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And then she looked at me innocently

A few years ago, I was gifted a month old pug by a very dear friend. My daughter has been insistent on getting a dog and when my friend got to know, he promptly sent a little darling. 119 more words

झोपड़ी को तोड़कर आज़ाद स्मृति मंदिर नहीं आपने तो जेलखाना बना दिया सरकार !

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शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जन्मस्थली भाबरा, जहां उनका जन्म हुआ, जहां के जंगलों में तीर-कमान चलाते-चलाते कब तमांचा चलाना सीख गए शायद कोई नहीं जानता । ताउम्र ये कहने वाले आज़ाद हूं आज़ाद रहूंगा । और सच भी है कि जीते जी तो अंग्रेज उन्हें छू भी नहीं पाए । मौत भी आई तो उनकी अनुमति से और कहा कि आप मेरा वरण कीजिए, मैं आपका वरण करने लायक नहीं हूं । ऐसे आज़ाद जो हमेशा आज़ाद रहे ।

आज़ाद की जन्मस्थली को लेकर सियासत भी खूब हुई, भाबरा का नाम परिवर्तन से लेकर उनकी यादों को सहजने तक । 9 अगस्त को पीएम मोदी कार्यक्रम में कई लोगों को भाबरा में आज़ाद की जन्मस्थली देखी होगी ।

सोचिए जिस शख्स ने ताउम्र आज़ाद रहने का प्रण लिया था, जो जीते जी कायम भी रहा, लेकिन सरकारों ने एक दीवार का ढांचा खड़ा कर आज़ाद की प्रतिमा ताले में कैद कर दी । भाबरा में शायद यही होता है, जब हल्ला होता है तो आज़ाद दूर से देख लेते हैं,क्योंकि तब कपाट खुल जाते हैं,  भीड़ के गुजरते ही इस स्मृति मंदिर में वे और उनका अकेलापन होता है , वो भी कैद में । ना बाहर से कोई अंदर देखने वाला और ना ही अंदर से कोई बाहर देखने वाला । इस अपराध की क्या सजा होगी ।

और मुझे ऐसा लगता है कि मेरी तरह कई लोगों को ये स्मृति मंदिर रास नहीं आया होगा । बताईये भला,  सीमेंट-कांक्रीट का ऐसा भव्य स्मारक तो देश में कही भी बनाया जा सकता था, तो फिर भाबरा में क्या हो सकता था । भाबरा में उस कुटिया को सहज कर रख लिया जाता तो कितना अच्छा होता, उस आम के पेड़ पर ध्यान दे दिया जाता, कुटिया के पीछे बने बाड़े को सहेज लिया जाता, आज़ाद ने जिस परिवेश में जिस वातावरण में इस घर में बचपन गुजारा, अगर वो वैसा ही बचा लिया जाता तो कितना सुखद होता ।

लेकिन सरकार ने लाखों खर्च कर स्मृति मंदिर बनवाया है, सच पूछिए तो आज़ाद की आत्मा भी रोती होगी, इस सीमेंट-क्रांकीट के मंदिर में । इस पर भी ये अपराध की लोगों के जाने के बाद कार्यक्रम खत्म होने के बाद आज़ाद को ताले में रहना पड़ता है ।

आप का ये स्मृति मंदिर किसी का काम नहीं है, लोग जुड़ ही नहीं पाते हैं इस मंदिर के साथ, सिवाय इसके की आज़ाद की आदमकद प्रतिमा । अगर वो कुटिया होती, वो आम होता, वो आंगन होता, वो खटिया होती तो सोचिए कितना अपनापन सा लगता ।लोग आज़ाद को इन चीजों को छूकर महसूस करते ।  आप की इन पक्की दीवारों में वो सुकून कहां जो उस मिट्टी, कवेलू, बांस की झोपड़ी में था । आपने सजावट तो की लेकिन आज़ाद की आज़ादी छीन ली, उनका स्वाभिमान छीन लिया । अब इतनी गुजारिश है कि जो गलती हो गई उसे सुधारा नहीं जा सकता , क्योंकि कुटिया के अवशेष कहां है, किसे पता, आम का पेड़ अब खत्म हो चुका है, बस कुछ कवेलू और बांस की बल्लियां हैं । लेकिन हो सके तो आज़ाद को आज़ाद रहने दीजिए, ताले कैद करके रखने से भला क्या होगा, कुछ ऐसा कीजिए की इस आज़ाद कुटिया जो आपने स्मृति मंदिर बदल डाली है, इसके कपाट कभी बंद ना हो ।  बाकी तो जो है सो है ही ।

झाबुआ

"Corruption runs deep in the bureaucracy in MP"

