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When melody rules your heart..

Indian classical !! Old songs !! Huh .. who listens them nowadays, when you have better than previous, songs and singers in the market.. Even technology is changed so much, we are listening music in digital quality. 118 more words

Random Thoughts

Music:Sindoor Lal Chadhayo 

Ganpati Aarti: Sindoor Lal Chadhayo 

Album: VAASTAV (THE REALITY) 

Singer: RAVINDRA SAATHE 

Music Director: JATIN-LALIT

It is a popular Marathi arati or bhajan (devotional song) dedicated to the Hindu god Ganesha. 12 more words

Life

Music: Deva Shree Ganesha

Deva Shree Ganesha is a high energy devotional song. It is dedicated to Lord Ganesha. This song is from a 2012 Indian action drama film Agneepath (English: The Path of Fire).  101 more words

Life

Music: Evergreen Old Hindi Songs (Jukebox)

These are old Bollywood Hindi songs. Old songs are beautiful who doesn’t love them.

Life

Music: Kiska Chehra Ab Main Dekhu

This song is from a 2000 Indian crime drama Tarkieb, released in 2000. The song is sung by Jagjit Singh, Alka Yagnik and music is given by Aadesh Shrivastava. 56 more words

Life

My live Music experiences part 2: Bollywood Music

Continuing part 2 of My live Music experiences. Part 1 can be read here.

The very first Bollywood Music concert that I attended was to see… 496 more words

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एक बाल्टी दूध

एक बाल्टी दूध [ज़िन्दगी बदलने वाली हिंदी कहानियां]

एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है ।

अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।

दरअसल ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला।

मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश मेंबर ऐसा बदलाव ला सकते हैं जिसकी आज हमें ज़रूरत है।

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