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दिल्ली पुलिस ओला, उबर और ड्राइवरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे: हाईकोर्ट

नई दिल्ली। ओला और उबर के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को कैब कंपनी और कैब ड्राइवरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने को कहा है। कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखें।

हाईकोर्ट ने दोनों ड्राइवर्स यूनियन से कहा कि वे इस बात को अपने मन से निकाल दें कि जिस तरीके से वो सरकार से अपनी बात मनवा लेते हैं वैसे ही वो इन कंपनियों से करवा लेंगे। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण व्यापारिक समझौतों के अलावा अपनी मांगें रखने का कोई रास्ता नहीं है।

दूसरी तरफ दिल्ली सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन और राजधानी टूरिस्ट ड्राइवर्स यूनियन ने इन हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया है। वहीं राजधानी यूनियन के कहा कि वो सिर्फ टूरिस्ट कैब को ऑपरेट कर रही है। इन हिंसक घटनाओं से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

कोर्ट ने यूनियन को समझाया कि अगर ये हिंसक घटनाएं जारी रहेंगी तो लोगों का विश्वास उनपर से उठ जाएगा और आखिरकार नुकसान आप लोगों का ही होगा। लोग ट्रांसपोर्ट के दूसरे विकल्प खोज लेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर यूनियन को लग रहा है कि ओला और उबर उन्हें कम पैसे दे रही है तो उनके पास ब्लैक और येलो टैक्सी चलाने का विकल्प खुला है।

राज्य

3 years jail term for UNITECH’s chairman Ramesh Chandra along with 2 MDs

Chandigarh: Ramesh Chandra and 2 MDs of Unitech group are sentenced to 3 year imprisonment by the Chandigarh Consumer Disputes Redressal Commission for delaying possession of a plot buyer in Unitech’s Aspen Greens project in Sector 107, Uniworld, Mohali. 97 more words

Tughlaqabad Fort area updates by Jagmohan Garg Delhi

Communicating worry over uncontrolled unlawful development around the Tughlaqabad Fortress region, in spite of an Incomparable Court restriction on it, the Delhi High Court Wednesday precluded all land exchanges and building exercises in the region of the fortification. 64 more words

Jagmohan Garg

Jagmohan Garg speak out about High court reply on gutka ban

Jagmohan Garg says High Court seeks Delhi government’s reply on PIL for strict implementation of ‘gutka’ ban.

Strict usage of the restriction on “gutka” and other chewable tobacco items in the national capital went under scanner of the Delhi High Court, which today looked for the reaction of the AAP government. 137 more words

News

Shouldn’t the PMO lead by example by paying its dues to Air India?

The Central Information Commission (CIC), being a quasi-judicial body had the jurisdiction to hear an RTI plea filed by activist Commodore (Retd) Lokesh Batra under section 18 of the RTI Act in presence of PMO & the Ministry of External Affairs on 3rd January. 578 more words

Section 24(5) declared void

Section 24(5) of the Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Act, 2001, has been declared void by the Delhi High Court. Prabhat Agri Biotech Ltd, Nuziveedu Seeds (P) Ltd and Kaveri Seed Company Ltd. 500 more words

एडमिन हैं? तो ये राहत की खबर है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक ताजा आदेश में कहा कि व्हाट्सएप्प और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली चैटिंग के दौरान ग्रुप के किसी सदस्य द्वारा पोस्ट की जाने वाली किसी आपत्तिजनक सामग्री के लिए उस ग्रुप के एडमिन को दोषी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसे ग्रुप्स में किसी भी प्रकार की सामग्री पोस्ट करने से पहले एडमिन की रजामंदी जरुरी नहीं होती है, तो किस प्रकार एडमिन को दोषी माना जाए। दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज की बेंच ने अवमानना के एक मामले को ख़ारिज करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने कहा कि एडमिन, ग्रुप के सदस्यों से सिर्फ आग्रह कर सकता है कि वे ऐसी सामग्री न पोस्ट करें।

इस फैसले से ऐसे तमाम लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्हें महज एडमिन होने की वजह से, किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर, किसी चैट ग्रुप में किसी सदस्य द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देश भर में व्हाट्सएप्प को लेकर ऐसे कई मामले सामने आए, जहाँ किसी चैट ग्रुप के किसी सदस्य के आपत्तिजनक पोस्ट के लिए एडमिन को भी जिम्मेदार मानते हुए उसके खिलाफ भी पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और कुछ मामलों में गिरफ़्तारी भी हुई। बीते जून महीने में इंदौर में कथित तौर पर व्हाट्सएप्प ग्रुप के जरिए शहर का माहौल खराब करने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने ग्रुप एडमिन पर सख्ती शुरू कर दी और इसी के चलते तीन ग्रुप एडमिन को पुलिस की ओर से नोटिस भेज दिया गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बीते साल एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट किया। इसी ग्रुप के एक सदस्य की शिकायत पर उस आरोपी को तो गिरफ्तार किया ही, बल्कि एडमिन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। अक्टूबर महीने में आगरा में एक व्हाट्सएप्प ग्रुप के एडमिन को भी इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उस ग्रुप के एक सदस्य ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट कर दिया था। इसके बाद इस बात को लेकर सवाल भी खड़े हुए थे कि किसी मेंबर की पोस्ट के लिए एडमिन किस प्रकार जिम्मेदार हो सकता है। हालाँकि ये भी कहा गया कि एडमिन किसी सदस्य की किसी आपत्तिजनक पोस्ट के लिए दोषी नहीं हो सकता, लेकिन ये उस ग्रुप के एडमिन व अन्य सदस्यों का कर्तव्य बनता था कि वे कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले या किसी आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले किसी सदस्य के पोस्ट की शिकायत करे और एडमिन वैसे मेंबर को तुरंत उस ग्रुप से हटाए।

व्हाट्सएप्प को हमारे देश में करोड़ों लोग प्रयोग में लाते हैं और आज यह सोशल मीडिया का यह सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन चुका है। एक व्यक्ति अपने मोबाइल फोन के जरिए कई व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ा होता है या फिर उसका एडमिन होता है। इसके बावजूद हमारे देश में सोशल मीडिया या सोशल मैसेजिंग ऐप्स के लिए अलग से कोई कानून नहीं है। इन मामलों में आईटी एक्ट के तहत ही कार्रवाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर आईपीसी की धाराओं में भी केस दर्ज किया जाता है।