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Colin Craig...innocent victim or narcissistic manipulator?

So it all came out yesterday that, after several threats of legal action against numerous figures during his short public career, Colin Craig will finally be taking someone to court…or so he says. 649 more words

Politics

वो किसी मजहब के नहीं, देश के मसीहा थे

देश को विजन 2020 के सहारे आगे बढ़ने का हौसला देने वाले पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने दुनिया से विदा क्या ली, वैचारिक आतंकियों ने उनके नाम से सोशल मीडिया पर अपनी दुकानें सजा ली हैं. दे दनादन स्टेटस के धमाके करके उनकी आत्मा पर चोट कर रहे हैं. कोई उनके मजहब को लेकर टिप्पणी कर रहा है तो कोई उनके काम पर सवाल उठा रहा है और हवाला दिया जा रहा है कि कलाम साहब को चापलूसी नहीं पसंद थी.

अपने आप को एक खास तबके का मसीहा और बहुत बड़ा विचारक मानने वाले एक सज्जन ने फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए कहा- ‘कलाम साहब ने पोखरन में जो परमाणु मिशन आगे बढ़ाया वह गलत था और उसकी वजह से पाकिस्तान को मौका मिल गया हथियार बनाने का और अपनी शक्ति बढ़ाने का. इसका नतीजा मुंबई में आतंकी हमले के रूप में देखा गया.’

इन साहब को अगर जरा सी भी अक्ल होती तो शायद वो भूलकर भी ऐसी वाहियात बात कभी न करते. जिस शख्स ने इस देश को मिसाइल की ताकत दी, जिस शख्स ने इस देश के लिए अपनी जिंदगी का हर पल दिया, जिस शख्स ने आखिरी सांस तक देश के तमाम युवाओं को प्रेरणा दी, आपको उनकी काबिलियत पर सवाल उठाते हुए थोड़ी सी शर्म तो आनी चाहिए.

आपको क्या लगता है कि अगर पोखरन में परमाणु परीक्षण न होते तो पाकिस्तान हथियार नहीं बनाता? या पाकिस्तान में आतंकवाद नहीं पनपता? शायद आपके दिमाग की नसें कमजोर हो गई हैं और आप याद नहीं कर पा रहे हैं कि इसी पाकिस्तान से लाए गए हथियारों के जरिए 1993 में मुंबई दहली थी. तब कलाम साहब ने ऐसा कुछ नहीं किया था कि पाकिस्तान हथियार बनाने लगे. मुंबई में हमले के 5 साल बाद कलाम साहब ने पोखरन पार्ट 2 शुरू किया था.

फेसबुक पर ही इस कथित विद्वान शख्स ने कलाम साहब की एक तस्वीर शेयर करके उस पर धर्म और जाति का चोला डालने की कोशिश भी की. इस शख्स को इतनी भी अक्ल नहीं है कि कलाम साहब वहां अपनी मर्जी से गए, वहां अपनी मर्जी से बैठे जमीन पर. और जब कलाम साहब को इस बात से तकलीफ नहीं हुई तो आप कौन होते हैं उन पर सवाल उठाने वाले? आपके दिमाग में कचरा भरा है तो उसके लिए आप कलाम साहब के नाम का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?

कलाम साहब को चापलूसी पसंद नहीं थी अगर आप ये बात जानते थे तो उनके जीते जी आपने ये सारे सवाल क्यों नहीं किए? आप एक ऐसे ओहदे में थे जहां से कलाम साहब से मिलना आसान था, फिर भी आप अपनी इन वाहियात बातों को फेसबुक पर लिखने के लिए उनके मरने का इंतजार करते रहे? धारा के विपरीत चलने का दम तो भर रहे हैं लेकिन जिस विपरीत धारा में आप जा रहे हैं वो एक गंदा नाला है और आपकी हालत देखकर लगता है कि अब आप अपनी उजड़ी हुई दुकान किसी तरह बसाना चाहते हैं, लाचार हैं, मजबूर दिखते हैं लेकिन कम से कम उस शख्स की काबिलियत का मजाक मत उड़ाइए जो देश के लिए प्रेरणा है, एक मिसाल है.

एक पार्टी के प्रवक्ता और चुनाव में जमानत जब्त करा चुके तथाकथित नेता ने तो उनके नाम पर ‘आम आदमी’ वाला पेंट चढ़ाने की कोशिश की और एक नौसिखिए व्यंग्यबाज ने उन्हें इस्लाम से जोड़कर पेश किया. इन सब महामूर्खों को धन्यवाद देता हूं कि आखिरकार इन सब ने अपनी असली पहचान तो जाहिर कर दी. कलाम साहब इस देश की प्रेरणा थे, हैं और रहेंगे. उन्होंने जो किया उसके लिए किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.

आधा-अधूरा

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The Standard

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There are a number of important issues in the current Hager case in the High Court.

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Politics