अजीजन बाई

मध्य प्रदेश के एक क्षत्रीय कुल में जन्मी लड़की, जिसे कुछ अँगरेज़ उठा कर ले गए थे और अपनी छावनी में ले जाकर सबने उसके साथ रेप किया,बाद में कानपूर के कोठे पर बेच दिया।

जहाँ ये नृत्य किया करती थी, क्रन्तिकारी परिषद् के शमशुद्दीन का इन पर दिल आ गया था ।

और दोनों एक होने ही वाले थे की 1857 की क्रांति भड़क उठी और अजीजन बाई, जो एक कुलीन क्षत्रीय थी उसने, अपना पेशा छोड़ कर।

क्रांति की इस लड़ाई में ४०० वैश्याओ को साथ लेकर उतरना सही समझा।

अजीजन बाई और उनके दल की सभी महिलाओ का काम तोपों में बारूद भरना और बन्दूको और कारतूस डालने के साथ,घायल सैनिको का इलाज़ करना और उन्हें खाना भोजन मुहैया कराना था।

क्यों की अंग्रेजो का इन वैश्याओ के पास आना जाना था तो, इन्होने जासूसी का काम भी बखूबी किया।

बाद में ये सभी वैश्याए मर्दाने कपडे पहन कर और हाथो में तलवार लेकर खुले जंग में कूद गई थी।

जब ब्रिटिश की पकड़ जंग पर मज़बूत होती गई तो, एक अँगरेज़ अफसर ने उनके सामने ये प्रस्ताव रखा था की अगर वो हथियार छोड़ कर माफ़ी मांग ले तो उनके कोठे को और अच्छे तरह से सजा दिया जायेगा और उन्हें उपहार में हीरे मोतियों से भर दिया जायेगा। परन्तु उन्होंने उस अफसार को ना सिर्फ धुतकारा अपितु ये भी कहा की माफ़ी तो एक दिन अँगरेज़ मांगेगे भारतवासियों से।

जिससे सुन वो अफसार तिल मिल गया और उन्हें वही गोलियों से छलनी करा दिया।

ये दास्तान उस महान देवी की है, जो अंग्रेजो के अतियाचारो के कारण वैश्या तो बनी परन्तु देश भक्ति उसके अन्दर से अंतिम सास तक नही गई।

नमन है इस महान क्रांतिकारी देवी को।