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हरफरौरी है गुणों की खान

आमतौर पर सजावटी पेड़ की तरह लगाया जाने वाला हरफरौरी का पेड़ अब शहरों के साथ गावों मे भी कम दिखाई पड़ने लगा है। परंतु आदिवासी क्षेत्रों में ये आसानी से उपलब्ध है। आदिवासी क्षेत्रों में पहले से लेकर आजतक इसका इस्तेमाल भोजन में होता आ रहा है। इसके अलावा जिन भी क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होता रहा है या आज भी हो रहा है वहाँ सामन्य तौर पर इसका आचार या चटनी ही बनाई जाती है या फिर लोग नमक के साथ इसके कच्चे और पके फल ऐसे ही खाते हैं। ये बिलकुल वैसे ही है जैसे लोग कच्ची या पकी इमली को नमक के साथ खाते है। हरफरौरी का फल भी खट्टा होता है। इसका स्वाद आँवले से मिलता जुलता होता है।बहुत से देशों में हरफरौरी का मुरब्बा, जैम और शर्बत भी बनाया जाता है। हरफरौरी का फल आकार में बहुत छोटा,गोल-चपटा और धारियों से कई भागों में बंटा होता है। इसका कच्चा फल हरे रंग का और पका फल बहुत हल्का पीला (पेल येलो) होता है। इसके फल साल में दो बार लगते हैं पर थोड़े बहुत फल पूरे साल पेड़ में लगे हुए भी मिल जाते हैं। 16 more words

Diet

11 Impressive Benefits of Horseradish 

Benefits of horseradish include its ability to aid weight loss, lower blood pressure, build strong bones, boost the immune system, and stimulate healthy digestion.

Horseradish is a powerful and pungent plant that is connected to a wide variety of health benefits, including its ability to aid weight  243 more words

Weight Loss

महुआ एक लाभ अनेक

महुआ जिसे बंगाली, गुजराती, मराठी और हिन्दी में महुआ, कन्नड़-हिप्पे (hippe), मलयालम-पूनामिलुपा (poonamilupa), उड़िया-महुला (mahula), तमिल-इलुप्पाई (iluppai), तेलगु -इप्पा (ippa) कहते हैं; आदिवासियों के लिए वरदान माना जाता है। आदिवासी समुदाय अपनी भूख से लेकर इलाज तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसके तने की छाल, पत्तियों से लेकर फूल, फल, और बीज तक इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण अंचलों के अलावा शहरी क्षेत्रों के भी काफी लोग इससे परिचित ही होंगे। हिंदुओं में मनाए जाने वाले हलछठ में महुआ के फूल दही के साथ पूजा में चढ़ाये जाते है। सामान्यतः महुआ का इस्तेमाल उसके कच्चे फलों की सब्जी के रूप में ही ज्यादा होता है परंतु पहले इसका भोजन में इस्तेमाल इसके फूल से शुरू होकर पके फल पर आकर समाप्त होता था। फूल के रस से पुए और सूखे फूल से लड्डू बनाने का बहुत प्रचलन था। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में फूल से चटनी और रस से गुड़ भी बनाया जाता था या लोग फूल को पीस कर रोटी के आंटे मे भी मिला लेते थे। कच्चे फूल को भूनकर भी खाया जाता था। पहले इन पकवानों का बहुत प्रचलन था परंतु अब यह कुछ क्षेत्रों और समुदायों तक ही सिमट कर रह गया है । महुआ के कच्चे फल की सब्जी और पके फल को लोग ऐसे ही खाते थे और आज भी जिन घरों मे इसका प्रचलन है वहाँ पर लोग इसे ऐसे ही खाते हैं। महुआ के फूल को सुखाकर लोग लंबे समय तक रख लेते हैं परंतु इसका प्रयोग भोज्य पदार्थ की तरह कम अन्य व्यावसायिक संदर्भों में ज्यादा होता है। 13 more words

Diet

COCOA

Cocoa, well, this plant is for deep fat elimination. I am not should of how much you have to consume for it to work properly. I tried it but I don’t know of how it was working. 332 more words

Health

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NASA scientists have found a wide diversity of minerals in the initial samples of rocks collected by the Curiosity rover in the lowermost layers of Mount Sharp on Mars, suggesting that conditions changed in the …Read more NASA Finds Evidence of Diverse Environments in Curiosity Samples… 23 more words

Diuretic

Lifestyle and Dietary Revelations Part III

Avoid Drinking Water From Plastic

Plastic has thalates which seep into your water.

I’ve recently switched to glass and have started using a glass jug. 788 more words

Stress