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A Feminist Reading Of Baburao Bagul’s Mother: A Story Of Dual Oppression

Author Baburao Bagul, a pioneer of Marathi Dalit literature, in his short story titled Mother, lends a voice to motherhood and widowhood experienced by a lower caste Dalit woman. 757 more words

Saharanpur protests herald a new phase in Uttar Pradesh’s dalit politics

BJP is making inroads among Dalits but at the same time, Dalits come together when they are attacked

Saharanpur, a district known for its woodcraft products in western UP, is in the news for two caste and communal incidents, involving clashes with Dalits. 364 more words

Current Affairs

Saharanpur protests herald a new phase in Uttar Pradesh's dalit politics

BJP is making inroads among Dalits but at the same time, Dalits come together when they are attacked

Saharanpur, a district known for its woodcraft products in western UP, is in the news for two caste and communal incidents, involving clashes with… 268 more words

News

दंगों की आग झेल रहा सहारनपुर सतही तौर पर भले ही दलितों और ठाकुरो के बीच की जातीय हिंसा लगे पर इसकी तह पर बहुत बड़ी राजनीतिक साजिश की बू आती है। हज़ारों वर्षो के भारतीय इतिहास को अगर पलट कर देखे तो आप पाएंगे कि आज़ादी के 70 वर्षो बाद पहली बार ऐसा लग रहा था कि पूरा देश हिंदुत्व के साये में जातीय बेड़ियों को तोड़कर एकता के गठबंधन में बंधकर एकता के रास्ते पर अग्रसर होना चाहता है।

पर इससे पहले की इस गठबंधन को मजबूती मिलती हैदराबाद विश्वविद्यालय से रोहित वेमुला की आत्महत्या की खबर आती है और राष्ट्रीय पटल पर यह चर्चा का विषय बन जाता है कि देश में दलितों के साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें इस प्रकार से शोषित किया जा रहा है कि उन्हें आत्महत्या पर विवश किया जा रहा है। इस पर जेएनयू से लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय तक वामपंथी छात्रसंगठनों, राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संस्थानों ने जमकर राजनीतिक रोटियां सेकी। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी, कन्हैया कुमार जैसे नेता धरने पर भी बैठे पर बाद में यह पता चला रोहित वेमुला दलित था ही नही और दलित के नाम पर ये नेता समाज में विद्वेष पैदा कर रहे थे।

दूसरी घटना सामने आई गुजरात से जहां कुछ असामाजिक तत्वों ने गौरक्षा के नाम पर दलितों की पिटाई की। राजनीतिक दलों ने इस घटना का आरोप आरएसएस पर लगाया जबकि आरएसएस देश में एकमात्र ऐसी संगठन है जो जातीय बंधन को तोड़ने के लिए पिछले 91 वर्षो से कार्य कर रही है। आरएसएस ने न सिर्फ इस आरोप का खंडन की बल्कि उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्यवाही की भी मांग की। आरएसएस पर आरोप एक खास मकसद से योजना के तहत लगाया गया ताकि आरएसएस को अगड़ी जातियों का हितैषी बताकर दलितों और अन्य जातियों में जाति की खाई को और गहरा किया जा सके।

सहारनपुर दंगा भी इसी श्रेणी में जातीय खाई को बढ़ाने वाली एक राजनीतिक साजिश से ज्यादा कुछ और प्रतीत नही होती है। भीम सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर अपनी राजनीतिक महत्वाकांशाओं को प्राप्त करने और राष्ट्रीय पटल पर आने के लिए दलित समुदाय को भड़काने का काम कर रहा है। यह बात किसी से छुपी नही है कि भीम सेना या फिर इस तरह के और अन्य दलित संगठन उत्तरप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के लिए कार्य करती है। पिछले चुनावों में बहुजन समाज पार्टी की हार की एक मुख्य वजह दलितों का बीजेपी की तरफ झुकाव था। चूंकि अगले महीने पूरे उत्तरप्रदेश में नगर निकायों के चुनाव होने वाले है, इसलिए दलितों के वोटबैंक को अपने तरफ झुकाने और अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से तराशने के लिए दलितों और राजपूतो में दंगे करवाये जा रहे है और इसका मुख्य चेहरा बना है चंद्रशेखर। चंद्रशेखर के नेतृत्व में 180 दलितों ने अब तक बौद्ध धर्म को अपनाया है और अन्य लोगो ने धमकी दी है कि वो इस्लाम कबूल लेंगे।

प्रदेश की योगी सरकार को जल्द से जल्द इस स्तिथि को सम्हालना होगा जिससे कि हिंदुओं में पड़ने वाली आपसी फूट को रोका जा सके।

Political

सहारनपुर हिंसा: दिल्ली में शुरु हुआ दलितों का विरोध प्रदर्शन

सहारनपुर के शब्बीरपुर की घटना के विरोध में सामने आई भीम आर्मी के हजारों समर्थक जंतर मंतर पर इकट्ठा हो रहे हैं। पूर्व जानकारी के मुताबिक आज जंतर मंतर पर भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पहुंचने वाले हैं।

आपको बता दें कि भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद (रावण) ने कुछ दिन पहले एक ऑडियो जारी कर जंतर मंतर पर लोगों से पहुंचने का आह्वान किया था। उनके इस आह्वान पर हजारों लोग पहुंच चुके हैं और अभी लोगों के आने का सिलसिला जारी है।

इस ऑडियो की वजह से उनपर साइबर सेल द्वारा आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शनिवार को चंद्रशेखर की तलाश में दिल्ली सहित कई जगहों पर छापेमारी की। लेकिन उसे नाकामयाबी हाथ लगी।

भीम आर्मी को पूरे देश से लोगों का समर्थन मिल रहा है। देशभर में लोग भीम आर्मी के समर्थन में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मेरठ, महाराष्ट्र और गोरखपुर के लोग भीम आर्मी के समर्थन में सड़कों पर उतर आए थे अब वे दिल्ली पहुंच रहे हैं।

आपको बता दें कि 5 मई को ठाकुरों ने महाराणा प्रताप की शोभायात्रा के बहाने खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया। वे डीजे लेकर दलितों की बस्ती में पहुंचे। वहां उनसे आवाज कम करने को कहा तो वे भड़क गए और रविदास मंदिर व बाबा साहब की प्रतिमा की तोड़फोड़ शुरू कर दी। इतना ही नहीं तलवारधारी पुलिस की मौजूदगी में भी उत्पात मचाते रहे और दलितों के घरों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी।

नेशनल दस्तक ने शब्बीरपुर गांव जाकर रिपोर्टिंग की तो वहां एक भी घर ऐसा नहीं मिला जिसमें ठाकुरों ने तोड़फोड़ नहीं की। यहां 25-30 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। महिलाओं के स्तन काटने की कोशिश की गई। बच्चों को आग में फेंकने का प्रयत्न किया। इस मामले में कार्रवाई न होने पर भीम आर्मी सामने आई थी।

संपादन- भवेंद्र प्रकाश, नेशनल दस्तक ब्यूरो

Is Diminishing Democracy Giving Way to MOBOCRACY?

The democratic essence of our country has been put under severe attack during Modi regime. Such attack is not a new phenomenon in Indian history but the way through which the attack has been carried out in recent time demands for our serious attention. 360 more words

People's Movements Demand Revocation of Suspension of Dalit Asst. Jail Superintendent, Varsha Dongre

The  NAPM (National Alliance of People’s Movements) has written the following letter, signed by many movements and orgnizations, to the Governor and the Chief Minister of Chhatisgarh… 1,716 more words

Politics