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काम वाली बाई भी इंसान है

आज मेरी कामवाली ने कहा-” आंटी में कल सफाई करने नहीं आऊंगी।”

मैंने मुस्कुराकर कहा- “क्या करेगी।”

तो उसने कहा-” आराम करूंगी ।”

मैंने कहा -“अभी तो 15 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन तो तूने छुट्टी ली थी।” 279 more words

Blogging

बहू को भी स्वीकार करें

रविवार को मैं अपने पति के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नारनोंद शाखा में गई। वहां पर मेरे पति के गांव से आए एक बुजुर्ग दंपत्ति मिले। मेरे पति ने उन्हें प्रणाम करते हुए पूछा-” और ताई कैसी है?” 149 more words

Blogging

सब कृष्ण हो जाएं

सबको कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

कृष्ण ऐसे देवता हैं जो जीवन को समग्रता से जीने का संदेश देते हैं।अपनी बांसुरी की मधुर तान से जीवन में आनंद, मस्ती और प्रेम का संदेश देते हैं तो दूसरी तरफ सुदर्शन चक्र धारी कृष्ण आतताइयों के आगे न झुकने का भी संदेश देते हैं ।कृष्ण हमें दोस्ती निभाना सिखाते हैं, प्रेम करना सिखाते हैं, सुख दुःख भोगते हुए निर्लिप्त रहना सिखाते हैं, मुस्कुराना सिखाते हैं, जिंदगी जीना सिखाते हैं और सत्य की रक्षा करना सिखाते हैं । 12 more words

Blogging

SHE HAD A SHY TONGUE

By Charles Robert Lindholm

She had a shy tongue

before she met him

she was young, but not a child

unaware of lust and loving 135 more words

Poetry

What are benchmarks for...

any way and why, should they be the reason you stay, if they snatch from your identity, only push you to become the “next” Justine Hénin-Hardenne? 115 more words

Postaday

औरत अपने शोषण के लिए स्वयं जिम्मेदार है

रविवार को मैं शोक प्रकट करने के लिए गांव गई। वहां एक परिचित मिले जिन की बेटी का तलाक का केस चल रहा था। मैंने वजह जाननी चाही तो पता चला कि पति के किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध है और वह उनकी बेटी को मारता पीटता है ।घर से बाहर कदम नहीं रखने देता। खुद दुकान पर जाता है तो घर के बाहर लॉक लगा कर जाता है ताकि वह किसी आस पड़ोस की महिला से ना मिल सके। उसकी एक बेटी हो चुकी है अब वह है पति सेअलग होने के लिए तीन लाख रुपए का मुआवजा चाहती है किंतु पति ने धृष्टता से कहा है कि जेल जाना मंजूर है किंतु मेरे पास देने के लिए कोई पैसा नहीं। लड़की एक साल से मायके बैठी हुई है ।उनके साथ घर में उनका देवर भी रहता था देवर बड़े भाई के कदमों पर चलते हुए यदा-कदा भाभी पर हाथ उठाना अपना अधिकार समझता था ।परिचितने दुखी स्वर में कहा कि बेटी का पति तो सौ बार उस पर हाथ उठाएं पर वह देवर की मार कैसे खाएं ।यह सवाल देवर या पति का नहीं है यहां सवाल घरेलू हिंसा का है यहां सवाल जीवन के अधिकार का है क्यों समाज पति को पत्नी का जीवन साथी ना बनाकर मालिक बना देता है और उसे पिटाई करने का जन्मसिद्ध अधिकार दे देता है ।समाज में किसी महिला की पिटाई हो महिला के विरुद्ध घरेलू हिंसा तो कोई आश्चर्य की बात नहीं मानी जाती खासकर हरियाणवी समाज में तो काफी हद तक यह बात सही है।समाज कभी विरोध में नहीं खड़ा होता कि महिला भी पुरुष की तरह ही परमात्मा के द्वारा पैदा की गई है उसे भी जीवन का हक है ।अगर गलती भी हो जाए तो समझाना तो बनता है किंतु मारना पशुता है। क्या कभी किसी पुरुष को गलती करने पर पीटा जाता है? 142 more words

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