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Theme Recap - Siblings

What a fantastic theme this week! I loved that everyone took a different spin this week and discussed more about how the shot was set up then the techniques to take and process. 847 more words

Theme Recap

मिलो तो सही!

दूर खड़ा था, हम सोचे कि भटक गया है,

राह दिखाने पास गए तो

और दूर वो निकल गया,

चिल्लाकर बोले हम ‘संयोग’ को

अरे यार, मिलो तो सही!

एक दिन यूँ ही ‘सौभाग्य’ दिखा,

सोचा आज तो शुभ दिन है,
बड़े दिनों बाद ये यहाँ दिखें हैं

मुस्कुराएँ, आज तो ज़बरन भेंट करेंगे,

दुःख के क़िस्से उन्हें कहेंगें

हमें देख, नुकड से ही वो खिसक गए

संयोग कोसते हम कहते रहे,

अरे यार, मिलो तो सही!

जीवन की इक तंग गली में,
‘आस’ को हमने सोता पाया,

आस देख फिर आस जगी

अरे सखी तुम इतने दिन कहाँ रही?

कई सालों से तलाश रहें हैं

मुझे रौंद हो यहाँ पड़ी!

लगा आज ही दिन फिरेगें,

उन्नति के फूल खिलेंगे!

तभी ‘आस’ विचारों की आहट भाँप गई,

इससे पहले कि कुछ कह सकें,

वो उठ सरपट फिर भाग पड़ी

भाग्य कोसते, वहीं बैठ बिलखते रहे,

अरे यार, मिलो तो सही!

Poem

Why GreyGinger?

No, ginger isn’t grey. But they stand for two things: grey for one, and ginger for the other.

At the end of my last post, 408 more words