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Purpose

The memories of the lives of great men and women are eternally etched into the fabric of human history, not because they dedicated their lives to serve a purpose that uplifted the masses, but because the purpose that consumed their lives, served to uplift the masses.

Reflection

How many times have you been mistaken for someone else in a crowd or when you are missing someone so dearly that you are constantly looking for bits of him in other people.I guess ” The out of sight, out of mind” analogy doesn’t work for the people who are longing for their lost ones.Love always leaves a deep impression on your soul, which is hard to forget. 201 more words

Poetry

Book Review : Hiraeth by Shivani Salil

Title : Hiraeth Partition stories from 1947

Author : Dr Shivani Salil

Book Blurb : What would you do if you were told you had minutes to leave your home? 709 more words

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हिन्दी हमारी पहचान है

आज विश्व हिंदी दिवस है। आज ही के दिन 10 जनवरी 1975 को प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में इच्छा व्यक्त की गई थी कि हिंदी विश्व की सबसे समर्थ और वैज्ञानिक भाषा है, यह है विश्व की भाषा बने और पूरे विश्व में इसका प्रचार-प्रसार हो। आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने 2006 में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी तब से 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रेप में मनाया जा रहा है।हिंदी अपनी सभी क्षेत्रीय बोलियों के साथ अत्यंत समृद्ध भाषा है ।इसका प्रचार साहित्य उपलब्ध है। कबीर, नानक मलिक मोहम्मद जायसी, तुलसीदास ,सूरदास आदि से लेकर मैथिलीशरण गुप्त, रामनरेश त्रिपाठी ,प्रसाद, पंत निराला ,महादेवी ,अज्ञेय, नरेंद्र शर्मा जैसे अनेक माणिक्य हिंदी की माला में जुड़े हुए हैं ।हिंदी विश्व की बोली जाने वाली दूसरी भाषा है वर्तमान समय में हिंदी लोकप्रियता के चरम शिखर को छू रही है ।क्षेत्रीय और विदेशी बोलियों को अपने अंदर समाहित करने की लचकता के कारण हिंदी गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों और विदेशों में दिन-ब-दिन लोकप्रिय होती जा रही है। हिंदी हर भारतवासी का गौरव है हर दिल की आवाज है। राष्ट्रभाषा और राजभाषा के रूप में हिंदी हमारे मस्तक की शान है विश्व के मानचित्र पर हमारी पहचान है।

Blogging

Live like there's no tommorow...

My earliest brush with death was when I was around 17 years old. I lived in a small community, a college or professors colony which had just 17 houses then. 483 more words

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