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सन्त पापा फ्राँसिस, रूसी ऑरथोडोक्स प्राधिधर्माध्यक्ष मिलेंगे क्यूबा में

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2016 (सेदोक): विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस तथा रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच 12 फरवरी को क्यूबा में ऐतिहासिक मुलाकात तय की गई है।

ग़ौरतलब है कि सन् 1054 ई. में पूर्व की कलीसियाएँ रोम की काथलिक कलीसिया से अलग हो गई थीं। इसके बाद से इस्तानबुल स्थित पूर्वी रीति की कलीसिया रोम की काथलिक कलीसिया के निकट आई है किन्तु रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया के साथ फासला बना ही रहा।

शुक्रवार को परमधर्मपीठ तथा रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घोषित किया कि ईश कृपा से विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस तथा मॉस्को एवं सम्पूर्ण रूस की ऑरथोडोक्स कलीसिया के धर्माधिपति प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल 12 फरवरी को क्यूबा में मुलाकात करेंगे।

विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों धर्मगुरुओं की बीच क्यूबा में मुलाकात होगी जहाँ सन्त पापा फ्राँसिस मेक्सिको में अपनी यात्रा पर जाते समय पड़ाव करेंगे। इसी समय प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल क्यूबा में अपनी आधिकारिक यात्रा पर होंगे। मुलाकात हवाना के होसे मार्ती अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तय की गई है जहाँ दोनों धार्मिक नेता एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर करेंगे।

विज्ञप्ति में कहा गया कि दीर्घ कालीन तैयारी के उपरान्त काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु तथा रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया के शीर्ष के बीच मुलाकात तय की गई है जो इतिहास में ऐसी पहली मुलाकात है तथा दोनों कलीसियाओं के बीच सम्बन्धों के लिये एक महत्वपूर्ण चरण सिद्ध होगी।

विज्ञप्ति में कहा गया कि परमधर्मपीठ तथा मॉस्को प्राधिधर्माध्यक्षीय पीठ की आशा है कि यह मुलाकात सभी शुभचिन्तकों के लिये आशा का महान चिन्ह सिद्ध होगी। उन्होंने इस मुलाकात की फलप्रदता के लिये सम्पूर्ण विश्व के ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों से प्रार्थना का आर्त निवेदन भी किया।

वाटिकन प्रेस के निर्देशक तथा वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उक्त मुलाकात का विस्तार से विवरण दिया। उन्होंने बताया कि क्यूबा में सन्त पापा का स्वागत वैसे ही किया जायेगा जैसा कि उनकी प्रेरितिक यात्राओं दौरान किया जाता है। उन्होंने बताया कि क्यूबा के राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो तथा क्यूबा के काथलिक धर्माधिपति कार्डिनल ओरतेगा सन्त पापा के स्वागत के लिये हवाना के होसे मार्ती हवाई अड्डे पर उपस्थित होंगे।

इसके अतिरिक्त, फादर लोमबारदी ने यह भी बताया कि इस्तानबुल की ख्रीस्तीय ऑरथोडोक्स प्राधिधर्माध्यक्षीय पीठ के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष बारथोलोमियो को क्यूबा में होनेवाली इस ऐतिहासिक मुलाकात के बारे में सूचना दे दी गई है जिन्होंने इस पर गहन सन्तेष व्यक्त किया है।

स्मरण रहे कि विश्व के ढाई करोड़ ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों में रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया के अनुयायियों की संख्या एक करोड़ 65 लाख है।


(Juliet Genevive Christopher)

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आमदर्शन समारोह में संत पापा ने की ‘पाद्रे पीयो प्रार्थना दल’ से मुलाकात

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): करुणा की जयन्ती वर्ष के लिए निर्धारित आमदर्शन समारोह को आगे बढ़ाते हुए संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 6 फरवरी को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पाद्रे पीयो प्रार्थना दल के सदस्यों से मुलाकात की।

उन्होंने आमदर्शन समारोह में पाद्रे पीयो प्रार्थना दल तथा अन्य तीर्थयात्रियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ″आप कृतज्ञ हैं क्योंकि पाद्रे पीयो ने आपको जीवन का खजाना ‘ईश प्रेम’ को खोजने में मदद की है तथा प्रभु की करुणा एवं क्षमाशीलता की सुन्दरता को अनुभव करने का अवसर प्रदान किया है।

