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अम्बेड़कर या भगवान अम्बेड़कर

एक बडा सा छायादार वृक्ष, हर कोई उसकी छाया मे बैठ सके, आराम कर सके. फिर प्रवेश होता है परजीवियों का अमरबेल कह लो, वो धीरे धीरे सारे वृक्ष पर छाती चली जाती है.

Political

शिक्षा, संघठन और संघर्ष

पहली पंक्ति मे गलियारे के पास वाली कुर्सी पर बैठा हूं, सारी कुर्सियाँ भरी हुई हैं. आईआईटी, एमबीबीएस, सीए, कमर्शियल पायलट, न्यायिक सेवा, आईएएस और भी न जाने कितनी ही परीक्षाओं मे परचम लहराने वाले दलित मित्र आए हैं.

Political

This Land Is Our Land!

In a remote corner of Uttar Pradesh, Adivasis and Dalits are standing up against great odds to fight starvation by reclaiming forestland for collective farming… 375 more words

Tribals

गांधी और अंबेडकर के एक होने का वक्त आ गया है - Rakesh Kayasth

इतिहास के कुछ कालखंड निर्णायक होते हैं। हम एक ऐसे ही निर्णायक कालखंड में दाखिल हो चुके हैं। यह समय बीसवीं सदी के दो सबसे प्रखर बौद्धिक विचारों के एक होने का है। वो विचार जिन्हे हमेशा दो अलग ध्रुव माना गया और दोनो अलग-अलग रहे भी। ये विचार हैं, गांधीवाद  और अंबेडकरवाद। तीस के दशक में गांधी और अंबेडकर के बीच गहरा वैचारिक और राजनीतिक टकराव हुआ। नतीजे में पूना पैक्ट सामने आया। तकनीकी तौर पर गांधी जीते और अंबेडकर हारे। लेकिन असल में कौन हारा, ये सवाल अब भी कायम है। गांधी के जाने के बाद गांधीवाद लाइब्रेरी और म्यूज़ियम में रखी जानेवाली चीज़ बन गया। लेकिन कांग्रेसी सरकारों द्वारा लगातार हाशिये पर डाले जाने की कोशिशों के बावजूद अंबेडकर दिलों में जिंदा रहे। उनकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई। ये अलग बात है कि अंबेडकर एक प्रेरक व्यक्तित्व ज्यादा रहे, उनके राजनीतिक विचारो को समग्र रूप से समझकर उन्हे अमली जामा पहनाने के लिए बड़ी और संगठित लड़ाई उस तरह नहीं लड़ी गई जिस तरह लड़ी जानी चाहिए थी। अंबेडकरवाद के वारिस गांधी से अपनी राजनीतिक दुश्मनी आजतक निभा रहे हैं। कड़वाहट का आलम ये है कि अंबेडकरवादी गांधी से उस आरएसएस के मुकाबले कहीं ज्यादा नफरत करते हैं, जो आज़ादी के बाद से ब्राहणवादी विचारों का सबसे बड़ा  प्रतिनिधि है। 9 more words

The Feminist

Bhartiya Janta Party is now a more surprising house than the ‘Big Boss’ television show. With the announcement of Yogi Adityanath as 21st chief minister of India’s most significant electoral state, the saffron party has left the nation with another wave of shocks . 733 more words

India

Discrimination hits all

An unfortunate suicide by a   Jawaharlal Nehru University scholar,  named Muthukrishnan, was reported on Monday this  13th March. His being a Dalit  revived memories of another suicide by a Dalit scholar, Rohith Vermula, in another University  over a year ago. 724 more words