Tags » Church

इसराएल के राष्ट्रपति ने की सन्त पापा से मुलाकात

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 सितम्बर 2015 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को वाटिकन में इसराएल के राष्ट्रपति रॉयवेन रिवलिन से मुलाकत की। इस अवसर पर दोनों नेताओं की बातचीत  मध्यपूर्व की स्थिति एवं द्विपक्षीय सम्बन्धों पर केन्द्रित रही।

वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय द्वारा उक्त मुलाकात के बाद जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि सन्त पापा से मुलाकात करने के उपरान्त इसराएली राष्ट्रपति रिवलिन ने वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन और वाटिकन के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गालाघेर से भी वार्ताएँ की।

विज्ञप्ति में कहा गया कि सन्त पापा फ्राँसिस एवं इसराएल राष्ट्रपति रिवलिन के बीच सम्पन्न सौहाद्रपूर्ण मुलाकात के अवसर पर “अनेक संघर्षों से प्रभावित मध्यपूर्व की राजनैतिक एवं सामाजिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित किया गया जिसमें ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों एवं अन्य अल्पसंख्यक समूहों की समस्याओं पर विशेष बातचीत की गई।”

इस सन्दर्भ में, विज्ञप्ति में कहा गया “अन्तर-धार्मिक वार्ताओं के महत्व को मान्यता दी गई और साथ ही पुनर्मिलन एवं शांति की स्थापना हेतु धार्मिक नेताओं की ज़िम्मेदारी को रेखांकित किया गया।”

विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि सन्त पापा एवं इसराएली राष्ट्रपति के बीच मुलाकात के दौरान, “इसराएली एवं फिलीस्तीनी लोगों के बीच विश्वास के वातावरण को प्रोत्साहित करने की नितान्त आवश्यकता पर भी बल दिया गया ताकि दोनों पक्षों के लोगों की न्यायसंगत आकाँक्षाओं का सम्मान करते हुए ऐसे समझौते तक पहुँचा जा सके जो उस क्षेत्र में शांति एवं स्थायित्व के लिये आधारभूत योगदान सिद्ध हो।”

मुलाकात के दौरान इसराएल में जीवन यापन कर रहे ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों की उत्कंठाओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया, परमधर्मपीठीय एवं इसराएली अधिकारियों के बीच जारी वार्ताओं में हुए विकास की सराहना की गई तथा ख्रीस्तीयों द्वारा संचालित स्कूलों एवं अन्य संस्थाओं के योगदान को याद किया गया।


(Juliet Genevive Christopher)

Church

चश्मा बनवाने सन्त पापा निकले वाटिकन से बाहर

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 सितम्बर 2015 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस, गुरुवार को, एक बहुत व्यक्तिगत एवं साधारण से काम के लिये यानि अपना चश्मा बनवाने के लिये, वाटिकन से बाहर निकले।

अपनी फोर्ड फोकस गाड़ी में ड्राईवर एवं दो अंगरक्षकों के साथ, गुरुवार सन्ध्या, सन्त पापा ने रोम के विया देल बाबुइनो स्थित चश्मे की दुकान पर पहुँचकर चश्माकार आलेस्सानद्रो स्पित्सिया सहित आस-पड़ोस के सभी लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।

इताली टेलेविज़न के कवरेज पर बहुत से जिज्ञासु लोगों एवं पर्यटकों को दुकान के इर्द-गिर्द एकत्र दर्शाया गया। सन्त पापा को चश्माकार स्पित्सिया से बातचीत करते तथा नया चश्मा पहनते भी दर्शाया गया। उन्होंने चश्माकार से कहा, “मुझे नया चश्मा नहीं चाहिये बस लेंस बदलने की ज़रूरत है।”

उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि वे चश्मे के पैसे देंगे। लगभग चालीस मिनटों तक सन्त पापा चश्मे की दुकान पर रहे क्योंकि वहाँ उनकी आँखों की जाँच भी की गई।

सन्त पापा के दुकान से चले जाने के बाद चश्माकार स्पित्सिया ने एसोसियेटेड प्रेस को बताया कि सन्त पापा का नया चश्मा बनाने के लिये उन्हें एक दिन पहले वाटिकन जाना था किन्तु उनके सचिव ने यह कहकर मना कर दिया था कि वे खुद विया देल बाबुइनो जाकर अपना चश्मा ले आयेंगे।

गुरुवार को रोम में हुई यह साधारण घटना इसलिये असाधारण हो गई क्योंकि परम्परागत रूप से  कलीसिया के परमाध्यक्ष का इस तरह वाटिकन से बाहर निकलना सामान्य बात नहीं है।


(Juliet Genevive Christopher)

Church

मध्यपूर्व एवं अफ्रीका के संघर्षों ने एक करोड़ तीस लाख बच्चों को शिक्षा से किया वंचित