संत पापा ने करुणा के महान संत पाद्रे पीयो की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, ″निश्चय ही, हम यह कह सकते हैं कि पाद्रे पीयो करुणा के सेवक थे। उन्होंने पूरा समय मेल-मिलाप संस्कार द्वारा इसका अभ्यास किया, जैसा कि एक पिता अपने बच्चों की देखभाल करता है। उन्होंने पाप के घाव को चंगा किया तथा हृदय को शांति की ताजगी प्रदान की। प्रभु की करुणा के प्रचार के लिए अपना समय एवं शक्ति खर्च किया। वे ऐसा करने में समर्थ थे क्योंकि वे क्रूसित येसु से लगातार बल प्राप्त करते थे, इस प्रकार, वे करुणा के माध्यम बन गये। उन्होंने बहुत सारे लोगों एवं पीड़ितों को हमारे लिए अपने आप को अर्पित करने वाले ख्रीस्त के प्रेम से जोड़ दिया। पाद्रे पीयो ने हमारे लिए ख्रीस्त द्वारा उठाये गये पीड़ा के महान रहस्य को जीया। इस तरह उनकी एक बूंद करुणा की एक बड़ी नदी में परिणत हो गयी। जिसने कई मरूस्थली हृदयों को सींचा तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों में जीवन की उर्वरता प्रदान की।″

संत पापा ने कहा कि वास्तव में प्रार्थना एक मिशन है जो समस्त मानव जाति के लिए प्रेम की आग लेकर आता है। पाद्रे पीयो का कहना था कि ‘प्रार्थना एक शक्ति है जो दुनिया बदल सकती है, मुस्कान बिखेरती तथा सभी लोगों के लिए ईश्वर की कृपा प्राप्त करती है।’

संत पापा ने प्रार्थना के बारे कहा कि यह हृदय में शांति अनुभव करने का एक अच्छा अभ्यास मात्र नहीं है और न ही उन चीजों को प्राप्त करने का साधन है जिसे हम ईश्वर से प्राप्त करना चाहते हैं किन्तु अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर आध्यात्मिक करुणा का कार्य है जो सभी को ईश्वर के हृदय में समेट लेता है। यह विश्वास एवं प्रेम का वरदान है जिसकी आवश्यकता हमें उतनी ही है जितनी रोटी की आवश्यकता। संत पापा ने कहा कि पाद्रे पियो के अनुसार प्रार्थना एक सर्वोत्तम हथियार तथा कुँजी है जो ईश्वर के हृदय को खोल देती है। यह कलीसिया की सबसे बड़ी शक्ति है जिसे हमें कभी नहीं छोड़ना चाहिए जैसा कि धन्य कुँवारी मरियम तथा प्रेरितों ने किया, वे प्रार्थना में एक मन और एक दिल थे।

संत पापा ने सभी प्रार्थना दलों को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया तथा उनके समुदाय को ‘करुणा की शक्ति गृह’ कहा। उन्होंने प्रेम एवं विश्वास के साथ रोगियों की सेवा करने वालों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

विदित हो कि करुणा के दो महान संत पाद्रे पीयो तथा संत लेओपोल्द के पार्थिव शव को वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में लाया गया है जिसे 6 से 11 फरवरी तक विश्वासियों के दर्शन हेतु  खोल दिया गया है।


(Usha Tirkey)

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करुणा के महान संत पाद्रे पीयो तथा संत लेओपोल्द वाटिकन में

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2016 (वीआर अंग्रेजी): पाद्रे पीयो के नाम से विख्यात पियेत्रालचिना के संत पीयुस तथा संत लेओपोल्द मानदिक के पार्थिव शरीर को शुक्रवार शाम बड़ी भक्तिपूर्ण शोभायात्रा के साथ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर लाया गया।

दोनों महान संत कापुचिन फ्राँसिसकन फ्रायर्स तथा पुरोहितों के धर्मसमाज से आते हैं जिन्होंने पाप-स्वीकार संस्कार द्वारा कलीसिया को अपना बड़ा योगदान दिया है। उनके पार्थिव शरीर को लौरा के सन सलवातोर गिरजाघर से संत पेत्रुस महागिरजाघर में बड़े सम्मान के साथ लाया गया।

उन्हें संत पापा फ्राँसिस की इच्छा पर करूणा के जयन्ती वर्ष के अवसर पर लाया गया है ताकि मेल- मिलाप संस्कार के प्रति विश्वासियों में रूचि एवं प्रेम को प्रोत्साहन दिया जा सके।

