपाल, मराठी में जमालगोटा, गुजराती में नेपालो, बंगाली में जयपाल तथा अंग्रेजी (English) में इसे Purgative Croton/Croton tiglium) के नाम हैं। यह एक झाड़ी है है जो की भारतवर्ष में सूखे जंगलों में पायी जाती है। इसके बीज मुख्य रूप से बहुत तीव्र विरेचक के रूप में प्रयोग किये जाने के लिए मशहूर हैं। बीज देखने में अरंड के बीजों जैसे होते हैं।
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