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My daughter was talking about her Summer holidays today and I was explaining to her that I wouldn’t be going back to school after the Summer holidays this year. 422 more words

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Educational Photo Freebies!

I’ve got a few free educational PDF’s in the works. I’d love a little feedback from you though! What do you want to know more about?  25 more words

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Why You Should Buy Cheap Over Expensive Wine (VIDEO)

I COULD HAVE TOLD YOU THIS ONE! But the studies behind it in the video make me feel slightly better about ALWAYS going for the box over the bottle. 128 more words

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उलझन 12वीं के बाद का....

पड़ोस में एक लड़की रहती है। इसी साल किसी अच्छे प्राईवेट स्कूल से 90 फीसदी अंकों के साथ साइंस से 12वीं की परीक्षा पास की है। परिवार के सदस्यों से अच्छी खासी बातचीत होती है इसलिए जिज्ञासावश उससे आगे भविष्य की योजना के बारे में पूछ बैठा। उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि पापा कह रहे है एक साल आईआईटी की कोचिंग ले लूं लेकिन मेरा मन है डीयू के किसी कॉलेज से फिजिक्स ऑनर्स कर लूं। बाद में तो आईएएस ही बनना है।

जबाव सुनते ही मै अपने अतीत में चला गया। कुछ अपनापन सा लगा। ऐसा लगा कि हर घर की एक ही कहानी होती है। यह समय होता है घर से बाहर निकलकर व्यवहारिक जिंदगी देखने का,यह समय होता है अपने पंखरुपी पैर को पसार कर उड़ान भरने का और अगर किसी ने इसमें बाधा पहुंचाने की कोशिश की तो वह सबसे बड़ा दुश्मन नजर आता है बेशक वह सही ही क्यों ना हो।

अभी रिजल्ट का मौसम चल रहा है। सीबीएसई से लेकर अन्य बोर्ड के रिजल्ट भी आ रहे हैं। रिजल्ट का यह मौसम किसी के लिए गुलजार तो किसी के लिए सूखा भरा है। लेकिन हर किसी का अपना सपना है। उम्र के साथ साथ बच्चों के ख्वाब भी जवां हो रहे हैं। भारतीय समाज का ताना बाना कुछ ऐसा है कि बच्चे तो बच्चे अधिकतर अभिभावक भी अपने बच्चों में कलक्टर की छवि देखने लगते है।

जहां तक बच्चों की बात है तो वह हर फैसला अपने जज्बात से लेना चाहता है। इस समय तक दिमाग के उपर दिल हावी हो चूका होता है। वह पारिवारिक बंधनों से मुक्त होकर बस बाहरी दुनिया के साथ   संपर्क साधना चाहता है। हर छात्र कॉलेज की जिंदगी में खोना चाहता है और अगर बात ऩॉर्थ कैंपस की हो तो बात ही कुछ और है।

लेकिन यही वह समय होता है जहां से भविष्य को दिशा मिलती है। उम्र का यह पड़ाव जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा होता है खासकर कैरियर की दृष्टि से। यहां पर अभिवावकों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। इसी समय अभिवावकों को अपने अनुभव के साथ साथ बच्चों की क्षमताओं का आंकलन भी करना पड़ता है। इन सबके बीच छात्रों की रुचि के विषयों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। लेकिन कई बार न तो छात्र को और न हीअभिभावकों को पता रहता है कि आखिर रुचियां किस दिशा में हैं । छात्र और अभिवावकों के अपने ख्वाब होते हैं और इनके बीच सामंजस्य बिठाना भी एक चुनौती से कम नहीं होता है।

12वीं के बाद अपने भविष्य का सही राह चुनना एक कठिन फैसला होता है। आज का दौर उस जमाने जैसा नहीं रहा, जब कैरियर निर्माण के रास्ते गिनती के हुआ करते थे। आज इन रास्तों का संजा ल बिछ चुका है। बाजार में उपलब्ध रंग बिरंगी बाजारु विकल्पों से लेकिन एक नई समस्या पैदा होगई है र वह है सही विकल्प चुनने की। इस कारण जरूरी है कि हम अपना कॅरियर चुनते वक्त रूचियों को भी समझें।

किसी खास कॅरियर विकल्प को चुनने से पहले अपनी व अपने परिवार की आर्थिक साम‌र्थ्य भी बहुत मायने रखती है। इस पक्ष को भी किसी भी नजरिए से नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अन्यथा कई उदाहरण हैं, जिसमें छात्रों को महंगे कॅरियर विकल्प में प्रवेश लेने के बाद पछताना पडा है। यह एक ऐसा समय होता है जब अपने आर्थिक, शैक्षणिक और अन्य पक्षों को समझते हुए कैरियर के आगे की दिशा और दशा तय की जाए ताकि जिंदगी के अमूल्य समय को नष्ट होने से बचाया जा सके। इस दौरान पैरेंट्स से सलाह,और विश्वसनीय  कैरियर कांउसलर से बातचीत फायदेमंद हो सकती है।

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Paul Orajiaka's Auldon Toys: Africa's Future Toy Making Giant?

Going through Auldon World’s website made me wish I could go back to being a toddler again and have a chance to play with these amazing and African-rooted toys. 373 more words

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