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Why is Chernobyl remembered but not Bhopal or the Bikini Atoll tests?

Today is the 30th anniversary of the Chernobyl nuclear disaster, remembered as one of the worst in history. However, there is another, much less known disaster of a similar kind that happened in the city of Bhopal, capital of the state of Madhya Pradesh in India, where a gas leak from a pesticide plant killed at least 3,000 people and up to 20,000, with over half a million people affected by it it overall. 406 more words

Society

Earth Day Explodes! - Paul's Tub Talk - April 24, 2016

Planting a tree for Earth Day is like hiding Easter eggs for Yom Kippur.

It’s totally nutso. Earth Day came about because of a massive oil spill, not a forest fire. 8 more words

Paul's Tub Talk

సీఎం కటౌట్‌కి గాజులు..

సీఎం కటౌట్‌కి గాజులు..

మధ్యప్రదేశ్‌లో మహిళల ఆత్మాభిమానం దెబ్బతింది. ఏకంగా రాష్ట్ర ముఖ్యమంత్రి కటౌట్‌కే గాజులు తొడిగారు.  రాష్ట్రంలో మగువలపై వరుసగా జరుగుతున్న అఘాయిత్యాలతో పాటు నీటి సంక్షోభంపై మహిళా కాంగ్రెస్ సభ్యులు..…….Read More………

Madam Sabeena Jamshed- My newfound inspiration.

What I love about life is the word itself- LIFE! Living the length and breadth of it. Like all poets ,I derive my inspiration from this subject. 234 more words

Concocted Thoughts

कानून के राज की स्थापना और जनता को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की अहम भूमिका - राष्ट्रपति श्री मुखर्जी

कानून के राज की स्थापना और जनता को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की अहम भूमिका – राष्ट्रपति श्री मुखर्जी
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि कानून का राज स्थापित करने में तथा लोगों को न्याय दिलाने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज में जिसमें जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ा है न्यायिक व्यवस्था तक आसान पहुँच अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति आज यहाँ भोपाल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की चतुर्थ रिट्रीट का शुभारंभ कर रहे थे।

राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने लोकतंत्र के तीनों स्तंभ में न्यायपालिका की भूमिका अहम है। उसकी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय दिलाने, मानव अधिकारों और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा में संरक्षक की भूमिका है। उन्होंने कहा कि लोगों के लिये न्याय सस्ता, सुलभ और त्वरित होना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान जीवंत दस्तावेज है। गरीबों में गरीब की न्याय तक पहुँच ही सबके लिये न्याय को, सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि हमारे विकासशील देश में न्यायपालिका का कार्यक्षेत्र व्यापक है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में न्यायालयों की बुनियादी सुविधाएँ बेहतर हुई हैं। ई-न्यायालय परियोजना में ऑनलाइन प्रकरणों की जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थ-व्यवस्था को वैधानिक व्यवस्था में परिवर्तनों से बाधित नहीं होनी चाहिये। इसके लिये आवश्यक है कि न्यायपालिका और विधायिका के मध्य आपसी समझ विकसित हो।

श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि शीर्ष न्यायालय निरंतर सुशासन के लिये सफलतापूर्वक कानूनों की व्याख्या कर रहा है। इससे मानवीय सम्मान की अपेक्षाओं की भी पूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त की है। उच्च मानक और उद्दात सिद्धांतों के द्वारा न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों ने न केवल देश के वैधानिक और संवैधानिक ढाँचे को मजबूत किया है, वरन अनेक देशों को भी प्रगतिशील न्यायाधिकार क्षेत्र के लिये प्रेरित किया है। श्री मुखर्जी ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिये किये जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने यह कार्यक्रम आयोजित करने के लिये भी मुख्य न्यायाधीश की सराहना की। साथ ही उम्मीद जाहिर की कि इससे वैश्विक चुनौतियों के प्रति न्यायाधीशों को जागरूक करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधि के शासन में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सर्वोच्च न्यायलय के प्रधान न्यायाधीश श्री टी.एस. ठाकुर ने रिट्रीट के आयोजन की आवश्यकताओं और महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रिट्रीट नवीन वैश्विक चुनौतियों पर न्याय पालिका का ध्यान केंद्रित करने का प्रयास है। दुनिया की आबादी का छठवाँ हिस्सा शांति एवं व्यवस्थापूर्ण जीवन व्यतीत करे, इसके लिये आवश्यक है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक परिवर्तनों को समझा जाये। उनका प्रजातांत्रिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण की चुनौतियों में, उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्ट्राचार के साथ संघर्ष में, मानवधिकारों के संरक्षण में, मानवीय कानूनों की महत्ता में, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर, वैश्विक आंतकवाद के खतरे पर, आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन तथा ग्लोबलाइजेशन पर प्रभाव को भी समझा जाये।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्री-लिटिगेशन व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाये ताकि छोटे मामलों का न्यायालय के बाहर ही निराकरण हो सके। इससे न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या कम होगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रकरणों के निराकरण की प्राथमिकता निर्धारण की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि मध्यप्रदेश में न्याय पालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच दूरियाँ नहीं रहें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव चलते रहने से समय और धन की बर्बादी होती है। इसीलिये पाँच साल में एक बार में चुनाव होने चाहिये। नेता का परिवर्तन हो सकता है किन्तु सदन पाँच साल तक चलना चाहिए। उन्होंने चुनाव के लिये स्टेट फंडिंग की व्यवस्था किये जाने पर भी विचार का सुझाव दिया।

केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने कहा कि सरकार और न्यायपालिका दोनों का प्रयास है कि न्याय का अधिकतम विस्तार हो। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया के बड़े लोकतंत्र से कहीं अधिक है। यह ऐसा संवैधानिक संसदीय लोकतंत्र है जिसमें स्वतंत्र और प्रो-एक्टिव न्यायपालिका है। उन्होंने अधिकारों के प्रति नागरिकों की जागरूकता की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तीव्र आर्थिक विकास के लिये आवश्यक है कि उद्यमियों को व्यापार का सहज वातावरण उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधारों का स्वरूप ऐसा होना चाहिये कि लोगों का न्यायिक व्यवस्था में विश्वास और अधिक मजबूत हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का उद्देश्य निवेश को बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करना और कौशल विकास का उन्नयन है। उन्होंने बताया कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया को तीव्र करने के प्रयास किये गये हैं। नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी को रिवाइज किया जा रहा है। विशेष वाणिज्यिक न्यायालय के गठन का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी को न्याय मिले, तभी इन प्रयासों की सफलता है। समाज में शांति एवं व्यवस्था के लिये न्याय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायिक संस्थाओं के बुनियादी ढाँचों को मज़बूत बनाने के प्रयास हुए हैं। राज्यों के लिये राशि की उपलब्धता में काफी वृद्धि की गई है। वर्ष 2011 से अभी तक 13वें वित्त आयोग के तहत 1900 करोड़ रुपये से अधिक विभिन्न गतिविधियों के लिये राज्यों को आवंटित किये गये हैं। अधिकांश जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय कम्प्यूटरीकृत हो गये हैं।

पूर्व प्रधान न्यायाधिपति सर्वोच्च न्यायालय श्री एम. वेंकटचलैया ने एकेडमी की स्थापना से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिट्रीट के चिंतन के दौरान आने वाले विचार भविष्य के स्वरूप निर्धारण का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय सम्भत: मानव इतिहास का सबसे जटिल दौर है। परस्पर अनुशासित रूप से जुड़े समाज, देश के विकास, शांति और व्यवस्था में न्यायिक संस्थाओं की भूमिका और उसको किस प्रकार से अंगीकृत किया जाये, पर विचार जरूरी है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री ए.एम. खानविलकर ने स्वागत उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि रिट्रीट न्यायाधीशों को अर्थ-व्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान और भारतीय समाज के समक्ष नई चुनौतियों पर जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में संसद द्वारा बनाए गये नियमों की व्याख्या का उत्तरदायित्व न्याय पालिका का है। न्यायालय इसके माध्यम से नियमों को प्रकाशित भी करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रिट्रीट का चिंतन संविधान और कानून के राज की अक्षुण्णता में सहयोग करेगा। कानून और समाज के बीच सेतु का कार्य करेगा। आभार ज्ञापन जस्टिस जी. रघुरामन ने किया।

BHOPAL

Retreat of Judges of the Supreme Court: President says Justice should be accessible, affordable and quick

Newsroom24x7 Staff

Bhopal: President Pranab Mukherjee today said for justice to have meaning to the people, it must be accessible, affordable and quick.

The President was inaugurating the Fourth Retreat of Judges of the Spreme Court at the National Judicial Academy in Bhopal, Madhya Pradesh. 1,665 more words

India

Ashoka, Food Poisoning and Union Carbide

Because of my delay in Bangalore i decided to skip Hyderabad and head straight to Bhopal. The journey took two days and began with a 19 hour bus journey which left midday on the first day. 2,180 more words

India