बगदाद, शुक्रवार, 4 सितम्बर 2015 (सेदोक): संयुक्त राष्ट्र संघीय बाल निधि यूनिसेफ का कहना है कि मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में जारी युद्धों ने कम से कम एक करोड़ तीस लाख बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया है क्योंकि इन लड़ाइयों में कई स्कूल ध्वस्त अथवा क्षतिग्रस्त हो गये हैं।

रिपोर्ट में इंगित किया गया कि सीरिया, ईराक, यमन और लीबिया में लगभग 9,000 स्कूलों का इस्तेमाल शिक्षा प्रदान करने के लिये नहीं किया जा सकता है।

मध्यपूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र संघीय बाल निधि यूनिसेफ के प्रान्तीय निर्देशक पीटर सलामा के अनुसार “संघर्षों का विनाशकारी प्रभाव बच्चों पर साफ दिखाई दे रहा है तथा यह क्षति केवल स्कूलों को पहुँचाई गई भौतिक क्षति नहीं है अपितु यह एक सम्पूर्ण पीढ़ी के बच्चों की आशाओं एवं भविष्य को छिन्न-भिन्न  कर रहा है।

प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार स्कूल जाने में असमर्थ एक करोड़ 37 लाख बच्चे सिरिया, यमन, लिबिया एवं सूडान के 40 प्रतिशत स्कूली बच्चों का प्रतिनिधित्व करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की आशंका है कि यह संख्या 50 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

यूनीसेफ के अनुसार 2014 के दौरान सिरिया, ईराक, लिबिया, फिलीस्तीनी क्षेत्रों, सूडान और यमन में 214 स्कूलों पर हमलों की रिपोर्ट सामने आई। इसके अतिरिक्त, सिरिया में सन् 2011 के बाद से चार में से एक स्कूल को बन्द कर दिया गया जिससे बीस लाख बच्चे प्रभावित हुए हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

Church

प्रेरक मोतीः सन्त रोज़ालिया (1130-1166)

वाटिकन सिटी, 04 सितम्बर सन् 2015:

रोज़ालिया का जन्म इटली के सिसली स्थित पालेरमो में, सन् 1130 ई. में, हुआ था। वे, “गुलाबों के स्वामी” सिनीबाल्द तथा क्विसक्वीना की सुपुत्री थी जो महान चार्लमागने के वंशज थे। बाल्यकाल से ही रोज़ालिया का मन प्रार्थनाओं एवं भले कर्मों रमा रहता था। युवावस्था में प्रवेश करते ही उन्होंने समस्त सांसारिक माया मोह का परित्याग करने का मन बना लिया था जिसके लिये वे अपना घरबार छोड़कर पहाड़ों में चली गई थी। सिसली द्वीप के माऊन्ट पेलेग्रीनों में उन्होंने एक गुफा को अपना घर बना लिया था और वहीं रहने लगी थी। उनकी गुफा की दीवार पर लिखा था, “मैं, रोज़ालिया, “गुलाबों के स्वामी” सिनीबाल्द तथा क्विसक्वीना की बेटी ने, प्रभु येसु ख्रीस्त के प्रति प्रेम के कारण, इस गुफा में आजीवन रहने का प्रण किया है।”

माऊन्ट पेलेग्रीनों की गुफा में भिक्षुणी रोज़ालिया ने घोर तपस्या की तथा प्रार्थनाओं में ईश्वर के साथ सदैव सम्बन्ध बनाये रखा। सन् 1166 ई. में, इसी गुफा में रोज़ालिया का निधन हो गया था। अपनी मृत्यु के समय वे अकेली थी और कई शताब्दियों तक उनके निधन की बात किसी को पता नहीं चल पाई। किंवदन्ती है कि सन् 1624 ई. में पालेरमो में महामारी का प्रकोप फैला। इस भयंकर प्लेग से पालेरमो के कई परिवार प्रभावित हुए तब एकाएक युवती रोज़ालिया प्रकट हुई। सर्वप्रथम वे एक बीमार महिला को और फिर एक शिकारी को दिखाई दी। शिकारी को रोज़ालिया ने संकेत दिया कि वह माऊन्ट पेलेग्रीनो जाये तथा वहाँ से तपस्विनी रोज़ालिया की अस्थियों को बटोर कर ले आये। सम्पूर्ण पालेरमो शहर में इन अस्थियों सहित एक जुलूस निकालने का भी उन्होंने आदेश दिया। शिकारी ने वैसा ही किया और चमत्कारवश पालेरमो से प्लेग महामारी ग़ायब हो गई। इसके बाद से रोज़ालिया पालेरमो की संरक्षिका एवं सन्त घोषित कर दी गई। सन्त रोज़ालिया पर्व 04 सितम्बर को मनाया जाता है।

चिन्तनः सत्य एवं ईश्वर की खोज ही हमारे जीवन के समस्त कार्यों का लक्ष्य बने।  


(Juliet Genevive Christopher)

Church

THE FUTURE: Kim Davis and Saeed Abedini

“The Christian Nation” was created in order to be a venue through which Christians of all Trinitarian denominations can unite under the Cross of Jesus Christ our Lord and stand up in the midst of Christian Persecution, whether Physical or Political. 310 more words

General