रोम के सन सलवातोर गिरजाघर में ख्रीस्तयाग के उपरांत संतों के पार्थिव शरीर को एक सुन्दर शोभायात्रा के साथ वाटिकन लाया गया जिसका स्वागत वाटिकन के महापुरोहित कार्डिनल अंजेलो कोमास्त्री ने किया जिन्होंने एक छोटी प्रार्थना के बाद शोभायात्रा का संचालन संत पेत्रुस महागिरजाघर की ओर किया। संतों के पार्शिव शव को संत पेत्रुस महागिरजाघर में तीर्थयात्रियों के दर्शन हेतु स्थापित कर दी गयी है।

संत पेत्रुस महागिरजाघर में संतों के पार्थिव शरीर को 11 फरवरी तक रखा जाएगा।


(Usha Tirkey)

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कापुचिन पुरोहितों ने शरणार्थियों के लिए संत पापा को एक घर अर्पित किया

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): शरणार्थियों के रहने हेतु इटली के संत जोवानी रोतोन्दो स्थित एक घर को कापुचिनी पुरोहितों ने संत पापा फ्राँसिस को अर्पित कर दिया है।

5 फरवरी को जारी संत अंजेलो एवं पाद्रे पीयो प्रोविंस के फ्रायर माइनर कापुचिन पुरोहितों की प्रेस विज्ञाप्ति में कहा गया कि ″कापुचिनी पुरोहितों ने शरणार्थियों के लिए संत पापा को एक घर अर्पित किया है। यह घर ‘संत पापा फ्राँसिस घर, शरणार्थी परिवारों के लिए पाद्रे पीयो’ के नाम से जाना जाएगा।″

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह घर संत जोवान्नी रोतोनदो में स्थित है तथा पाँच आवासहीन शरणार्थी परिवारों को शरण प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा उपहार है जिसे पाद्रे पियो खुद को करूणा के आदर्श के रूप में सम्मानित किये जाने के बदले में संत पापा को एक ठोस उपहार के रूप में भेंट करना चाहते थे।

फ्रायर माइनर कापुचिन के प्रोविंशल फादर फ्राँचेस्को कॉलाचेल्ली ने यह भेंट संत पापा को उस समय अर्पित की जब 5 फरवरी को वाटिकन में संत पापा से उनकी व्यक्तिगत मुलाकात हुई।

प्रेस विज्ञाप्ति में बतलाया गया कि उपहार भेंट करने की क्रिया फा. फ्राँचेस्को कॉलाचेल्ली ने संत पापा को घर की चाभी सौंपकर पूरी की।

विदित हो कि फ्रायर माइनर कापुचिन पुरोहित गरीबों के बीच कार्यरत हैं। पाद्रे पियो जो इटली में करुणा के संत रूप में विख्यात हैं वे एक कापुचिन पुरोहित थे तथा उन्होंने पाप स्वीकार संस्कार द्वारा काथलिक कलीसिया में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया।


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने जाम्बिया के राष्ट्रपति से मुलाकात की

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 5 फरवरी को जाम्बिया के राष्ट्रपति एडगर चागवा लूनगू से मुलाकात की।

वाटिकन प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि संत पापा एवं जाम्बिया के राष्ट्रपति के बीच मुलाकात सौहादपूर्ण रही। मुलाकात में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय अच्छे संबंधों को रेखांकित किया गया।

वक्तव्य में यह भी कहा गया कि मुलाकात में विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई विशेषकर, जाम्बियाई समाज के विकास हेतु काथलिक कलीसिया का योगदान, वार्ता एवं मुलाकात की संस्कृति द्वारा शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को प्रोत्साहन, विस्थापन, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण की रक्षा आदि।

अंततः संत पापा एवं जाम्बिया के राष्ट्रपति ने कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार किया जिनमें अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला संघर्ष तथा शांति स्थापना हेतु देश का समर्पण प्रमुख रहे।

संत पापा से मुलाकात के उपरांत जाम्बिया के राष्ट्रपति ने वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन तथा वाटिकन के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गलाघेर से मुलाकात की।


(Usha Tirkey)

Church

प्रेरक मोतीः सन्त पौल मिकी (1562-1597 ई.)

