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Between the four walls of my childhood.

Childhood. Those blissful years. There’s nothing I’d change about my childhood. Not the swimming in dirty dams that were at least a 30 minutes’ walk away from home, not the beatings I got for coming home too late (when street lights went on) as a girl child after a full day of playing on those same streets, not the wins (and loses) in indigenous games like dushe, catch-and-save, 3-tins (or more aptly 3 toti) and ndize (hide and seek). 714 more words

OK to Cry

Most weekdays, I’m at work when my six-year-old son wakes up. It’s not until I pick him up after school that I ask him about his morning and his day at school. 539 more words

Life

यारो की यारी !

कंचे उछालते, टांग अड़ाते, भरी दोपहरी में नदी की लहरों में गोता लगाने चले जाते हँसते खिलखिलाते।

यह उस बचपन की और उस यारी की सौगात है जो धीरे धीरे धुंधली होती जा रही। वो यारी जो पाक थी, बेमतलब थी बेवजह थी। कहा यार दोस्त मिलते जुलते हाथ बटा ते अपने दोस्तों की हर संभव मदद करने की कोशिश करते। और फिर कहा आज की यारियां जिसमे घूमना फिरना मौज मस्ती सब वेसी ही है मगर मदद के नाम पर कोई आगे नही आना चाहता।

वक़्त के साथ कई रिश्तों ने अपनी परिभाषाये जैसे थोड़ा बोहत बदल ली है, इसमे से दोस्ती एक ऐसा रिश्ता जो बोहत हद्द तक इस बदलाव से दूर रहा है। हालांकि दोस्ती में भी बदलाव आए और वो ज़ाहिर सी बात है आने ही थे पर वो इतने आश्चर्यजनक होंगे यह कल्पना कम ही थी। आज के ज़माने में दोस्ती मतलब मिलने से ज्यादा होती है और दिल और सोच मिलने से कम। ऐसा नही की लोग दोस्ती को अब मौका नही देते, घूमने नही जाते या अपने दोस्तों के साथ वक़्त नही बिताते पर जो कुछ भी हो, पता नही लोग पर अब क्यों साथ नही निभाते। 10 बजे दारू पीने दोस्त आजाता है पर वही उसे बोला जाए कि तबियत खराब है जरा मदद करने आजा तो बोहत ही कम दोस्त होंगे जो ऐसा कर पाएंगे और बाकी इंतेज़ार करेंगे कि तुम घूमने कब चलोगे या पार्टी कब दोगे।

दोस्ती एक बोहत ही प्यारा रिश्ता है जो कोई खुद चुन सकता है, बाकी सारे रिश्ते तो खुदा के ही दिए है। अब इस रिश्ते को ईमानदारी से निभा पाते हो तो यह जन्नत ज़मीन पर मालूम होगा और अगर सिर्फ खानापूर्ति या मतलब ढूंढने शुरू किए इसमे तो यह दोस्ती कहलाने लायक नही होगा। दोस्ती सिर्फ वो नही है जो एक दोस्त को घुमाने ले जाये दोस्ती वो भी है जो उसका काम बट बाये। दोस्ती सिर्फ वो नही जो बोले पार्टी कब देगा, दोस्ती वो भी है जो कहे तेरे पर रुपये कम पड़े तो मांग लियो। दोस्ती के बारे में जितना कहे कम है। साथ ही एक अच्छी दोस्ती के लिए यह भी जरूरी है कि आप लोगो का चयन सही करे, जरूर ही जो इंसान दिल का साफ होगा वो दोस्ती में दग़ाबाज़ी नही करेगा और इसलिए अच्छे दोस्त पाने के लिए हमे अच्छे लोगो के बीच मे रहना चाहिए और इससे यह जरूरी नही वो गाली न देता हो पर बन्दे का दिल साफ होने चाहिए।

A thank you note to the creators of Kim Possible

Dear Bob Schooley and Mark McCorkle,

Thank you for making a television show with a female protagonist.

That’s just the surface level, though, because I recently looked back at the recurring themes and character developments that went on during the course of the series and wanted to touch upon the significance of Kim Possible as a role model to young kids. 658 more words

Childhood

The Treetops Club

Driving through the country the other day I spied a tall white pine on the edge of a woods, and it reminded me of the pine woods at home, in Delhi, Ontario. 1,010 more words

Culture

Disney Friends

I feel like I’ve told this story a hundred times and I know I’ll tell it a thousand more and that’s okay because I never get tired to telling it! 746 more words

Life

I'm Writing a Novel!

I’ve started a new project, a serial novel titled: The Child in the Garden. I’ll be releasing one section weekly. Visit https://thechildinthegarden.wordpress.com/ to follow along! I’ve just released the first section!

https://thechildinthegarden.wordpress.com/

Poetry