Newsroom24x7 Staff

Bhopal: Coinciding with Prime Minister Narendra Modi’s terse message that “we cannot march through the twenty-first century with the administrative systems of the nineteenth century” BJP National General Secretary Kailash Vijayvargiya this weekend squarely targeted the bureaucracy at a coordination meeting of Rashtriya  Swayam Sevak Sangh (RSS) in the State capital. 320 more words

Madhya Pradesh

University in Bhopal to launch engineering courses in pure Hindi

Shruti Tomar |  Hindustan Times, Bhopal |   Aug 24, 2016 |

In the years to come, don’t be surprised if a qualified engineer points at a train and calls it a ‘lauhpathgamini’. 403 more words

India

जनसंपर्क में जुटे संजर और शर्मा

यहां से लोकसभा प्रत्याशी आलोक संजर एवं पीसी शर्मा बजाए हवा हवाई बयानबाजी, सभाओं और आरोप प्रत्यारोपों के, सीधे जनसंपर्क में जुटे हुए हैं। आलोक संजर ने खुद को कर्मचारी का बेटा बताते हुए वोट मांगे तो पीसी शर्मा गणगौर में ही शामिल हो गए।

भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी पीसी शर्मा गुरुवार को इंदिरा नगर झुग्गी बस्ती से निकलने वाली गणगौर शोभायात्रा में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा कर शोभा यात्रा की डलिया सर पर उठाकर शोभायात्रा में शामिल हुए। इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने करोंद में शर्मा के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर ग्रामीण जिलाध्यक्ष अवनीश भार्गव, जोधाराम गुर्जर, सुनील सूद, कैलाश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे। सभा में पचौरी ने कहा कि भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता जा रहा है और कांग्रेस प्रदेश में करिशमाई जीत दर्ज कर बीजेपी के सपनों को चकनाचूर कर देगी। शर्मा ने ओल्ड सुभाष नगर और ऐशबाग में भी चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके साथ आशाराम शर्मा, पार्षद मोनिका जैन, मनोज शुक्ला, शमीम खान, रेहान गोल्डन आदि मौजूद थे।

संजर ने कर्मचारियों से मांगे वोट

भाजपा के उम्मीदवार आलोक संजर ने गुरुवार को वल्लभ भवन के पास कर्मचारियों के बीच जनसंपर्क किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ‘आपसे वोट मांगने नहीं आया हूं कर्मचारी का बेटा हूं सेवा का अवसर चाहता हूं।’ संजर ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि सरकार ने अनेक कर्मचारी हितैषी निर्णय लिए हैं। संजर ने इसके अलावा नरेला विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क कर चुनावी सभाएं ली। वे विधायक विश्वास सारंग के साथ बिजली नगर कॉलोनी, रूपनगर कॉलोनी, ऐशबाग फाटक, फूटी बावड़ी, महामाई का बाग, शंकराचार्य नगर नगर, पुष्पा नगर, हिनोतिया, सौरव कॉलोनी, चांदबढ़, स्टेशन, द्वारका नगर, राजेन्द्र नगर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचे। इधर चुनाव संचालक उमाशंकर गुप्ता ने नगर निगम चुनाव में पराजित एवं विजयी प्रत्याशियों की बैठक आयोजित कर संजर के समर्थन मे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार कार्य की जवाबदारी सौंपी। सांरग शनिवार को बैरसिया में जनसंपर्क करेंगे।

अखबार

कचरे में स्वास्थ्य योजनाओं की प्रचार सामग्री !

स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रूपए खर्च किए गए जाते हैं । मकसद होता है कि आम लोगों तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंच सके । लेकिन वाकई में ऐसा हो पाता है क्या ? कम से कम झाबुआ के स्वास्थ्य विभाग की इस हरकत के बाद तो ऐसा नहीं लगता है ।  झाबुआ में प्रचार सामग्री आम लोगों के हाथ में पहुंचने की बजाय कचरे में पड़ी है । इतना ही नहीं इसे जलाने की कोशिश भी की गई लेकिन पानी बरसने के कारण अधजले ही ये पर्चे रह गए और ये सब हुआ झाबुआ सीएमएचओ ऑफिस परिसर में । उत्कृष्ट स्कूल मैदान के पास स्थित सीएमएचओ ऑफिस के पास बड़ी मात्रा में प्रचार सामग्री कचरे में पड़ी हुई है । जिनमें जिंक ओआरएस और पल्स पोलिया अभियान की प्रचार सामग्री है । इन तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभिन्न योजनाओं के लिए आने वाली और छपवाई जाने वाली सामग्री का क्या हश्र होता है ।

झाबुआ

Picking Up Steam, Giving it Some Gas

Now that prelims are finito, I’m proud to say that my reading for pleasure has started to pick up steam again. I brought way too many books on my trip to Chicago and Baltimore, and I actually finished the first one on the plane ride back to Midway:  339 more words