वाटिकन सिटी, 06 फरवरी सन् 2016

6 फरवरी को काथलिक कलीसिया सन्त पौल मिकी एवं जापानी शहीदों का स्मृति दिवस मनाती है।

पौल मिकी एक जापानी सेना नायक के पुत्र थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा येसु धर्मसमाजियों द्वारा आत्ज़ूकी तथा ताकातसूकी में हुई थी। सन् 1580 ई. में पौल मिकी येसु धर्मसमाज में भर्ती हो गये थे। वाकपटुता में दक्ष होने के कारण थोड़े ही समय में वे एक सुवक्ता एवं प्रवचनकर्त्ता रूप में विख्यात हो गये। उनके प्रवचनों को सुन जापान के कई लोगों ने ख्रीस्तीय धर्म का आलिंगन कर लिया था।

जापान के लोगों में येसुधर्मसमाजियों के प्रभाव से भयभीत उस युग के जापानी सम्राट तायको टोयोटोमी हिदेयोशी ने ख्रीस्तीयों को उत्पीड़ित करना आरम्भ कर दिया था। पहले तो केवल कुछेक प्रतिबन्ध ही लगाये गये जैसे सार्वजनिक स्थलों पर धर्म की बात न करना आदि किन्तु बाद में ख्रीस्तीय धर्म के प्रति लोगों की रुचि को देखते हुए सम्राट ने दमन चक्र आरम्भ कर दिया। पौल मिकी के साथ साथ अन्य अनेक पुरोहितों एवं धर्मप्रचारकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। कारावास में उन्हें यातनाएँ दी गई किन्तु ख्रीस्तीय धर्मानुयायी अपने विश्वास मज़बूत होते रहे। थक कर सम्राट ने सभी ख्रीस्तीय क़ैदियों को क्योटो से नागासाकी तक यानि लगभग 600 मील दूर तक पैदल यात्रा का आदेश दे दिया। इस यात्रा के दौरान भी पौल मिकी एवं उनके साथी ते देयुम यानि प्रभु के आदर में धन्यवाद का गीत गाते चलते गये।

काथलिक बहुल नागासाकी शहर पहुँचने पर सम्राट ने पौल मिकी एवं उनके साथियों पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया तथा 05 फरवरी सन् 1597 ई. को उन्हें सबके सामने क्रूस पर ठुकवा दिया। पौल मिकी ने अपना अन्तिम प्रवचन क्रूस से ही किया। प्रवचन द्वारा उन्होंने अपने आततायियों को भी क्षमा कर दिया। पौल मिकी के साथ साथ सम्राट ने दो अन्य येसु धर्मसमाजी  जोन सोआन तथा सान्तियागो किसाई को भी क्रूसित करने का आदेश दे दिया। इनके अतिरिक्त, इसी दिन 23 अन्य काथलिक पुरोहित, धर्मबहनों एवं लोकधर्मी धर्मशिक्षकों को क्रूसित कर मार डाला गया था। पौल मिकी सहित जापान के इन सब शहीदों के वीरोचित गुणों को मान्यता देकर सन्त पापा पियुस नवम ने, सन् 1862 ई. में, इनहें सन्त घोषित कर वेदी का सम्मान प्रदान किया था। पौल मिकी एवं जापानी काथलिक शहीदों का पर्व, 06 फरवरी को, मनाया जाता है।

चिन्तनः “प्रभु मेरा चरवाहा है, मुझे किसी बात की कमी नहीं। वह मुझे हरे मैदानों में बैठाता और शान्त जल के पास ले जाकर मुझ में नवजीवन का संचार करता है। अपने नाम के अनुरूप वह मुझे धर्ममार्ग पर ले चलता है। चाहे अँधेरी घाटी हो कर जाना पड़े, मुझे किसी अनिष्ट की शंका नहीं, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है। मुझे तेरी लाठी, तेरे डण्डे का भरोसा है। तू मेरे शत्रुओं के देखते-देखते मेरे लिये खाने की मेज़ सजाता है। तू मेरे सिर पर तेल का विलेपन करता और मेरा प्याला लबालब भर देता है। इस प्रकार तेरी भलाई और तेरी कृपा से मैं जीवन भर घिरा रहता हूँ। मैं चिरकाल तक प्रभु के मन्दिर में निवास करूँगा”  (स्तोत्र ग्रन्थ 23)।


(Juliet Genevive Christopher)

Church

How can we get single men and husbands to be interested in church and ministry?

Consider this passage from William Lane Craig’s April 2013 newsletter, which made me very excited and happy. (H/T Triablogue)

Here it is:

One overwhelming impression of these engagements is the way in which the intellectual defense of Christian faith attracts men.

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Apologetics